प्रयागराज: दिवाली पर घर सजाने से लेकर पारंपरिक कपड़े, हस्तनिर्मित सजावटी सामान और फर्नीचर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) में आयोजित दीपावली शिल्प मेले में जा सकते हैं. यहां देश के 16 राज्यों से आए शिल्पकारों ने अपनी दुकानें लगाई हैं. मेले में घर की सजावट के सामान से लेकर पारंपरिक जूतियां, साड़ियां, पंजाबी सूट और अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों तक की कई चीजें उपलब्ध हैं. 22 अक्टूबर से शुरू हुआ यह मेला चार नवंबर तक चलेगा. यहां आने वाले लोग खरीदारी के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों की कला, शिल्प और खानपान से भी परिचित हो सकते हैं.
हाथों से तैयार मिलती हैं यूनीक चीजें
मुरादाबाद से आए अनीश सैनी अपने पुश्तैनी काम बॉल आर्ट से जुड़े सजावटी सामान लेकर पहुंचे हैं. उन्होंने बताया कि उनके यहां मिलने वाले उत्पाद कारीगर हाथों से तैयार करते हैं. एक-एक सामान बनाने में कई दिन लग जाते हैं. दिवाली के लिए वे अखंड दीप भी लेकर आए हैं, जिसकी कीमत 1200 रुपये है. उनके मुताबिक, इसमें 200 ग्राम तेल डालने पर दीप करीब 24 घंटे तक लगातार जल सकता है. राजस्थान के जोधपुर से आए एक दुकानदार के पास बच्चों, महिलाओं और पुरुषों के लिए पारंपरिक राजस्थानी जूतियों की कई डिजाइन उपलब्ध हैं. इनकी कीमत 200 रुपये से शुरू होकर 1250 रुपये तक है. दुकानदार ने बताया कि इस बार हाथ से कढ़ाई की गई जूतियां और पायल वाले डिजाइन भी उपलब्ध हैं. इनमें से एक खास डिजाइन की कीमत 550 रुपये है.
हाथों से तैयार पंजाबी शूट व साड़ियां खूब आकर्षक
पंजाब के पटियाला से आए दुकानदार पंजाबी सूट बेच रहे हैं. यहां सूट की कीमत 1300 रुपये रखी गई है. वहीं, छत्तीसगढ़ से आए मोहम्मद तौसीफ अख्तर के स्टॉल पर हाथ से तैयार की गई साड़ियां और अन्य कपड़े उपलब्ध हैं. उन्होंने बताया कि डिजाइन, रंग और प्रिंट का चयन कारीगर खुद करते हैं. उनके स्टॉल पर कोसा-तसर की एक साड़ी की कीमत 8900 रुपये है, जो छूट के बाद 6400 रुपये में उपलब्ध है. राजस्थान के जोधपुर से आए अहमद रजा अपने स्टॉल पर लकड़ी का फर्नीचर लेकर पहुंचे हैं. उन्होंने बताया कि उनके यहां टेबल, सोफा, डाइनिंग टेबल, सेंटर टेबल, अलमारी और झूले समेत कई तरह के फर्नीचर उपलब्ध हैं. उनके अनुसार, फर्नीचर की कीमत 4000 रुपये से शुरू होती है. उन्होंने बताया कि इनके निर्माण में ठोस लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है.
मेले में आए हैं 575 कलाकार, स्वादिष्ट खाने की व्यवस्था
मेले में खरीदारी के साथ खाने-पीने के लिए भी कई विकल्प हैं. जयपुर से आए महेंद्र सिंह राठौड़ के स्टॉल पर शुद्ध देसी घी से तैयार बीकानेरी जलेबी, मूंग दाल की पकौड़ी, प्याज की कचौरी और जोधपुरी मिर्ची बड़ा जैसे राजस्थानी व्यंजन उपलब्ध हैं. एनसीजेडसीसी के निदेशक सुदेश शर्मा ने बताया कि दीपावली शिल्प मेले का आयोजन 22 अक्टूबर से चार नवंबर तक किया जा रहा है. इसमें 16 राज्यों के करीब 575 कलाकार और शिल्पकार अपनी प्रतिभा व उत्पादों को प्रदर्शित कर रहे हैं. उन्होंने लोगों से मेले में आकर खरीदारी करने और देश के शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने की अपील की.
एनसीजेडसीसी के मीडिया प्रभारी अमरीश द्विवेदी ने बताया कि केंद्र की ओर से कई वर्षों से दीपावली शिल्प मेले का आयोजन किया जा रहा है. इसका उद्देश्य अलग-अलग राज्यों के शिल्पकारों को मंच उपलब्ध कराना और उनकी कला को लोगों तक पहुंचाना है.