रेल सेफ्टी में स्पेन से काफी पीछे है भारत, हादसा रोकने का क्या पैमाना? ट्रेन ऐक्सिडेंट का कवच सिस्टम समझिए

रेल सेफ्टी में स्पेन से काफी पीछे है भारत, हादसा रोकने का क्या पैमाना? ट्रेन ऐक्सिडेंट का कवच सिस्टम समझिए


ट्रेन हादसे रोकने का असली पैमाना क्या है?
रेलवे की सुरक्षा जांचने के लिए सिर्फ कुल हादसों की संख्या देखना पर्याप्त नहीं है. यह भी जानना जरूरी है कि कितनी ट्रेनें चलीं, उन्होंने कितनी दूरी तय की और कितने गंभीर हादसे हुए. भारतीय रेलवे में इसके लिए Consequential Train Accidents और Consequential Accident Index जैसे संकेतकों का इस्तेमाल किया जाता है.

इसलिए सुरक्षा का व्यापक आंकलन करते समय हादसों की आवृत्ति और उनकी गंभीरता, दोनों देखनी चाहिए. चौथा पैमाना दुर्घटना होने से पहले की सुरक्षा से जुड़ा है. केवल हादसे हो जाने के बाद उनकी गिनती करना काफी नहीं है. रेलवे को ऐसे इंडिकेटर भी देखने चाहिए, जो संभावित हादसों का खतरा पहले ही बता दें.

ट्रैक की जांच और मरम्मत समय पर हुई या नहीं. सिग्नल और पॉइंट्स सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं. ट्रेन के ब्रेक और दूसरे अहम उपकरणों की स्थिति कैसी है. सिग्नल पार करने या निर्धारित गति से अधिक चलने की घटनाएं कितनी हैं. सुरक्षा जांच में मिली खामियों को समय पर ठीक किया गया या नहीं. इन संकेतकों से पता चलता है कि रेलवे केवल हादसों का रिकॉर्ड रख रहा है या दुर्घटना रोकने के लिए ऐक्टिव कदम भी उठा रहा है.

भारत में ट्रेन हादसों की स्थिति क्या है?
भारतीय रेलवे के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, गंभीर यानी Consequential Train Accidents की संख्या में पिछले दशक के दौरान कमी दर्ज की गई है. रेल मंत्रालय और प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के मुताबिक भारत में गंभीर रेल हादसों पर गौर करें तो 2014-15 में 135 गंभीर हादसे हुए. वहीं 2025-26 में 16 ऐसे हादसे हुए हैं. ये संख्या लगातार घटी है.

इन आंकड़ों से पता चलता है कि गंभीर रेल हादसों की कुल संख्या घटी है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हादसों का जोखिम पूरी तरह खत्म हो गया है. यह भी ख्याल रखना जरूरी है कि हादसों की कुल संख्या और प्रति दस लाख ट्रेन किलोमीटर हादसों की दर अलग-अलग चीजें हैं. सुरक्षा की सही तस्वीर के लिए दोनों को देखना चाहिए.

रेल हादसे आखिर होते क्यों हैं?
रेल दुर्घटना के पीछे अक्सर एक से अधिक कारण हो सकते हैं. भारतीय रेलवे के ऑफिशल डॉक्युमेंट्स में ट्रैक में खराबी, इंजन या कोच में तकनीकी समस्या, उपकरणों की खराबी और मानवीय गलती जैसी वजहों का जिक्र किया गया है.

इनमें से हर समस्या का समाधान अलग है. कवच जैसी तकनीक सिग्नलिंग और गति से जुड़े कुछ जोखिम कम कर सकती है, लेकिन वह ट्रैक की दरार या हर तरह की यांत्रिक खराबी का विकल्प नहीं है.

कवच क्या है और यह ट्रेन हादसे कैसे रोकता है?
कवच (Kavach) भारतीय रेलवे का स्वदेशी Automatic Train Protection यानी ATP सिस्टम है. इसका मकसद ट्रेन संचालन के दौरान सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत उपलब्ध कराना है. यह सिस्टम लोको पायलट को सिग्नल और गति से जुड़ी जानकारी देता है. अगर ट्रेन निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन करती है या ऐसी स्थिति पैदा होती है जिसमें ब्रेक लगाना जरूरी है, तो सिस्टम अपने निर्धारित सुरक्षा नियमों के अनुसार ऑटोमेटिक ब्रेक लगा सकता है. कवच को समझने के लिए इसकी तीन प्रमुख भूमिकाएं जानना जरूरी है.

रेल मंत्रालय के अनुसार, कवच को जुलाई 2020 में राष्ट्रीय ATP सिस्टम के रूप में अपनाया गया था. इसके बाद इसके अलग-अलग फेज को विकसित और लागू किया गया.

क्या कवच हर हादसा रोक सकता है?
नहीं. कवच को पूरी रेलवे सुरक्षा व्यवस्था का विकल्प नहीं समझना चाहिए. यह सिग्नल और गति से जुड़े कुछ खतरों को कम करने में मदद करता है. लेकिन अगर रेल पटरी में दरार है, पुल की संरचना कमजोर है, कोच में तकनीकी खराबी है या ट्रैक पर कोई बाधा मौजूद है, तो ऐसे मामलों में अलग सुरक्षा उपायों की जरूरत होगी. इसके अलावा, कवच का लाभ तभी मिल सकता है जब संबंधित रेल सेक्शन, ट्रेन और जरूरी ट्रैकसाइड उपकरणों में सिस्टम लगाया गया हो और वह सही तरीके से काम कर रहा हो.

ट्रेन हादसे रोकने के लिए रेलवे और क्या करता है?
रेल सुरक्षा केवल एक तकनीक पर निर्भर नहीं करती. इसमें ट्रैक का रखरखाव, सिग्नलिंग, उपकरणों की जांच, कर्मचारियों की ट्रेनिंग और दुर्घटना की स्थिति में तुरंत कार्रवाई. इन सभी की भूमिका होती है. इसमें ट्रैक की मरम्मत के साथ ही इंजन-कोच के रखरखाव, लेवल क्रॉसिंग सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिग्नल, कवच एटीपी सिस्टम का सुरक्षा उपाय जरूरी है.



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