SC पहुंचा एथनॉल फ्यूल का मामला, कैसे होगी ई100 की सप्लाई, कोर्ट ने पूछे सवाल
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एथनॉल फ्यूल का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि 100 प्रतिशत एथनॉल से चलने वाले वाहनों के लिए ईंधन की सप्लाई कैसे सुनिश्चित होगी. सरकार ने हाल ही में ई100 फ्यूल पॉलिसी को मंजूरी दी है. अब मामले की अगली सुनवाई नवंबर में होगी.
भारत सरकार ने 100 फीसदी एथनॉल फ्यूल को नीतिगत तौर पर मंजूरी दे दी है. फाइल फोटो
पिछले दिनों भारत सरकार ने ई100 फ्यूल पॉलिसी को मंजूरी दे दी. ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से यह सवाल पूछ लिया है कि 100 प्रतिशत एथनॉल से चलने वाले वाहनों के लिए ईंधन की सप्लाई किस तरह सुनिश्चित की जाएगी. केंद्र सरकार ने इसी सप्ताह फ्लेक्स फ्यूल वाहनों में ई100 ईंधन के इस्तेमाल की अनुमति देने के लिए नियमों में संशोधन किया है. हालांकि, मौजूदा वक्त में पेट्रोल में 20 फीसदी तक एथनॉल मिलाने की नीति लागू है. देश के पेट्रोल पंपों पर अब ई20 पेट्रोल ही बिकता है. इसमें 20 फीसदी एथनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल होता है.
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने एथनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 के लिए एथनॉल आवंटन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह सवाल उठाया. पीठ ने ई100 ईंधन को मंजूरी संबंधी मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि हम जानना चाहते हैं कि अगर 100 प्रतिशत एथनॉल से चलने वाले वाहनों की अनुमति दी गई है, तो उनकी आपूर्ति कैसे की जाएगी.
इस पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि इसके लिए बड़े पैमाने पर विनिर्माण व्यवस्था में बदलाव करने होंगे. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन अधिसूचित किया था. इसके तहत ई100 यानी लगभग शुद्ध एथनॉल से चलने वाले वाहनों को भी नियमों में शामिल किया गया है. इससे पहले ई85 जैसे अधिक एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन से चलने वाले वाहनों का प्रावधान था.
मौजूदा वक्त में ई20 की बिक्री
हालांकि, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 27 अक्टूबर को कहा था कि सरकार की पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण मौजूदा 20 प्रतिशत से तत्काल आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है. मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने किसानों को सशक्त बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया. जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि इस मुद्दे को व्यापक जनहित और पर्यावरण के नजरिये से देखने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी, खासकर गांवों में रहने वाले किसानों के हितों पर भी ध्यान देना होगा.
जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि देश की बड़ी आबादी के नजरिये से तीसरा पहलू, जो मुझे सबसे महत्वपूर्ण लगता है, वह किसान हैं. हमें इस पहलू पर ध्यान देना होगा कि किसानों को किस तरह सशक्त बनाया जाए. इस पर कोई भी बात नहीं कर रहा है. इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि वह मामले में अपनी दलीलों के दौरान किसानों से जुड़े मुद्दे पर भी बात करेंगे. शीर्ष अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई अगले महीने के लिए टाल दी गई. सुप्रीम कोर्ट ने 2025-26 के एथनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए आवंटन बढ़ाने से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा है.