JIO की ब्लॉकबस्टर एंट्री ने पलटी बाजी, खोल दिए शेयर बाजार में मेगा IPO के दरवाजे

JIO की ब्लॉकबस्टर एंट्री ने पलटी बाजी, खोल दिए शेयर बाजार में मेगा IPO के दरवाजे


जियो प्‍लेटफार्म का पहला IPO शेयर बाजार में सुपरहिट रहा. कंपनी ने रिकॉर्ड 302 अरब रुपये जुटाए. इस आईपीओ की ड‍िमांड इतनी ज्यादा थी कि इसे 22 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब किया गया और इसके लिए 78 बिलियन डॉलर की बोलियां आईं. लिस्टिंग के पहले ही दिन जियो के शेयरों में 27% का जबरदस्त उछाल आया, जिससे यह भारती एयरटेल को पछाड़कर मार्केट वैल्यू के हिसाब से भारत की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बन गई. दूसरे द‍िन भी शेयर में जबरदस्‍त तेजी देखी जा रही है. ब्‍लूमबर्ग की र‍िपोर्ट के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड की इस शानदार शुरुआत ने निवेशकों में भारी उत्साह भर दिया है. इसने देश की कुछ सबसे बड़ी प्राइवेट कंपनियों के लिए भी IPO लाने का रास्ता साफ कर दिया है.

इन्वेस्टमेंट बैंकर्स का कहना है कि जियो की लिस्टिंग के लिए आई भारी मांग यह दिखाती है कि भारतीय शेयर बाजार के मुश्किल हालातों के बावजूद, निवेशक शानदार कंपनियों में भारी पैसा लगाने को पूरी तरह तैयार हैं. शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद जियो के शेयर के मजबूत प्रदर्शन से उन कंपनियों का भी भरोसा बढ़ेगा, जो भविष्य में बड़े आईपीओ लाने की योजना बना रही हैं.

निवेशकों का लौटा भरोसा

एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड (SBI Capital Markets Ltd.) में इक्विटी कैपिटल मार्केट्स के ग्रुप हेड अमरेंद्र सिंह ने कहा, जियो की ब्लॉकबस्टर शुरुआत ने बड़े आईपीओ में निवेशकों का भरोसा वापस लाने में मदद की है, खासकर छोटे और रिटेल निवेशकों का. उन्होंने कहा कि सरकारी कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और नए जमाने के व्यवसायों की एक लंबी कतार तैयार है. उन्हें उम्मीद है कि अच्छी कंपनियों की पेशकश और सही कीमत के दम पर भारत का प्राइमरी मार्केट आगे भी पूरी तरह सक्रिय रहेगा.

IPO की कतार में 200 से ज्यादा कंपनियां

अभी लगभग 113 कंपनियों को IPO लाने के लिए रेगुलेटरी मंजूरी मिल चुकी है और अन्य 115 कंपनियों ने अपने ड्राफ्ट पेपर जमा कर दिए हैं. इनमें भारत के कुछ सबसे बड़े प्राइवेट बिजनेस और विदेशी कंपनियों की भारतीय इकाइयों के अरबों डॉलर के संभावित सौदे शामिल हैं.

जो बड़ी कंपनियां भारत में लिस्टिंग की तैयारी कर रही हैं या उस पर विचार कर रही हैं, उनमें फोनपे (PhonePe Ltd.), पेरनोड रिकार्ड इंडिया (Pernod Ricard India Ltd.), हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेज (Hindustan Coca-Cola Beverages Pvt.), मेकमायट्रिप (MakeMyTrip Ltd.) और पारले प्रोडक्ट्स (Parle Products Pvt.) शामिल हैं. इसके अलावा वॉलमार्ट (Walmart) के सपोर्ट वाली फ्लिपकार्ट (Flipkart) भी अपने शेयर बेचने पर विचार कर रही है.

टाटा संस और रिलायंस रिटेल की भी एंट्री संभव

जियो के आईपीओ की तरह ही बाजार में एक और बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है. टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons Pvt.) पर भी शेयर बाजार में लिस्ट होने का भारी दबाव है. वहीं, स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरबपति मुकेश अंबानी भी आने वाले समय में रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (Reliance Retail Ventures Ltd.) का आईपीओ लाने की योजना बना रहे हैं.

बाजार की गहराई और क्षमता का सबूत

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल ने कहा, 100 अरब डॉलर से ज्यादा के मार्केट कैप के साथ भारत की दूसरी सबसे मूल्यवान लिस्टेड कंपनी के रूप में जियो की शुरुआत यह दिखाती है कि देश का पूंजी बाजार अब कितना गहरा और विशाल हो चुका है. यह सफलता और भी बड़ी कंपनियों को शेयर बाजार में आने के लिए प्रोत्साहित करेगी.”

भारत में IPO से बंपर कमाई

भारतीय कंपनियों ने इस साल अब तक आईपीओ के जरिए लगभग 18.26 बिलियन डॉलर जुटा लिए हैं. इसके साथ ही बाजार अब पिछले साल जुटाए गए 22.36 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गया है.

जियो के अलावा, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने भी करीब 2.4 बिलियन डॉलर का आईपीओ पूरा किया है. इसके साथ ही एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड (SBI Funds Management Ltd.) और मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Manipal Health Enterprises Ltd.) जैसी अन्य प्रमुख कंपनियों ने भी बाजार में कदम रखा है.

2027 तक भारत रहेगा हॉट मार्केट

बाजार में आए इन बड़े आईपीओ को जिस तरह से निवेशकों ने हाथों-हाथ लिया है, उससे उन कंपनियों की भी हिम्मत बढ़ेगी जो अभी किनारे खड़ी होकर सिर्फ हालात देख रही हैं. इससे वे अपने लिस्टिंग प्लान में तेजी ला सकती हैं, जिससे 2027 तक भारत नए शेयरों की बिक्री (IPO) के मामले में दुनिया के सबसे व्यस्त बाजारों में बना रह सकता है.

नियमों में बदलाव से मिला फायदा
जियो की इस बड़ी डील के आगे बढ़ने की एक अहम वजह नियमों में हुआ बदलाव भी था. नए नियमों ने बड़ी कंपनियों को अपने शेयरों की कम से कम 2.5% हिस्सेदारी (Equity) बेचने की छूट दी है. इस नियम से भारी वैल्यूएशन वाली कंपनियों को फायदा होता है, क्योंकि वे बाजार में शेयरों की बाढ़ लाए बिना आसानी से पैसा जुटा सकती हैं.

दुबई की रेड लायंस कैपिटल (Red Lions Capital) के चेयरमैन स्टीफन रिचर्ड इवांस (Stephen Richard Evans) ने कहा, जियो वास्तव में इस नए रास्ते का पहला बड़ा टेस्ट था, और इस परीक्षा को उसने शानदार नंबरों से पास किया है. मुझे लगता है कि अब आप कई अन्य बड़े समूहों को इसी रास्ते का इस्तेमाल करने के लिए कतार में खड़े देखेंगे.



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