MLC Election: सबसे ज्यादा एमएलसी चुनाव में वोट पाकर भी हार सकता है उम्मीदवार? भैया, यह कैसा नियम है, 5 सवालों में समझिए पूरा गणित

MLC Election: सबसे ज्यादा एमएलसी चुनाव में वोट पाकर भी हार सकता है उम्मीदवार? भैया, यह कैसा नियम है, 5 सवालों में समझिए पूरा गणित


MLC election vote counting: हम सबने देखा और सुना होगा कि चुनाव में जिसे सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं. उसे ही जीता हुआ मान लिया जाता है. लेकिन विधान परिषद यानी MLC चुनाव की कुछ सीटों पर वोटों की गिनती का तरीका थोड़ा अलग होता है. यहां पहली गिनती में सबसे आगे रहने वाला उम्मीदवार भी चुनाव हार सकता है. अब लोगों के मन में सवाल उठ सकते हैं कि ये दूसरी पसंद के वोट क्या होते हैं? जीत के लिए कितने वोट चाहिए? और सबसे आगे चल रहा उम्मीदवार पीछे कैसे हो जाता है? आइए, 5 सवालों में इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं.

एमएलसी चुनाव में वरीयता के आधार पर होते हैं वोट

MLC (विधान परिषद) चुनाव में सबसे ज्यादा पहली पसंद के वोट पाकर भी कोई उम्मीदवार हार सकता है, क्योंकि यह चुनाव आम चुनावों की तरह ‘जिसे सबसे ज्यादा वोट मिले वो जीता’ (First Past the Post) नियम पर नहीं होता. यह चुनाव सिंगल ट्रांसफ़रेबल वोट (STV) यानी वरीयता पद्धति पर काम करता है, जहां जीत के लिए एक तय ‘जादुई कोटा’ हासिल करना अनिवार्य होता है.
इस पूरे गणित को इन 5 आसान सवालों और जवाबों में समझिए:

1. वरीयता वोट (Preference Voting) क्या होता है?

आम चुनावों में आप ईवीएम पर किसी एक प्रत्याशी के आगे का बटन दबाते हैं, लेकिन एमएलसी चुनाव बैलेट पेपर से होता है. यहां मतदाता को केवल एक व्यक्ति को चुनना नहीं होता, बल्कि मैदान में मौजूद उम्मीदवारों के नाम के आगे अपनी पसंद का नंबर लिखना होता है. जैसे:
• अपनी सबसे पहली पसंद के आगे 1
• दूसरी पसंद के आगे 2
• तीसरी पसंद के आगे 3

2. जीत के लिए जरूरी ‘जादुई कोटा’ कैसे तय होता है?

वोटों की गिनती शुरू होने से पहले कुल पड़े वैध मतों के आधार पर एक न्यूनतम आवश्यक वोट (कोटा) निकाला जाता है. आमतौर पर एक सीट के लिए इसका फॉर्मूला इस प्रकार होता है: उदाहरण के लिए, अगर कुल वैध मत 1,00,000 हैं और सीट 1 है. तो जीत के लिए 50,000 + 1 = 50,001 वोट पाना जरूरी होगा. जो भी उम्मीदवार सबसे पहले इस आंकड़े को छू लेता है, वह विजयी घोषित होता है.

3. पहली पसंद के सबसे ज्यादा वोट पाकर भी उम्मीदवार क्यों हार सकता है?

मान लीजिए कुल 3 उम्मीदवार (A, B और C) हैं और जीत का कोटा 50,001 वोट है.
• उम्मीदवार A: 45,000 वोट (पहली पसंद)
• उम्मीदवार B: 35,000 वोट (पहली पसंद)
• उम्मीदवार C: 20,000 वोट (पहली पसंद)
यहां उम्मीदवार A के पास सबसे ज्यादा 45,000 वोट हैं, लेकिन वह जादुई कोटे (50,001) से दूर है. ऐसी स्थिति में पहले राउंड में कोई नहीं जीतता. अब असली खेल शुरू होगा, जहां दूसरी वरीयता के वोट ट्रांसफर किए जाएंगे और मुमकिन है कि ‘B’ या ‘C’ के वोट मिलकर पासा पलट दें.


4. वोट ट्रांसफर होने का यह गणित कैसे काम करता है?

जब पहली वरीयता में कोई भी कोटे तक नहीं पहुंचता तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार (ऊपर के उदाहरण में उम्मीदवार C) को रेस से बाहर कर दिया जाता है. इसके बाद ‘C’ को मिले 20,000 मतपत्रों को दोबारा देखा जाता है कि उन वोटर्स ने अपनी दूसरी पसंद (नंबर 2) किसे चुना है. यदि उन 20,000 वोटर्स में से 16,000 लोगों ने दूसरी पसंद B को और केवल 4,000 लोगों ने A को चुना हो. तो उम्मीदवार B के कुल वोट: 35,000 + 16,000 = 51,000 (कोटा पार, विजेता मान लिया जाता है) और वही उम्मीदवार A के कुल वोट: 45,000 + 4,000 = 49,000 (हार मान लिया जाता है). इस तरह पहली पसंद में आगे रहने वाला ‘A’ अंतिम गिनती में ‘B’ से हार जाता है.

5. एमएलसी चुनाव में वोट अवैध (Invalid) कैसे हो जाते हैं?

  1. चूंकि शिक्षित वर्ग (स्नातक और शिक्षक) ही इन सीटों पर वोट डालते हैं. फिर भी बड़ी संख्या में वोट रिजेक्ट हो जाते हैं. इसके कई कारण होते हैं. जैसे-
    • पोलिंग बूथ पर मिलने वाले विशेष पेन की जगह अपने पेन या पेंसिल का इस्तेमाल करना.
    • अंकों (1, 2, 3) को साफ-साफ न लिखना.
    • एक से अधिक उम्मीदवारों के नाम के आगे ‘1’ लिख देना.
    • अंकों की जगह शब्दों (जैसे- एक, दो) या रोमन अंकों (I, II) का उपयोग करना.



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