patna miller high school 108 year old water tower will now become a tourist spot know history

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Patna 108 Year Old Water Tower History: पटना की कुछ इमारतें ऐसी हैं, जिनकी दीवारों में शहर के अतीत की कहानियां छिपी हैं. वक्त बदला, शहर का विस्तार हुआ और आधुनिक सुविधाओं ने पुरानी व्यवस्थाओं की जगह ले ली, लेकिन इतिहास के ये गवाह आज भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं. ऐसी ही एक ऐतिहासिक धरोहर है पटना के मिलर हाई स्कूल के पास स्थित करीब 108 साल पुरानी जल मीनार. आज भले ही यह मीनार पानी की आपूर्ति नहीं करती, लेकिन कभी यही शहर के बड़े हिस्से की प्यास बुझाने वाली व्यवस्था का अहम हिस्सा थी. अब बिहार सरकार इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी कर रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियां पटना के इतिहास के इस अध्याय को करीब से जान सकें.

जब आकार ले रही थी नई राजधानी, तब बनी थी जल मीनार
इस जलमीनार के इतिहास के बारे बताते हुए पटना के चर्चित साहित्यकार और इतिहास-विरासत जैसे विषयों पर काम करने वाले रविशंकर उपाध्याय बताते हैं कि इस जल मीनार का इतिहास पटना के राजधानी के रूप में विकसित होने के दौर से जुड़ा है. 1912 में बिहार और उड़ीसा को बंगाल से अलग कर नया प्रांत बनाया गया था. इसके बाद पटना को राजधानी के रूप में विकसित करने के लिए बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू हुए. अंग्रेजों ने सचिवालय, सरकारी भवनों और अधिकारियों के आवास के साथ-साथ शहर की बुनियादी सुविधाओं को व्यवस्थित करने पर भी जोर दिया गया.

इसका निर्माण 1915 से 1918 के बीच हुआ
इसी विकास क्रम में जलापूर्ति व्यवस्था के लिए इस मीनार का निर्माण कराया गया. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसका निर्माण 1915 से 1918 के बीच हुआ और 1918 में यह पूरी तरह तैयार हो गई. करीब 130 फीट ऊंची यह मीनार उस दौर की निर्माण शैली और इंजीनियरिंग की झलक पेश करती है. इसकी विशिष्ट ईंटों की बनावट इसे दूसरी इमारतों से अलग पहचान देती है. उस समय पटना आज की तरह फैला हुआ शहर नहीं था. ऐसे में जलापूर्ति की व्यवस्था को मजबूत करना राजधानी के विकास का एक जरूरी हिस्सा था. यह मीनार उसी जरूरत और उस दौर की शहरी योजना का प्रतीक बनकर सामने आई.

मोटर नहीं, स्टीम इंजन से टंकी तक पहुंचता था पानी
आज घरों और इमारतों की छतों पर लगी टंकियों में मोटर से पानी चढ़ाना आम बात है, लेकिन एक सदी पहले जलापूर्ति की तकनीक अलग थी. रविशंकर उपाध्याय बताते हैं कि पटना की इस जल मीनार में पानी पहुंचाने के लिए स्टीम इंजन का इस्तेमाल किया जाता था. इसकी टंकी की क्षमता करीब एक लाख गैलन थी. स्टीम इंजन की मदद से पानी टंकी तक पहुंचाया जाता और फिर वहां से शहर के बड़े हिस्से में इसकी आपूर्ति की जाती थी. यह व्यवस्था उस दौर में राजधानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण थी.

इस मीनार की कहानी केवल इसकी ऊंचाई या बनावट तक सीमित नहीं है. इसकी कार्यप्रणाली भी इतिहास का एक दिलचस्प हिस्सा है. जब टंकी पूरी तरह भर जाती थी, तो लाल बत्ती के जरिए सिग्नल भेजा जाता था. संकेत मिलने के बाद स्टीम इंजन बंद कर दिया जाता था. इस जलमीनार के लिए एएन कॉलेज के पास स्थित बोरिंग का निर्माण किया गया था. वहीं से पानी इस मीनार में चढ़ाया जाता था.

समय के साथ बदली शहर की जरूरत, पीछे छूट गई ऐतिहासिक मीनार
समय के साथ पटना का विस्तार हुआ. आबादी बढ़ी और जलापूर्ति के साधनों में बदलाव आया. आधुनिक तकनीक और नई व्यवस्थाओं के विकसित होने के बाद इस पुरानी जल मीनार की उपयोगिता धीरे-धीरे कम होती गई. आज यहां पानी की आपूर्ति नहीं होती. इसका पुराना ढांचा ही उस दौर की याद दिलाता है.

4 करोड़ की योजना से इतिहास को सहेजने की पहल
अब इस ऐतिहासिक जल मीनार को नया स्वरूप देने की तैयारी है. बिहार सरकार की करीब चार करोड़ रुपये की योजना के तहत इसे आधुनिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है. मुख्यमंत्री द्वारा परियोजना के शिलान्यास की शुरुआत किए जाने के बाद इस ऐतिहासिक स्थल के सौंदर्यीकरण की दिशा में पहल हुई है. योजना के तहत मीनार और उसके आसपास के क्षेत्र को विकसित करने के साथ कैफेटेरिया बनाने की भी परिकल्पना है. करीब 1,440 वर्ग फीट के क्षेत्र के सौंदर्यीकरण की बात कही गई है. इसका मकसद इस ऐतिहासिक संरचना को लोगों के लिए आकर्षक बनाना और उन्हें पटना के अतीत से परिचित होने का अवसर देना है.

दुनिया में पुरानी इमारतों को बचाने की मिसाल
उन्होंने आगे बताया कि जलमीनार का सौंदर्यीकरण कर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कवायद कई देशों में हुई है. नीदरलैंड की एक पुरानी जल मीनार भी इसका उदाहरण है. उन्होंने बताया कि वहां एक ऐतिहासिक जल मीनार को कैफे, रेस्टोरेंट, पुस्तकालय और फिल्मों के प्रदर्शन जैसी गतिविधियों से जोड़कर नया उपयोग दिया गया है. पुरानी संरचना को बनाए रखते हुए उसे लोगों के आने-जाने और समय बिताने की जगह में बदला गया. पटना का जलमीनार भी अब इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है.



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