कभी विरोध तो कभी संघर्ष, दोस्त के साथ ने बदली किस्मत; अब बड़े मंचों पर जलवा बिखेर रहीं सोनम श्री

कभी विरोध तो कभी संघर्ष, दोस्त के साथ ने बदली किस्मत; अब बड़े मंचों पर जलवा बिखेर रहीं सोनम श्री


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Success Story: बिहार के जहानाबाद की लोक गायिका सोनम श्री इस छठ पूजा पर अपना नया गीत ‘केकर लाली लाली अंखिया’ लेकर आ रही हैं. परिवार और समाज के विरोध के बावजूद, 4 साल की कड़ी मेहनत और दोस्त के सहयोग से उन्होंने मुकाम हासिल किया है. आज वह कई बड़े मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन कर रही हैं.

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Success Story: छठ पूजा का समय आ गया है. ऐसे में हर तरफ छठ पूजा की गीत की गूंज सुनाई पड़ने लगी है. बिहार के कलाकार छठ से पूर्व कई नई गीत लाते हैं. छठ की गीत सुनने के बाद ऐसा महसूस होता है, मानो माहौल ही बिल्कुल अलग है. छठ की ऐसी कई गीत है, जो सुनने के बाद मंत्रमुग्ध करता है. ऐसी ही एक गायिका हैं, जिनका नाम सोनम श्री है. वो इस बार छठ में नई गीत लेकर आ रही हैं, जिसका बोल इस प्रकार है – केकर लाली लाली अंखिया केकर लंबी लंबी केस. यह गीत इस बार छठ पूजा से पहले लॉन्च कर रही हैं. सोनम श्री जहानाबाद जिले की रहने वाली हैं.

सोनम पहले भी कई छठ गीत गा चुकी हैं. साथ ही अलग-अलग तरह की गायिकी करती हैं. वो अबतक कई जगह बड़े बड़े मंच पर जाकर गायिकी कर चुके हैं. सोनम का सफर आसान नहीं रहा है और वो आज उनके पास एक वक्त फुर्सत नहीं है कि वो किसी दिन आराम से घर में बैठ सकें. वो न सिर्फ निजी कार्यक्रम में अपनी गायिकी प्रस्तुत करती हैं, बल्कि सरकारी कार्यक्रम में भी कई सांस्कृतिक कार्यक्रम का हिस्सा बन चुकी हैं. सोनम बताती हैं कि हमने कुछ समय पहले श्रावणी महोत्सव में एक महीना तक देवघर में कार्यक्रम करके आई हूं.

सिंगर सोनम की कहानी है प्रेरणा से भरी
सोनम Local 18 से कहानी बयां करती हैं. कहती हैं कि मेरा सफर आसान नहीं रहा है. हमारी एक दोस्त है, जो डांसर है. एक दिन दोस्त के कहने पर हम भी स्टेज साथ चली गई. रात भर वहीं रुकी और कार्यक्रम के अंत में म्यूजिकल ग्रुप के सामने माइक दे दिया गया. हमारा हाथ कांपने लगा, लेकिन फिर भी किसी तरह एक गाना गाई और फिर उस गाने ने हमें काफी प्यार दिया. इस तरह सफर शुरू हुआ. हालांकि, शुरुआत दौर बहुत कठिन था. जब घर के लोगों को जानकारी मिली तो बहुत चुनौतीपूर्ण रहा. घर के लोग नापसंद करने लगे. समाज के लोग नचनिया तक कहना शुरू कर दिया. ऐसे में घर से हटकर रहने तक की नौबत आ गई.

4 साल की मेहनत के बाद बदली कहानी
वो आगे अपनी यात्रा के बारे में बताती हैं कि बहुत दुर दूर तक यह सफर चला और वो भी अकेला. हालांकि, हिम्मत नहीं हारी. शुरू में पैसे भी कार्यक्रम के नहीं मिलते और ऐसे में स्थिति खराब होती चली गई. इस तरह से हाथ ब्यूटिशियन का हुनर था तो उसी से एक जगह नौकरी पकड़ी. इस तरह से कुछ पैसे मिलते और घर किसी तरह चलता. 2018 से गायिकी की यात्रा प्रारंभ हुई. उसके बाद 3 से 4 साल की कठिन मेहनत के कारण आज हमारे पास एक ऐसा वक्त आ चुका है कि अब हमारे पास फुर्सत नहीं है. कई बड़े बड़े मंच पर गायिकी कर चुकी हैं. लोकगीत के साथ कई तरह के गाने गाती हूं. हमारी पढ़ाई लिखाई संगीत में हो रही है.



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