जयपुर. राजस्थान की भजनलाल सरकार के करीब 30 महीने के कार्यकाल में सात बड़े आईएएस अधिकारियों को एपीओ किए जाने के मामले चर्चा में रहे हैं. इनमें एसीएस शिखर अग्रवाल से लेकर संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर और विभागीय सचिव स्तर के अधिकारी शामिल हैं. खास बात यह है कि दो अधिकारियों को उस समय एपीओ किया गया, जब वे विदेश में थे. पहले खाद्य विभाग के पूर्व सचिव अंबरीश कुमार को विदेश में रहते हुए एपीओ किया गया था. अब एसीएस शिखर अग्रवाल के खिलाफ भी विदेश दौरे के दौरान कार्रवाई हुई है. इन दोनों मामलों ने प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है.
हालांकि सरकार की ओर से अलग-अलग अधिकारियों को हटाने के पीछे अलग-अलग परिस्थितियां रही हैं. किसी के मामले में कार्यालय से अनुपस्थित रहने का मुद्दा सामने आया, तो किसी के खिलाफ जमीन आवंटन में कथित अनियमितताओं की शिकायतें थीं. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में तकनीकी गड़बड़ी के बाद भी एक वरिष्ठ अधिकारी को एपीओ किया गया था. आइए जानते हैं वे सात अधिकारी कौन हैं और उनके मामले क्यों सुर्खियों में आए.
विदेश दौरे के बीच एपीओ हुए शिखर अग्रवाल
मंजूरी नहीं मिली फिर भी विदेश गए अंबरीश कुमार
खाद्य विभाग के पूर्व सचिव अंबरीश कुमार को करीब तीन महीने पहले एपीओ किया गया था. उन्होंने निजी काम से विदेश जाने के लिए कार्मिक विभाग से अनुमति मांगी थी, लेकिन उच्च स्तर से स्वीकृति नहीं मिली. इसके बावजूद वे विदेश चले गए. आरोप है कि विदेश में रहते हुए उन्होंने कार्यालय की फाइलें ऑनलाइन मंगवाईं और उन पर मंजूरी दी. मामला सामने आने के बाद उन्हें एपीओ किया गया.
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जमीन आवंटन विवाद में हटाए गए थे ललित गोयल
आईएएस ललित गोयल को मई 2026 में भीलवाड़ा यूआईटी के सचिव पद से हटाकर एपीओ किया गया. उनके कार्यकाल में नेहरू विहार प्रोजेक्ट के तहत जमीन आवंटन से जुड़ी कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं. इस मामले के चर्चा में आने के बाद सरकार ने उन्हें पद से हटा दिया.
25 लाख की रिश्वत मांगने का हनुमानमल ढाका पर लगा था आरोप
दूदू के तत्कालीन जिला कलेक्टर हनुमानमल ढाका को वर्ष 2024 में एपीओ किया गया था. उनके खिलाफ जमीन के भू-रूपांतरण के बदले 25 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप सामने आया था. जिला कलेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई उस समय काफी चर्चा में रही.
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एपीओ होने पर अधिकारी के साथ क्या होता है?
एपीओ का मतलब Awaiting Posting Orders है. आसान भाषा में इसका मतलब है कि अधिकारी को उसके वर्तमान पद से हटाकर अगली नियुक्ति के आदेशों की प्रतीक्षा में रखा गया है. इस दौरान अधिकारी को सरकार के निर्देशों के अनुसार निर्धारित कार्यालय में उपस्थिति देनी पड़ सकती है. नई पोस्टिंग मिलने पर वह दोबारा जिम्मेदारी संभाल सकता है. एपीओ कोई आपराधिक सजा नहीं है. इसे निलंबन या बर्खास्तगी के समान भी नहीं माना जाता. इसलिए किसी अधिकारी के एपीओ होने से उसके खिलाफ लगे आरोप सही साबित होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता.
प्रशासनिक फैसलों पर क्यों रहती है नजर?
आईएएस अधिकारी जिलों और विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते हैं. ऐसे में किसी कलेक्टर, संभागीय आयुक्त या विभागीय प्रमुख को अचानक एपीओ करने पर सवाल उठना स्वाभाविक है. सरकार के ऐसे फैसलों के पीछे प्रशासनिक जरूरत, कार्यशैली से जुड़ी शिकायतें या अन्य कारण हो सकते हैं. भजनलाल सरकार के कार्यकाल में सात आईएएस अधिकारियों के एपीओ होने का आंकड़ा इसलिए चर्चा में है, क्योंकि इनमें वरिष्ठ पदों पर तैनात अधिकारी भी शामिल रहे हैं.