1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे RBI के नए अकाउंटिंग नियम, जानिए क्या है EIR और क्यों परेशान हैं बैंक?

1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे RBI के नए अकाउंटिंग नियम, जानिए क्या है EIR और क्यों परेशान हैं बैंक?


रिजर्व बैंक ने बैंकों के कामकाज और उनके खातों का हिसाब-किताब रखने के तरीके में एक बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है. मनीकंट्रोल की एक्‍सक्‍लूस‍िव रिपोर्ट के मुताबिक, इफेक्टिव इंटरेस्ट रेट (EIR) यानी प्रभावी ब्याज दर के नए नियम लागू किए जा रहे हैं. हालांकि बैंकिंग इंडस्ट्री पुराने नियमों को ही बनाए रखने की मांग कर रही है, लेकिन 1 अप्रैल 2027 की डेडलाइन को देखते हुए बैंकों ने अपने सॉफ्टवेयर और सिस्टम को नए नियमों के हिसाब से ढालने की तैयारी शुरू कर दी है.

सबसे पहले समझते हैं क‍ि आख‍िर इफेक्टिव इंटरेस्ट रेट है क्‍या और यह कैसे काम करेगा? अभी तक बैंक अपनी इंट्रेस्‍ट इनकम की गणना फिक्स या पहले से तय ब्याज दर पर करते थे. लेकिन EIR के नए नियम के तहत, बैंकों को अपनी ब्याज आय की गणना किसी फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट जैसे बांड या कर्ज से भविष्य में मिलने वाले कुल कैश फ्लो और उसकी वर्तमान वैल्यू के आधार पर करनी होगी.

मान लीजिए, किसी बैंक ने 100 रुपये की फेस वैल्यू वाला कोई बांड 95 रुपये में खरीदा है. नए EIR नियम के तहत, इस 5 रुपये के डिस्काउंट को भी बैंक के कुल रिटर्न का हिस्सा माना जाएगा और बांड की मियाद पूरी होने तक इसे बैंक की ब्याज आय के रूप में ही दिखाया जाएगा. इसी तरह, अगर बैंक ने बांड खरीदने के लिए कोई प्रीमियम चुकाया है, तो उसे भी प्रभावी रिटर्न में शामिल किया जाएगा.

इंडस्ट्री क्यों जता रही है चिंता?

फिक्स्ड इनकम मनी मार्केट एंड डेरिवेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FIMMDA) इस नए अकाउंटिंग नियम को लेकर चर्चा कर रहा है. कई बैंक चाहते हैं कि पुरानी व्यवस्था ही चलती रहे. बैंकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि नए नियमों की वजह से उन्हें अपनी ट्रेजरी और अकाउंटिंग की पूरी प्रक्रिया बदलनी पड़ेगी.

इसमें कूपन पेमेंट, बचा हुआ ब्याज, और सिक्योरिटीज पर मिलने वाले प्रीमियम या डिस्काउंट का हिसाब-किताब रखने का पूरा तरीका बदल जाएगा. इसके लिए बैंकों को अपने सॉफ्टवेयर अपडेट करने होंगे और नई अकाउंटिंग एंट्रीज की बड़े पैमाने पर टेस्टिंग करनी होगी. एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी ने बताया, इस चर्चा में स्टेट बैंक सबसे आगे है. हमारे बैंक में दिवाली के बाद हम अपने सिस्टम की टेस्टिंग (UAT) शुरू कर देंगे, ताकि जनवरी तक हमारा पूरा सिस्टम इन नए नियमों के लिए तैयार हो जाए.

लोन के नियमों में भी होगा बड़ा बदलाव

RBI के ये नए निर्देश 27 अप्रैल 2026 को जारी किए गए थे, जो 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे. जो लोन 31 मार्च 2027 तक बकाया हैं, बैंक शुरुआत में उन पर पुरानी ब्याज दर लागू रख सकते हैं, लेकिन 1 अप्रैल 2030 तक उन सभी पुराने कर्जों को भी EIR सिस्टम पर लाना अनिवार्य होगा. 1 अप्रैल 2027 से बांटे जाने वाले सभी नए लोन सीधे EIR के दायरे में आएंगे.

RBI ने क्यों किया यह बदलाव?

RBI का कहना है कि इन बदलावों का मकसद बैंकों के क्रेडिट-रिस्क मैनेजमेंट यानी लोन डूबने के जोखिम को संभालने की क्षमता को मजबूत करना है. साथ ही, इससे भारत के सभी बैंकों के खातों की तुलना करना आसान हो जाएगा और भारत का बैंकिंग सिस्टम ग्लोबल स्टैंडर्ड के और करीब आ जाएगा.

इस बड़े बदलाव के बाद, बैंकों की ब्याज आय और उनके पास मौजूद रिजर्व फंड पर क्या असर पड़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि किस बैंक के पास कितने लोन और कैसा इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो है. फिलहाल, सभी बैंकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती तय समय के भीतर अपने सिस्टम को अपडेट और टेस्ट करने की है.



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