पाली. रोशनी और उल्लास का पर्व दीपावली खुशियां लेकर आता है, लेकिन इसके साथ ही यह अपने पीछे प्रदूषण का एक ऐसा दौर छोड़ जाता है जो सेहत के लिए भारी पड़ सकता है. दीपावली पर होने वाली आतिशबाजी और पटाखों का घना धुआं सिर्फ हमारे पर्यावरण और हवा को ही प्रदूषित नहीं करता, बल्कि यह सीधे तौर पर आपके फेफड़ों और आंखों के लिए एक गंभीर खतरा बन जाता है. पटाखों के इस जहरीले धुएं से अस्थमा रोगियों, बच्चों और बुजुर्गों की सांसें तक उखड़ सकती हैं, साथ ही आंखों में जलन और संक्रमण की शिकायतें आम हो जाती हैं. इसलिए इस दिवाली जश्न के साथ-साथ सेहत की फिक्र भी उतनी ही जरूरी है. पटाखों के धुएं से अपने फेफड़ों और आंखों को सुरक्षित रखने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए.
मरीजों पर इसका पड़ता है गंभीर असर
प्रदूषण के इस घातक मेल का सबसे बुरा असर समाज के संवेदनशील वर्गों पर पड़ता है. डॉ. दिनेश कोठारी ने बताया कि सांस और अस्थमा के मरीजों को इस मौसम में बहुत अधिक कष्ट का सामना करना पड़ता है. हैरानी की बात यह है कि जो मरीज सालभर दवाइयों के सहारे अपनी बीमारी को नियंत्रित रखते हैं और बिल्कुल ठीक स्थिति में रहते हैं, वे भी इस भारी प्रदूषण की चपेट में आकर बीमार पड़ जाते हैं. पटाखों के धुएं और पराग कणों के मिश्रण से मरीजों में लगातार खांसी उठना, सांस फूलना, दम घुटना और गले तथा छाती में इंफेक्शन जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं. यह प्रदूषण सांस के रोगियों के लिए जानलेवा या घातक सिद्ध हो सकता है.
डॉक्टर द्वारा दी गई जरूरी सलाह का करें अमल
मास्क का नियमित उपयोग करें: जिन लोगों को सांस की बीमारी, दमा या किसी भी तरह की एलर्जी का खतरा है, उन्हें घर से बाहर निकलते समय या पटाखे छूट रहे हों तब मास्क जरूर पहनना चाहिए. यह जहरीले कणों को फेफड़ों में जाने से रोकता है.
प्रदूषण वाली जगहों से दूरी बनाएं: अत्यधिक प्रदूषण वाले स्थानों और भारी आतिशबाजी वाले इलाकों में जाने से पूरी तरह परहेज करें. कोशिश करें कि त्योहार के इन दिनों में घर के अंदर ही सुरक्षित रहें.
दवाइयां और इनहेलर हमेशा पास रखें: यदि आपके या आपके परिवार में किसी भी सदस्य को अस्थमा या सांस की पुरानी बीमारी है, तो इस दौरान विशेष सतर्कता बरतें. डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनी नियमित दवाइयां समय पर लें और अपना इनहेलर हमेशा अपने पास रखें ताकि आपात स्थिति से निपटा जा सके.
प्रशासनिक नियमों का पालन करें: सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रदूषण नियंत्रण को लेकर जो दिशा-निर्देश और समय-सीमा तय की जाती है, उसका ईमानदारी से पालन करें. पटाखों के सीमित उपयोग से हम न केवल पर्यावरण को बचाते हैं, बल्कि अपनी और अपनों की सांसों की रक्षा भी करते हैं.