Nifty 50 में एंट्री होते ही जियो प्‍लेटफॉर्म्‍स पर होगी पैसों की बारिश, इंतजार में हैं बड़े खिलाड़ी

Nifty 50 में एंट्री होते ही जियो प्‍लेटफॉर्म्‍स पर होगी पैसों की बारिश, इंतजार में हैं बड़े खिलाड़ी


नई दिल्‍ली. हाल ही में शेयर बाजार में लिस्ट हुई जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) लगभग 13 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप के साथ देश की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी बन चुकी है. बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि सितंबर 2027 तक जियो शेयर निफ्टी 50 (Nifty 50) में और दिसंबर 2027 तक बीएसई सेंसेक्‍स (BSE Sensex) में शामिल हो सकता है. निफ्टी 50 में शामिल होते ही ग्लोबल और डोमेस्टिक पैसिव फंड्स की ओर से कंपनी के करीब 36,500 करोड़ रुपये मूल्‍य के शेयर खरीदने की संभावना है. यह संभावित निवेश कंपनी द्वारा आईपीओ में जुटाए गए 30,213 करोड़ रुपये से करीब 21% अधिक है. विश्लेषकों का मानना है कि पैसिव फंड जियो शेयर में यह पेसा 11 से 14 महीनों की अवधि में लगा सकते हैं.

किसी भी शेयर को निफ्टी 50 में शामिल करने के लिए एनएसई (NSE) पिछले छह महीनों के औसत फ्री-फ्लोट बाजार पूंजीकरण का आकलन करता है. इंडेक्स का रीबैलेंसिंग रिव्यू साल में दो बार, मार्च और सितंबर में किया जाता है. इसके लिए 31 जनवरी और 31 जुलाई तक के छह महीनों के डेटा को आधार बनाया जाता है. 29 अक्टूबर को जियो प्लेटफॉर्म्स का कुल मार्केट कैप 13.1 लाख करोड़ रुपये था. एनएसई के मुताबिक इसका मौजूदा फ्री-फ्लोट मार्केट कैप 28,524 करोड़ रुपये है. लिस्टिंग के समय कंपनी की केवल 3% इक्विटी को सार्वजनिक ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध कराया गया था.

लॉक-इन खत्म होते ही बढ़ेगा फ्री-फ्लोट

मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, जियो प्‍लेटफॉर्म्‍स की करीब 32.5% हिस्सेदारी फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के रूप में गूगल, मेटा और जनरल अटलांटिक जैसे बड़े निवेशकों के पास है. पीएल कैपिटल (PL Capital) की डेटाबेस एनालिस्ट मन्नत गांधी के अनुसार, अप्रैल 2027 में प्री-आईपीओ के लगभग 299.78 करोड़ शेयर या 32.5% हिस्सेदारी लॉक-इन अवधि से बाहर आ जाएगी.

इसी तरह नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच करीब 7.25 करोड़ एंकर शेयर का लॉक-इन भी खत्‍म हो जाएगा. इससे कुल अनलॉक्ड शेयरों की संख्या 307 करोड़ (33.3%) हो जाएगी. यदि पीआईएफ (PIF), सिल्वर लेक और केकेआर (KKR) मेटा और गूगल की को भी फ्री फ्लोट माना जाए तो यह बढ़कर 35.5% तक जा सकता है. गांधी ने आगे कहा कि अगर शेयर की कीमत में अच्छी बढ़त देखने को मिलती है और बाजार की स्थिति अनुकूल रहती है, तो मौजूदा निवेशक अपनी 1-2% हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर सकते हैं.

F&O सेगमेंट में एंट्री है जरूरी शर्त

निफ्टी 50 में शामिल होने के लिए कंपनी के शेयर का फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) यानी डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रेड होना अनिवार्य है. बाजार जानकारों का मानना है कि जियो प्लेटफॉर्म्स जून-जुलाई 2027 तक F&O सेगमेंट में शामिल होने की पात्रता हासिल कर सकती है. अप्रैल 2027 तक कंपनी का छह महीने का रेगुलर ट्रेडिंग रिकॉर्ड भी पूरा हो जाएगा. यदि इंडेक्स समीक्षा से पहले जरूरी नियामकीय मंजूरियां मिल जाती हैं, तो सितंबर 2027 में निफ्टी 50 में कंपनी का प्रवेश संभव हो सकेगा.

कितना हो सकता है Nifty और सेंसेक्‍स में वेटेज

विश्लेषकों के आकलन के मुताबिक, यदि शेयर का भाव 1,480 रुपये के आसपास रहता है और फ्री-फ्लोट मार्केट कैप 4.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचता है, तो निफ्टी 50 में जियो प्लेटफॉर्म्स का संभावित वेटेज लगभग 4.2% हो सकता है. वहीं, केवल 30 कंपनियों वाले बीएसई सेंसेक्स में इसका संभावित वेटेज 4.9% तक पहुंच सकता है. हाल ही में निफ्टी में शामिल हुए बीएसई (BSE) का फ्री-फ्लोट मार्केट कैप 1.42 लाख करोड़ रुपये और इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo) का 1.05 लाख करोड़ रुपये रहा है.

फंड मैनेजर्स का मानना है कि लॉक-इन खत्म होने के बाद भी बड़े निवेशकों द्वारा खुले बाजार में आक्रामक बिकवाली की संभावना कम है. अनुकूल बाजार स्थितियों में यदि मौजूदा निवेशक 1-2% हिस्सेदारी बेचते भी हैं, तो इससे कंपनी की ट्रेडिंग लिक्विडिटी में सुधार ही होगा. यदि जियो के एआई (AI) और एंटरप्राइज बिजनेस भारती एयरटेल के मुकाबले इसकी प्रीमियम वैल्यूएशन को सही ठहराते हैं, तो पैसिव फंड्स की 36,500 करोड़ रुपये की अनुमानित खरीदारी शेयर को दीर्घकालिक मजबूती दे सकती है.

(डिस्क्लेमर – नेटवर्क18 और टीवी18 कंपनियां चैनल/वेबसाइट का संचालन करती हैं, जिनका नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है.)



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