4 लड़कों की गजब ट्रिप…सादिक, हसन, अजीम-अफरीद ने ऑटो से किया 7000 KM का सफर
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मंगलुरु से कश्मीर तक: अगर आपसे कहा जाए कि कश्मीर और लद्दाख की ऊंची पहाड़ियों पर ऑटो रिक्शा से सफर करना है, तो शायद आप हैरान हो जाएंगे. लेकिन कर्नाटक के मंगलुरु के चार दोस्तों ने इसे सच कर दिखाया है. सादिक, हसन, अजीम और अफरीद एक साधारण ऑटो रिक्शा से 7,000 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा पर निकले हैं. इस सफर में उन्हें खराब मौसम, गाड़ी में तकनीकी खराबी, पेट्रोल की परेशानी और रात गुजारने के लिए जगह न मिलने जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. चारों दोस्तों ने इस यात्रा के लिए करीब 1.5 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया था. हालांकि, सफर पूरा होने से पहले ही उनका एक लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो चुका था.
सात साल से देख रहे थे इस सफर का सपना
चारों दोस्त कर्नाटक के मंगलुरु के डेरालाकाटे इलाके के रहने वाले हैं. सादिक, हसन, अजीम और अफरीद पहले ऑटो रिक्शा चलाने का काम करते थे. बाद में सभी के काम और जिम्मेदारियां अलग-अलग हो गईं, लेकिन ऑटो से लंबी यात्रा करने का सपना बना रहा. कई साल तक काम, पैसों की कमी और परिवार की जिम्मेदारियों के कारण उनका प्लान टलता रहा. जब भी एक दोस्त सफर के लिए तैयार होता तो दूसरे के सामने कोई न कोई परेशानी आ जाती थी. आखिरकार चारों ने तय किया कि अगर वे सही समय का इंतजार करते रहे, तो शायद उनका सपना कभी पूरा नहीं होगा. इसके बाद उन्होंने कार या किसी दूसरी आरामदायक गाड़ी के बजाय ऑटो रिक्शा से ही सफर करने का फैसला किया. उन्होंने सादिक के 2017 मॉडल ऑटो की तकनीकी जांच कराई और उसे लंबी यात्रा के लिए तैयार किया.
सात साल से देख रहे थे इस सफर का सपना
चारों दोस्त कर्नाटक के मंगलुरु के डेरालाकाटे इलाके के रहने वाले हैं. सादिक, हसन, अजीम और अफरीद पहले ऑटो रिक्शा चलाने का काम करते थे. बाद में सभी के काम और जिम्मेदारियां अलग-अलग हो गईं, लेकिन ऑटो से लंबी यात्रा करने का सपना बना रहा. कई साल तक काम, पैसों की कमी और परिवार की जिम्मेदारियों के कारण उनका प्लान टलता रहा. जब भी एक दोस्त सफर के लिए तैयार होता तो दूसरे के सामने कोई न कोई परेशानी आ जाती थी. आखिरकार चारों ने तय किया कि अगर वे सही समय का इंतजार करते रहे, तो शायद उनका सपना कभी पूरा नहीं होगा. इसके बाद उन्होंने कार या किसी दूसरी आरामदायक गाड़ी के बजाय ऑटो रिक्शा से ही सफर करने का फैसला किया. उन्होंने सादिक के 2017 मॉडल ऑटो की तकनीकी जांच कराई और उसे लंबी यात्रा के लिए तैयार किया.
10 अक्टूबर को शुरू किया सफर
चारों दोस्तों ने 10 अक्टूबर को मंगलुरु से अपनी यात्रा शुरू की. उनका रास्ता महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली से होकर गुजरा. इसके बाद वे कश्मीर पहुंचे और वहां चार दिन बिताए. कश्मीर के बाद दोस्तों ने लद्दाख का रुख किया. यहां ऊंचे पहाड़ों और कड़ाके की ठंड ने उनके सफर को और मुश्किल बना दिया. इस यात्रा का सबसे मुश्किल दौर तब आया, जब करीब 15,000 फीट की ऊंचाई पर ठंड के कारण ऑटो रिक्शा के गियर जाम हो गए. गाड़ी आगे नहीं बढ़ पा रही थी और आसपास मैकेनिक मिलना भी आसान नहीं था. इस तकनीकी खराबी के कारण उनका लगभग पूरा दिन निकल गया. इसके अलावा, ऑटो के लिए ईंधन की व्यवस्था करना भी चुनौती बन गया. दोस्तों को मध्य प्रदेश में ऑटो के लिए एलपीजी मिल गई थी, लेकिन आगे उन्होंने पेट्रोल से सफर जारी रखा. आपात स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्होंने करीब 20 लीटर अतिरिक्त पेट्रोल भी अपने साथ रखा था.
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सात घंटे सफर किया, फिर भी नहीं मिला होटल
चारों दोस्तों को केवल गाड़ी की परेशानी ही नहीं झेलनी पड़ी, बल्कि रात गुजारने के लिए जगह ढूंढना भी मुश्किल हो गया. जम्मू से सफर के दौरान एक दिन करीब सात घंटे तक यात्रा करने के बाद भी उन्हें आसपास कोई कमरा नहीं मिला. बताया गया कि अगला ठहरने का स्थान करीब 200 किलोमीटर दूर था. ऐसे में दोस्तों को एक पेट्रोल पंप पर रात गुजारनी पड़ी. पहाड़ी इलाकों में ठंड बढ़ने के कारण उन्होंने अपने सफर का समय भी बदल दिया. शुरुआत में वे रात 10 से 11 बजे तक गाड़ी चलाते थे, लेकिन बाद में शाम करीब 7 बजे तक सफर खत्म करने लगे, ताकि खराब मौसम और ठंड में देर रात सड़क पर न रहना पड़े.
डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच सकता है खर्च
चारों दोस्तों ने पूरी यात्रा के लिए करीब 1.5 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया था. लेकिन सफर पूरा होने से पहले ही एक लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो चुके थे. इसके अलावा, अलग-अलग राज्यों में पुलिस जांच और दस्तावेजों के सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं से भी उन्हें गुजरना पड़ा. कुछ जगहों पर यातायात से जुड़े जुर्माने भरने की भी जानकारी सामने आई. ऑटो रिक्शा से यात्रा करने के कारण उन्हें कुछ एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं थी. इसलिए उन्हें सर्विस रोड और दूसरे स्वीकृत रास्तों से जाना पड़ा. इससे सफर लंबा जरूर हुआ, लेकिन उन्होंने अपनी पसंद की गाड़ी से यात्रा जारी रखी. चारों दोस्तों ने अपने ऑटो पर तुलुनाडु का झंडा लगाया हुआ है, जो उनके तटीय कर्नाटक से जुड़ाव को दिखाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, कश्मीर में कुछ दिन बिताने के बाद वे लद्दाख पहुंचे थे. उनका आगे मनाली जाने और फिर राजस्थान के रास्ते मंगलुरु लौटने का प्लान था. दोस्तों ने अनुमान लगाया था कि वापसी में कम से कम 20 दिन और लग सकते हैं. हालांकि, मौसम और ऑटो की स्थिति के कारण इसमें बदलाव भी हो सकता था. इस यात्रा में दोस्तों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने सपने को पूरा करने की कोशिश जारी रखी. उनका यह सफर दिखाता है कि कभी-कभी मंजिल से ज्यादा खास उसे पाने के लिए की गई मेहनत और साथ निभाने वाले दोस्त होते हैं. (रिपोर्ट: सौम्या कलासा)