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Mobile PLI : सरकार ने देश में मोबाइल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई स्कीम शुरू की थी. सोशल मीडिया पर इस स्कीम की आलोचना करते हुए टैक्सपेयर्स के पैसे बर्बाद करने का आरोप लगाया गया था. इस पर आंकड़ों सहित सरकार ने जवाब दिया है और बताया है कि पीएलआई पर महज 19 हजार करोड़ खर्च करके सरकारी खजाने में 3.25 लाख करोड़ रुपये का टैक्स आया है.
मोबाइल पीएलआई स्कीम के तहत सरकार ने 19 हजार करोड़ का प्रोत्साहन दिया था.
नई दिल्ली. सरकार ने करीब 5 साल पहले जब मोबाइल उद्योग के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी पीएलआई स्कीम शुरू की थी, तो इसका सफलता का अंदाजा शायद ही किसी और को था. लेकिन, पीएम मोदी की अगुवाई वाली सरकार के इस विजन ने महज 19 हजार करोड़ के बजट से सवा तीन लाख करोड़ रुपये का टैक्स जुटा लिया है. केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने मोबाइल फोन उद्योग को 19,000 करोड़ रुपये का पीएलआई देने के बदले इस क्षेत्र से कुल 3.25 लाख करोड़ रुपये टैक्स के रूप में जुटाए हैं.
केंद्रीय मंत्री सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, सरकार ने इस योजना के तहत 19,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया और इसके बदले लाभार्थियों से 25,000 करोड़ रुपये का डायरेक्ट टैक्स और 3 लाख करोड़ रुपये जीएसटी के रूप में प्राप्त किए. वैष्णव ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में 25 लाख लोगों को रोजगार मिलता है. केवल मोबाइल विनिर्माण क्षेत्र में 12 लाख लोग काम करते हैं. अब और ज्यादा कोशिश करें तो यह आंकड़ा कहीं अधिक हो सकता है.
सोशल मीडिया पर हो रही थी पीएलआई की आलोचना
केंद्रीय मंत्री ने यह जवाब उस वीडियो के परिपेक्ष्य में दिया है कि जिसमें सरकारी धन से सब्सिडी देकर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने की भारत की कोशिश को खामी बताया था. वीडियो में कहा गया था कि सब्सिडी की मदद से करदाताओं के पैसे से बनाए गए मोबाइल फोन के निर्यात से भारत को जितना लाभ होता है, उससे अधिक खर्च उसे कलपुर्जों के आयात पर करना पड़ता है. इस दावे के जवाब में ही केंद्रीय मंत्री ने आंकड़े पेश कर योजना की सफलता का दावा किया.
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकार द्वारा मार्च में साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वित् वर्ष 2024-25 में दो लाख करोड़ रुपये मूल्य के मोबाइल फोन का निर्यात किया. देश में मोबाइल फोन का आयात 2024-25 में घरेलू मांग का लगभग 0.02 फीसदी रह गया, जबकि 10 साल पहले यह 75 फीसदी था. इलेक्ट्रॉनिक सामान का उत्पादन 2014-15 के लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये से छह गुना बढ़कर 2024-25 में करीब 11.3 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसी अवधि में मोबाइल फोन का उत्पादन लगभग 0.18 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 5.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है. इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात भी 10 साल पहले के 0.38 लाख करोड़ रुपये से आठ गुना बढ़कर 2024-25 में करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये हो गया.
इस बार 62,500 करोड़ की योजना
सरकार ने अब मोबाइल फोन के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 62,500 करोड़ रुपये के कुल प्रोत्साहन वाली मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) शुरू की है. इस योजना का उद्देश्य ऐसे भारतीय स्मार्टफोन विकसित करना है, जिनका डिजाइन और विनिर्माण देश में ही किया जाएगा. वैष्णव ने भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अक्टूबर 2028 की समयसीमा तय की है. इस योजना के तहत ऐपल, सैमसंग और चीन की कंपनियों के मोबाइल को टक्कर देने वाले भारतीय मोबाइल विकसित किए जाने की तैयारी है.