बिना महंगे फर्टिलाइजर के पपीते के पौधे को बनाएं हरा-भरा, घर की देसी खाद से बढ़ेगी बढ़वार, जानें नुस्खा

बिना महंगे फर्टिलाइजर के पपीते के पौधे को बनाएं हरा-भरा, घर की देसी खाद से बढ़ेगी बढ़वार, जानें नुस्खा


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पपीते के पौधे में डालें ये देसी खाद, तेजी से बढ़ेगा पौधा और जल्द आने लगेंगे फल

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Papaya Farming Tips: पपीते के पौधे की अच्छी बढ़वार और बेहतर फल उत्पादन के लिए सही पोषण बेहद जरूरी है. इसके लिए जैविक और देसी खाद का इस्तेमाल पौधे को जरूरी पोषक तत्व देने में मदद कर सकता है. खाद डालने से पहले पौधे की उम्र, मिट्टी की स्थिति और पानी की जरूरत का ध्यान रखना चाहिए.

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भीलवाड़ा – आमतौर पर देखा जाता हैं की घर की छत, आंगन या बगीचे में पपीते का पौधा लगाना काफी पसंद किया जा रहा है. कई लोग तो इस मुनाफे के नजरिए से खेत पर भी लगाकर इसकी खेती करके अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. पपीता एक ऐसा पेड़ हैं जिसमें 12 महीने ही फल आते हैं पपीता सेहत के लिए फायदेमंद होने के साथ किसानों के लिए भी अच्छी आमदनी देने वाली फसल है. कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि मेहनत करने के बावजूद भी फसल में फल नहीं आते हैं जिसके वजह से पेड़ पूरी तरीके से खाली दिखाई देता है या फिर उस पर कच्चे फल दिखाई देते हैं.

अगर पपीते के पौधे में समय पर फल आने में देरी हो रही है तो इसके पीछे पोषक तत्वों की कमी, सिंचाई में गड़बड़ी या पर्याप्त धूप नहीं मिलना कारण हो सकता है. ऐसे में पौधे को संतुलित मात्रा में गोबर की सड़ी खाद और जरूरी पोषक तत्व देना फायदेमंद रहता है. हालांकि जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देने से पत्तियां तो बढ़ सकती हैं, लेकिन फूल आने में देरी हो सकती है. सही देखभाल से बेहतर फल उत्पादन लिया जा सकता है.

खाद डालने से पहले मिट्टी की हल्की गुड़ाई
भीलवाड़ा कृषि विभाग के उद्यान डिपार्टमेंट के डॉक्टर शंकर सिंह राठौड़ ने बताया कि पपीता सेहत के लिए फायदेमंद होने के साथ किसानों के लिए भी अच्छी आमदनी का जरिया है. लेकिन कई बार लोगों की शिकायत रहती है कि पौधा तो तेजी से बढ़ रहा है लेकिन उसमें फूल और फल नहीं आ रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह सही खाद, धूप और देखभाल की कमी हो सकती है. कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर पपीते के पौधे को स्वस्थ रखा जा सकता है और बेहतर फल प्राप्त किए जा सकते हैं. पपीते के पौधे को अच्छी ग्रोथ देने के लिए सड़ी हुई गोबर की खाद और वर्मीकंपोस्ट काफी फायदेमंद होती है. पौधे को हर 15 से 20 दिन में थोड़ी मात्रा में वर्मीकंपोस्ट या गोबर की सड़ी खाद दे सकते हैं. इसके साथ सरसों की खली का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. खाद डालने से पहले मिट्टी की हल्की गुड़ाई जरूर करें.

कीटनाशक का इस्तेमाल लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार
खाद को मिट्टी में मिलाने के बाद पानी देना न भूलें. अगर पपीते की पत्तियां पीली पड़ रही हैं, सिकुड़ रही हैं या पौधा मुरझा रहा है तो इसकी वजह कीट, वायरस या पोषक तत्वों की कमी हो सकती है. ऐसी स्थिति में प्रभावित पत्तियों को हटाएं और पौधे की जांच करें. नीम आधारित कीटनाशक का इस्तेमाल लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार कर सकते हैं. पपीते के पौधे को अच्छी धूप, संतुलित खाद और जरूरत के अनुसार पानी मिलता रहे तो उसकी बढ़वार बेहतर होती है और फल उत्पादन में भी मदद मिलती है.

ऐसे तैयार करें पपीते का पौधा
उद्यान डिपार्टमेंट के डॉक्टर शंकर सिंह राठौड़ ने बताया कि पपीते के पौधे में नर, मादा और उभयलिंगी तीन तरह के पौधे होते हैं. नर पौधों में फल नहीं लगते, जबकि मादा और उभयलिंगी पौधों में फल लग सकते हैं. इसलिए नर्सरी से पौधा लेते समय अच्छी किस्म का पौधा चुनना फायदेमंद रहता है. जब पौधे में फूल आने लगें तो ज्यादा नाइट्रोजन वाली खाद देने से बचें. केले के छिलकों से तैयार पानी या सीवीड खाद का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. इनका छिड़काव करने से पहले उत्पाद के निर्देशों के अनुसार सही मात्रा तय करें. अगर आप घर पर पपीते का पौधा तैयार करना चाहते हैं, तो अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का इस्तेमाल करें. पौध तैयार करने के लिए 50 प्रतिशत बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत सड़ी गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट और 20 प्रतिशत कोकोपीट या रेत मिलाकर मिश्रण तैयार करें. इसमें थोड़ी नीम खली भी मिला सकते हैं. पौधे को कम से कम 24 इंच के गमले या ग्रो बैग में लगाएं. ऐसी जगह रखें जहां रोजाना 4 से 6 घंटे अच्छी धूप मिल सके. पर्याप्त धूप मिलने से पौधे का तना मजबूत होता है और फूल-फल आने में मदद मिलती है.



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