IndiGo की फ्लाइट का किराया बढ़ना तय? CEO विली वॉल्श बोले- तेल की बढ़ती कीमतों के बीच हमारे पास विकल्प नहीं

IndiGo की फ्लाइट का किराया बढ़ना तय? CEO विली वॉल्श बोले- तेल की बढ़ती कीमतों के बीच हमारे पास विकल्प नहीं


IndiGo Airfare Hike: अगर आप आने वाले दिनों में फ्लाइट से सफर करने की योजना बना रहे हैं, तो टिकट के लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं. देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के सीईओ विली वॉल्श ने संकेत दिया है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनी को हवाई किराया बढ़ाना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि एयरलाइन किराये में बढ़ोतरी को कम से कम रखने की कोशिश करेगी, लेकिन ईंधन पर होने वाले भारी खर्च की भरपाई के लिए किराया बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है. यह बयान ऐसे समय आया है, जब कंपनी ने सितंबर तिमाही में 1,879 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया है.

इंडिगो के सीईओ विली वॉल्श ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि कंपनी किराये में बढ़ोतरी को न्यूनतम रखने की कोशिश करेगी. उनके मुताबिक, इंडिगो ने बाजार में कम किराये की पेशकश करके हवाई यात्रा की मांग बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है. कंपनी आगे भी इस बात का ध्यान रखेगी कि यात्रियों पर ज्यादा बोझ न पड़े.

हालांकि, वॉल्श ने साफ कहा कि ईंधन के बिल में हुई भारी बढ़ोतरी की भरपाई करने के लिए किराया बढ़ाने पर विचार करना जरूरी हो गया है. उनके बयान से संकेत मिलता है कि यदि ईंधन की लागत ऊंची बनी रहती है, तो यात्रियों को टिकट के लिए ज्यादा रकम चुकानी पड़ सकती है. विली वॉल्श ने अगस्त में पदभार संभालने के बाद अपनी पहली मीडिया बातचीत में एयरलाइन के वित्तीय प्रदर्शन, बढ़ते खर्च और किराये पर इसके असर को लेकर बात की.

ईंधन के खर्च ने बिगाड़ा इंडिगो का हिसाब

इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 1,879.1 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया. कंपनी के मुताबिक, ईंधन की असाधारण रूप से ऊंची कीमतों और रुपये में गिरावट ने उसके वित्तीय प्रदर्शन पर दबाव डाला.

नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी की कुल आय बढ़कर 24,311.9 करोड़ रुपये हो गई. पिछले साल की समान अवधि में यह 19,599.5 करोड़ रुपये थी. यानी कंपनी की कुल आय में अच्छी बढ़ोतरी हुई, लेकिन खर्च उससे भी ज्यादा बढ़ गए.

इस तिमाही में इंडिगो का कुल खर्च बढ़कर 26,188.4 करोड़ रुपये पहुंच गया. सबसे ज्यादा दबाव विमान ईंधन के खर्च से आया. कंपनी का फ्यूल बिल सालाना आधार पर 67.2 फीसदी बढ़कर 9,966.8 करोड़ रुपये हो गया. बढ़ते खर्च के कारण रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद कंपनी घाटे में चली गई.

यात्रियों की जेब पर कैसे पड़ेगा असर?

एयरलाइन कंपनियों के खर्च में विमान ईंधन की बड़ी हिस्सेदारी होती है. जब ईंधन महंगा होता है, तो उड़ान चलाने की लागत बढ़ जाती है. ऐसे में कंपनियां खर्च का कुछ हिस्सा टिकट के किराये के जरिए यात्रियों से वसूलने की कोशिश कर सकती हैं.

पश्चिम एशिया में संकट और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने एयरलाइन कंपनियों की मुश्किलें बढ़ाई हैं. इंडिगो समेत विमानन क्षेत्र की कंपनियां बढ़ते परिचालन खर्च का सामना कर रही हैं. हालांकि, किराये में कितनी बढ़ोतरी होगी और इसका असर किन रूट पर कितना पड़ेगा, इस बारे में वॉल्श ने कोई निश्चित आंकड़ा नहीं दिया है. इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि सभी उड़ानों के टिकट एक तय रकम से महंगे हो जाएंगे.

मजबूत वित्तीय स्थिति का भी दावा

बढ़ते खर्च के बावजूद वॉल्श ने कहा कि इंडिगो की मजबूत नकदी स्थिति और कुशल लागत व्यवस्था उसे मौजूदा चुनौती से निपटने में मदद करती है. उनके मुताबिक, कंपनी के पास पर्याप्त नकदी और तरलता है, जिससे उसे कई ऐसे विकल्प मिलते हैं जो उसके कुछ प्रतिस्पर्धियों के पास नहीं हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी अपने खर्चों की समीक्षा करती रहेगी, लेकिन इंडिगो का लागत ढांचा पहले से कुशल है. इसलिए कंपनी की ओर से खर्च में बड़ी कटौती किए जाने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.



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