Tata Electronics Investment: टाटा ग्रुप ने एपल के आईफोन और सेमीकंडक्टर बनाने वाले अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए एक बार फिर बड़ा निवेश किया है. टाटा संस ने अपनी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में 1100 करोड़ रुपये फिर डाले हैं. यह पैसा कंपनी के सेमीकंडक्टर कारोबार में चल रहे निवेश और विस्तार पर खर्च किया जाएगा. इससे पहले मार्च में भी टाटा संस ने कंपनी में 1500 करोड़ रुपये लगाए थे. खास बात यह है कि कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन उसका घाटा भी बढ़ा है. वहीं, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति और टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर खींचतान भी जारी है.
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा संस ने सितंबर 2026 में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में 1,100 करोड़ रुपये की नई पूंजी डाली है. इससे पहले मार्च में 1,500 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था. कंपनी में आए नए पैसे का इस्तेमाल मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर कारोबार में चल रहे पूंजीगत खर्च यानी कैपेक्स के लिए होगा. दरअसल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिर्फ आईफोन बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती. कंपनी स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ चिप बनाने, उनकी पैकेजिंग और टेस्टिंग तक का कारोबार खड़ा कर रही है. इन परियोजनाओं में मशीनों, तकनीक, जमीन और फैक्ट्री निर्माण पर भारी खर्च की जरूरत है. टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन भी इस कारोबार को भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के लिए लंबी अवधि का निवेश बता चुके हैं. कंपनी की योजना अगले पांच साल में 30 अरब डॉलर का कारोबार खड़ा करने की है.
घाटा बढ़ा, लेकिन कमाई में करीब दोगुनी बढ़ोतरी
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की वित्तीय तस्वीर दिलचस्प है. कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अभी उसे शुद्ध मुनाफे का इंतजार है. वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू करीब 1.30 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले लगभग 96% ज्यादा है. इससे पहले कंपनी की कमाई 66,601 करोड़ रुपये थी. लेकिन इस दौरान कंपनी का शुद्ध घाटा भी बढ़कर 1,611 करोड़ रुपये हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह करीब 70 करोड़ रुपये था.
हालांकि, कंपनी के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के मुताबिक, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने ऑपरेटिंग प्रॉफिट के स्तर पर ब्रेक-ईवन हासिल कर लिया है. इसका मतलब है कि मुख्य कारोबार के परिचालन से होने वाली कमाई और परिचालन खर्च लगभग बराबर हो गए हैं. लेकिन ब्याज, डेप्रिसिएशन और दूसरे खर्चों के बाद कंपनी अभी भी घाटे में है.
गुजरात और असम में चिप फैक्ट्री पर बड़ा दांव
1. गुजरात के धोलेरा में चिप फैक्ट्री
टाटा ग्रुप ताइवान की कंपनी पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कारपोरेशन (PSMC) के साथ मिलकर गुजरात के धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट बना रहा है. इस प्रोजेक्ट में करीब 91,000 करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया गया है. इसकी प्रस्तावित क्षमता हर महीने 50,000 वेफर तैयार करने की है. यहां बनने वाले चिप का इस्तेमाल ऑटोमोबाइल, कंप्यूटर, डेटा स्टोरेज, वायरलेस कम्युनिकेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा.
2. असम में 27,000 करोड़ रुपये का निवेश
दूसरी बड़ी परियोजना असम के जागीरोड में है. यहां करीब 27,000 करोड़ रुपये की लागत से सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग प्लांट लगाया जा रहा है.इस फैक्ट्री में दूसरी जगहों पर तैयार चिप को पैक किया जाएगा और इस्तेमाल से पहले उनकी जांच होगी. इसकी प्रस्तावित क्षमता प्रतिदिन 4.8 करोड़ चिप तक है.
गुजरात और असम की दोनों परियोजनाओं का घोषित निवेश मिलाकर करीब 1.18 लाख करोड़ रुपये है. यानी टाटा ग्रुप चिप कारोबार में सिर्फ एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि निर्माण से लेकर पैकेजिंग तक की पूरी व्यवस्था तैयार करने में जुटा है.
एपल के आईफोन कारोबार में भी टाटा की पकड़ मजबूत
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की दूसरी बड़ी ताकत एपल का आईफोन मैन्युफैक्चरिंग कारोबार है. कंपनी ने विस्ट्रॉन के भारतीय कारोबार का अधिग्रहण किया है और पेगाट्रॉन टेक्नोलॉजी इंडिया में नियंत्रक हिस्सेदारी हासिल की है. इससे भारत में एपल की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने में टाटा की भूमिका मजबूत हुई है. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने 2025 में एपल के वैश्विक आईफोन उत्पादन का करीब 12% हिस्सा बनाया था. वित्त वर्ष 2025-26 में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की तीन कंपनियों ने मिलकर करीब 99,128 करोड़ रुपये का निर्यात किया. इससे पता चलता है कि भारत से बनने वाले आईफोन की वैश्विक सप्लाई चेन में टाटा की भूमिका बढ़ रही है.