2500 लागत, 5 लाख की बिक्री…गोंडा के किसान ने आधे बीघे में लगाए ऐसे पेड़
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Eucalyptus farming method : गोंडा के किसान प्रिंस सिंह ने खेती से कमाई का नया तरीका निकाला है. वह यूकेलिप्टस यानी सफेदा के पेड़ों के साथ दूसरी फसलें भी उगा रहे हैं. लोकल 18 से प्रिंस कहते हैं कि उन्होंने पहले इन पेड़ों के बीच तिल की खेती की, जिसकी कटाई हो चुकी है. अब वह उसी खेत में सरसों की बुवाई करने की तैयारी है. प्रिंस सिंह बताते हैं कि उन्होंने करीब आधा बीघा में यूकेलिप्टस के 300 पौधे लगाए हैं. पौधे से पौधे की दूरी 3 फीट और लाइन से लाइन की दूरी 4 फीट रखी गई है. प्रिंस को यूकेलिप्टस लगाने में अब तक करीब 2,500 रुपये लगे हैं. उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में पेड़ों से 5 लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है.
गोंडा. क्या आप भी खेती में कुछ अलग करना चाहते हैं. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में विकासखंड झंझरी ग्राम सभा केशवपुर पहाड़वा का एक किसान यही कर रहा है. वह खेती के नए तरीके अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने में जुटा है. वह यूकेलिप्टस यानी सफेदा के पेड़ों के साथ दूसरी फसलें भी उगा रहा है. पहले पेड़ों के बीच तिल की खेती की, जिसकी कटाई हो चुकी है. अब वह उसी खेत में सरसों की बुवाई करने की तैयारी है. किसान का कहना है कि पेड़ों के बीच खाली जगह का इस्तेमाल करके दूसरी फसलें भी उगाई जा सकती हैं. लोकल 18 से गोंडा के किसान प्रिंस सिंह बताते हैं कि उन्होंने करीब आधा बीघा में यूकेलिप्टस के लगभग 300 पौधे लगाए हैं. पौधे से पौधे की दूरी 3 फीट और एक लाइन से दूसरी लाइन की दूरी 4 फीट रखी गई है. इससे पेड़ों के बीच खाली जगह मिल जाती है, जिसमें दूसरी फसलें उगाई जा सकती हैं. प्रिंस बताते हैं कि उन्होंने सफेदा के पेड़ों के बीच पहले तिल की खेती की थी, जिसकी कटाई हो चुकी है. अब खेत में पानी भर दिया गया है. पानी सूखने के बाद अच्छी तरह जुताई की जाएगी. इसके बाद सरसों की बुवाई की होगी.
प्रिंस बताते हैं कि यूकेलिप्टस की बागवानी लगाने में अब तक करीब 2,500 रुपये खर्च हुए हैं. उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में पेड़ों से लगभग 5 लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है. हालांकि, यह कमाई पेड़ों की बढ़वार, बाजार भाव और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेगी. प्रिंस सिंह कहते हैं कि जब यूकेलिप्टस के पेड़ बड़े हो जाएंगे, तब वह उनके बीच हल्दी और जिमीकंद की खेती करने की योजना बना रहे हैं. इन फसलों को कुछ हद तक छायादार जगह में भी उगाया जा सकता है. हालांकि, अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी, नमी और छाया की स्थिति का ध्यान रखना जरूरी होगा.
रखें इन बातों का ध्यान
प्रिंस सिंह के अनुसार, सफेदा के पेड़ों के बीच दूसरी फसल लगाने से पहले पेड़ों की उम्र, उनके बीच की दूरी, धूप और मिट्टी की नमी को देखना चाहिए. पर्याप्त धूप और जगह मिलने पर तिल और सरसों जैसी फसलों की खेती की जा सकती है. पेड़ों के बड़े होने पर छाया बढ़ने से फसल का चुनाव भी उसी के अनुसार करना चाहिए. इस तरह किसान एक ही खेत में पेड़ों के साथ दूसरी फसलें उगाकर जमीन का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे उन्हें पेड़ों के तैयार होने तक दूसरी फसलों से आमदनी मिलती रहती है.