बरेली के ऐतिहासिक तोपखाना सैन्य छावनी में आज भी है जनरल आवास, 1857 से जुड़ा है इतिहास, अब हो गया रिहायशी इलाका

बरेली के ऐतिहासिक तोपखाना सैन्य छावनी में आज भी है जनरल आवास, 1857 से जुड़ा है इतिहास, अब हो गया रिहायशी इलाका


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बरेली का तोपखाना इलाका कभी अंग्रेजी शासन में सैन्य छावनी और तोपें रखने का केंद्र था. 1857 के विद्रोह से जुड़े इस क्षेत्र में आज भी अंग्रेजी वास्तुकला के पुराने मकान और जनरल आवास मौजूद हैं, जो अब घनी रिहायशी इलाके में बदल गई. यह क्षेत्र अंग्रेजों के समय के कैंट इलाके से जुड़ा था. उनके अनुसार, पहले यहां तोपें और सैनिकों के घोड़े रखे जाते थे. समय के साथ सैन्य गतिविधियां खत्म हुईं और इलाके में मकान बनते गए.

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बरेली: बरेली शहर में कई ऐसे स्थान हैं. जो आज रिहायशी इलाकों का हिस्सा हैं. लेकिन उनका अतीत अंग्रेजी शासन और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है. लाल फाटक रोड के पास मेयर कार्यालय के पड़ोस में स्थित तोपखाना भी ऐसा ही इलाका है. स्थानीय लोगों के अनुसार, अंग्रेजों के दौर में यहां तोपें रखी जाती थीं और सैनिकों के घोड़ों के लिए व्यवस्था थी.

तोपखाना में आज भी है जनरल आवास

छावनी से रिहायशी बस्ती तक स्थानीय निवासी संतोष प्रकाश, जो करीब 40 वर्षों से यहां रह रहे हैं. बताते हैं कि यह क्षेत्र अंग्रेजों के समय के कैंट इलाके से जुड़ा था. उनके अनुसार, पहले यहां तोपें और सैनिकों के घोड़े रखे जाते थे. समय के साथ सैन्य गतिविधियां खत्म हुईं और इलाके में मकान बनते गए. आज भी यहां पुराने मकान, जनरल आवास और चूने से बने भवन दिखाई देते हैं. इनकी स्थापत्य शैली अंग्रेजी दौर की याद दिलाती है. कभी सैन्य गतिविधियों से जुड़ा माना जाने वाला यह क्षेत्र अब घनी रिहायशी बस्ती बन चुका है.

1857 के विद्रोह से संबंध, अंग्रेजी स्थापत्य कला का दिलाती है याद

बरेली का इतिहास 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से भी बरेली का ऐतिहासिक तोपखाना सैन्य छावनी से रिहायशी इलाके तक का सफर, 1857 से भी जुड़ा इतिहास. आज भी यहां पुराने मकान, जनरल आवास और चूने से बने भवन दिखाई देते हैं. इनकी स्थापत्य शैली अंग्रेजी दौर की याद दिलाती है. कभी सैन्य गतिविधियों से जुड़ा माना जाने वाला यह क्षेत्र अब घनी रिहायशी बस्ती बन चुका है.

संरक्षण की जरूरत,आज बरेली का तोपखाना पुराने मकानों और स्थापत्य के कारण अपनी अलग पहचान रखता है. स्थानीय मान्यताओं को ऐतिहासिक दस्तावेजों से जोड़कर इस क्षेत्र का प्रमाणिक इतिहास सामने लाने की जरूरत है. पुराने नक्शों, अभिलेखों और भवनों का संरक्षण किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां बरेली की इस विरासत से परिचित हो सकें.



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