हमीरपुर. हिमाचल प्रदेश में सेना के लिए ड्रोन बनाने के लिए साढ़े तीन करोड़ की फंडिंग मामले में लगातार खुलासे हो रहे हैं. हालांकि, पूरे मामले में सर्वेश के साथ साइबर ठगी हुई है. अब हमीरपुर के बड़ू के इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रिंसिपल ने भी अपना पक्ष रखा है. फिलहाल, सर्वेश का इलाज पीजीआई चंडीगढ़ में चल रहा है और उसकी हालत में सुधार हो रहा है.
उधर, न्यूज 18 को मिली अहम जानकारी के अनुसार छात्र सर्वेश के तीसरी मंजिल से नीचे गिरने से पहले सर्वेश ने दस मिनट तक बालकनी में जदोजहद में चहलकदमी करके मन को शांत करने का प्रयास किया है लेकिन फिर वह अपने कमरे में गया और अंदर से कुंडी लगा ली और फिर उसके गिरने की खबर आई. मामले को लेकर कॉलेज प्रबंधन पर सवाल उठ रहे थे और अब पॉलिटेक्निक संस्थान के प्रिंसिपल ने भी मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा है.
प्रिंसिपल चंद्रशेखर ने सेना ने की ओर से भेजी गई ईमेल को भी सांझा किया है. संस्थान के प्रिंसिपल चंद्रशेखर ने कहा कि 28 अक्तूबर को एक डिफेंस से ईमेल के माध्यम पता चला है कि मामले में सर्वेश कुमार के साथ साइबर धोखाधडी हो रही है और इसके बाद सर्वेश से भी बात की गई तो वह भी कोई ठोस जबाव नहीं दे पाया है. इसके चलते ही पुलिस में इसकी शिकायत की है और अब पुलिस भी मामले में गहनता से पडताल कर रही हैं.
छात्र सर्वेश के तीसरी मंजिल से गिरने के बारे में प्रिंसिपल ने कहा कि इसकी जांच चल रही है और जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि वह उपर से कैसे गिर गया. उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन सर्वेश ने 11 बजे के करीब आकर मेरे से बात भी की थी लेकिन दोपहर के समय अपने हास्टल के कमरे में जाकर गिरने की सूचना मिली. संस्थान के प्रिंसिपल ने बताया कि छात्र एक गंभीर ऑनलाइन ठगी का शिकार हुआ प्रतीत होता है. इस घटना के बाद छात्र का चंडीगढ़ स्थित पीजीआई में उपचार चल रहा है.
प्रिंसिपल चद्रशेखर ने बताया कि पहले भी जब उन्होंने सर्वेश से फंडिंग को लेकर पूछताछ की थी तो उसने कुछ नहीं बताया और कहा कि ये सारा सीक्रेट है और प्रोजेक्ट की टर्म एंड कंडींशन में यही लिखा है कि वह कोई भी जानकारी किसे से ना शेयर करे. इस मामले में पहले से ही गडबड होने की आशंका लग रही थी क्योंकि सर्वेश कुमार ने शुरू से कई तथ्यों को छुपाने का काम किया है. उन्होंने बताया कि सर्वेश ने केवल 27 अक्तूबर को डिफेंस के साथ ईमेल कर जानकारी लेने की बात ही सांझा की थी और इसका खुलासा 28 अक्तूबर को ईमेल वापिस आने पर हुआ है.
सेना ने मेल में कहा-कोई ग्रांट नहीं दी
प्रिंसिपल ने कहा कि पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, साइबर ठगों ने बड़ी चालाकी से डिजिटल पत्राचार के माध्यम से छात्र को यह विश्वास दिलाया कि उसके रुद्रा एज टी-1 (स्पेक्ट्रा) नामक प्रोजैक्ट के लिए भारत सरकार के रक्षा नवाचार संगठन की आईडैक्स पहल के तहत 3.5 करोड़ रुपए की ग्रांट मंजूर की गई है. छात्र ठगों के इस सुनियोजित जाल में फंस गया और इसे सच मान बैठा. इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब अक्तूबर 2026 में रक्षा नवाचार संगठन से प्राप्त एक आधिकारिक सूचना में स्पष्ट किया गया कि उनके आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उक्त छात्र या उससे जुड़े किसी भी स्टार्टअप को कभी कोई ग्रांट स्वीकृत या जारी नहीं की गई है.
सर्वेश हो गया था परेशान
सूत्रों ने बताया कि 27 अक्तूबर को प्रिंसिपल से मिलने के बाद सर्वेश जब लंच का वक्त हुआ तो सर्वेश अपने कमरे में गया और फिर उसने अंदर से कुंडी लगाई. अंदर के बाद उसने कमरे की बालकनी में भी कुंडी लगाई. इसके बाद खबर आई कि वह तीसरी मंजिल से नीचे गिर गया. सूत्रों ने बताया कि सर्वेश ने दोस्तों से कहा था कि वह लंच साथ में करेंगे. हालांकि, जब दोस्तों ने उसे कई बार बुलाया तो वह साथ में नहीं गया. हालांकि, यहां पर मामला संदिग्ध लग रहा है और पुलिस जांच कर रही है कि सर्वेश यहां पर गिरा था या खुद छलांग लगाई.
सेना ने इमेल में की बात
सर्वेस और सेना के बीच में इस खबर को लेकर ईमेल के जरिये बात हुई और फिर सेना ने कॉलेज प्रंबंधन को लिखा कि उसने साइबर ठगी की बात कही है और इसलिए कॉलेज प्रबंधन मामले में कार्रवाई करे. घटना के बाद से प्रिंसिपल भी दवाब में नजर आ रहे हैं. वह कहते हैं कि सर्वेश ने जो कागज दिखाए थे वह ऐसा ही प्रतीत होते थे कि उसे प्रोजेक्ट मिला है.