इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को हुए आम चुनावों के नतीजों के बाद वहां का सियासी पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है. चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जिसके बाद इजरायल के नेताओं ने अपनी राजनीतिक नाकामियों का ठीकरा कतर के सिर फोड़ना शुरू कर दिया. कतर पर आरोप लगाया गया है कि उसने चुनावों में भारी फंडिंग करके वोटरों को प्रभावित किया है. इन आरोपों पर कतर ने चुप्पी तोड़ी है. इस देश ने पलटवार करते हुए कुछ ऐसा कह दिया है, जो इजरायल के लिए किसी बेइज्जती से कम हैं.
इजरायली चुनाव बेनतीजा चुनाव और कतर पर आरोपों का पहाड़
27 अक्टूबर को हुए इजरायली चुनाव के नतीजे बेहद उलझे हुए सामने आए. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की दक्षिणपंथी पार्टी ‘लिकुड’ और उनके सहयोगी दल सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का आंकड़ा यानी बहुमत हासिल करने में नाकाम रहे.
दूसरी तरफ, इस चुनाव में इजरायल के ‘अरब-नेतृत्व वाले दलों’ ने शानदार प्रदर्शन किया और 120 सीटों वाली संसद में 19 सीटें जीतकर किंगमेकर की भूमिका में आ गए. बस इसी बात से इजरायल के कटरपंथी और सत्ताधारी नेता बौखला गए.
नेतन्याहू की पार्टी और इजरायली मीडिया ने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि अरब नागरिकों (Voters) को बड़ी संख्या में वोटिंग बूथ तक लाने के लिए कतर की तरफ से गुप्त फंडिंग की गई थी. यानी इजरायल के घरेलू चुनाव को प्रभावित करने का इल्जाम कतर पर मढ़ दिया गया.
कतर का तीखा पलटवार: ‘हमें अपना बली का बकरा न बनाएं’
इजरायल के इन संगीन आरोपों पर कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक के बाद एक कई कड़े बयान जारी किए. उन्होंने इजरायली नेताओं और मीडिया के दावों को सिरे से खारिज करते हुए तंज भरा बयान दिया.
माजिद अल-अंसारी ने कहा ‘हम इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हैं कि कतर ने इजरायल के चुनावों में कोई दखलअंदाजी की है या किसी भी तरह की फंडिंग की है. इजरायल के कुछ नेता अपनी राजनीतिक नाकामियों को छिपाने के लिए कतर को ‘बली का बकरा’ बना रहे हैं’.
उन्होंने तंज कसते हुए आगे कहा कि कभी इजरायल कतर पर नेतन्याहू को खरीदने का आरोप लगाता है, कभी वामपंथियों को पैसे देने का इल्जाम लगाता है और अब अरब वोटरों को प्रभावित करने की बात कह रहा है. अगर इन सारे दावों को सच मान लिया जाए, तो ऐसा लगता है कि कतर ने पूरे इजरायल को ही खरीद रखा है.
खुफिया एजेंसी ‘शिन बेत’ को जांच के आदेश
इजरायल में राजनीतिक सरगर्मी इस कदर बढ़ गई है कि इजरायल की सेंट्रल इलेक्शन कमेटी के चेयरमैन नोअम सोहलबर्ग ने देश की आंतरिक खुफिया एजेंसी ‘शिन बेत’ को इस पूरे मामले की जांच करने के आदेश दे दिए हैं. सोहलबर्ग ने कहा कि विदेशी फंडिंग के जरिए चुनाव को प्रभावित करने का शक है. एक हफ्ते के भीतर इसकी रिपोर्ट सौंपी जाए.
हालांकि, इजरायली पुलिस और चुनाव अधिकारियों ने साफ किया है कि मतदान प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह की धांधली के सबूत नहीं मिले हैं. इसके बावजूद राजनीतिक दल अपनी हार छुपाने के लिए कतर के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं.
कतर की मध्यस्थता और क्षेत्रीय कूटनीति पर असर
कतर लंबे समय से पश्चिम एशिया की कूटनीति में एक अहम भूमिका निभाता रहा है. खासकर इजरायल और फलस्तीन के बीच युद्धविराम कराने और बंधकों की रिहाई के लिए कतर ही सबसे बड़ा मध्यस्थ रहा है.
कतर ने साफ कर दिया है कि इस तरह के घटिया राजनीतिक आरोपों से उसकी कूटनीतिक और मानवीय नीतियों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. कतर ने इजरायल में बनने वाली नई सरकार को सलाह दी कि वो अपने नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने और फलस्तीन मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान दें. कतर ने 1967 की सीमाओं के आधार पर फलस्तीन राज्य की अपनी मांग को एक बार फिर दोहराया.
इजरायल के पॉलिटिकल डेडलॉक सियासी स्टंट या बड़ा बवाल?
इजरायल में राजनीतिक डेडलॉक कोई नई बात नहीं है. इस बार कतर ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वो अपने नाम का इस्तेमाल इजरायल के चुनावी एजेंडे या राजनीतिक हितों के लिए हरगिज नहीं होने देगा. अब देखना ये होगा कि शिन बेत की जांच रिपोर्ट में क्या निकलकर आता है या फिर ये पूरा विवाद महज एक सियासी स्टंट बनकर रह जाता है.