gayaji bodh gaya disabled beggar generosity donation to buddhist monk

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खुद मांगकर खाता, फिर भी किया दान; दिव्यांग भिखारी की दरियादिली देख भावुक हुए

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Bodhgaya News: बोधगया के महाबोधि मंदिर के पास एक दिव्यांग भिखारी ने खुद जरूरतमंद होने के बावजूद भिक्षाटन कर रहे बौद्ध भिक्षु को अपने पास से कुछ रुपये दान किए. इस मानवीय घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जिसकी लोग जमकर सराहना कर रहे हैं.

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गयाजी: कहते हैं कि दूसरों की मदद करने के लिए अमीर होना जरूरी नहीं, बल्कि बड़ा दिल होना जरूरी है. बोधगया में एक दिव्यांग भिखारी ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. खुद जरूरतमंद होने के बावजूद इस शख्स ने एक बौद्ध भिक्षु को रोककर अपनी कमाई के कुछ रुपये दान कर दिए. यह पल लोगों का दिल छू लिया. लोग दिव्यांग व्यक्ति की दरियादिली और इंसानियत की जमकर तारीफ कर रहे हैं.

भीख मांगकर जुटाए गए पैसों में से किया दान
दरअसल, यह पूरा मामला ज्ञान और शांति की भूमि बोधगया का है. महाबोधि मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में भिखारी सड़क किनारे बैठते हैं. इन्हीं में दो पैरों से दिव्यांग एक व्यक्ति कालचक्र मैदान के पास सड़क किनारे बैठा था. इसी दौरान बौद्ध भिक्षुओं का एक समूह वहां से गुजर रहा था. बताया जाता है कि भिक्षुओं का यह समूह भिक्षाटन कर रहा था. तभी सड़क किनारे बैठे दिव्यांग भिखारी ने एक बौद्ध भिक्षु को रोक लिया. खुद भीख मांगकर जुटाए गए पैसों में से कुछ रुपये उन्हें दान कर दिए. खुद आर्थिक रूप से जरूरतमंद होने के बावजूद दूसरे की मदद करने की उसकी इस भावना ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींच लिया.

दिव्यांग की दरियादिली देख भावुक हुए बौद्ध भिक्षु
दिव्यांग व्यक्ति की इस दरियादिली को देखकर बौद्ध भिक्षु भी भावुक नजर आए. उन्होंने उसे पानी की बोतल, बिस्कुट का पैकेट और कुछ रुपये दिए. इसके साथ ही उसके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद भी दिया. इस दौरान आसपास मौजूद अन्य बौद्ध भिक्षुओं के चेहरे पर भी मुस्कान दिखाई दी.

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
इस भावुक कर देने वाले घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो देखने के बाद लोग दिव्यांग भिखारी की जमकर तारीफ कर रहे हैं. सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि दूसरों की मदद करने के लिए बड़ी संपत्ति नहीं, बल्कि बड़ा दिल होना जरूरी है. बोधगया की इस छोटी-सी घटना ने एक बार फिर इंसानियत और सेवा का बड़ा संदेश दिया है. खुद अभाव में रहने के बावजूद दूसरों की मदद करने का यह जज्बा बताता है कि असली अमीरी पैसों से नहीं, बल्कि इंसान के विचारों और उसके व्यवहार से होती है.



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