Kundan Krishnan Sudhakar Singh Controversy: जेल में AK-47 लेकर घुसे, आनंद मोहन को भेजा जेल, अब RJD सांसद से भिड़ने वाले IPS कुंदन कृष्णन कौन हैं?

Kundan Krishnan Sudhakar Singh Controversy: जेल में AK-47 लेकर घुसे, आनंद मोहन को भेजा जेल, अब RJD सांसद से भिड़ने वाले IPS कुंदन कृष्णन कौन हैं?


IPS Kundan Krishnan Profile: बिहार पुलिस के एक ऐसे IPS अधिकारी जो कभी जेल में कैदियों के विद्रोह के बीच AK-47 लेकर पहुंचे थे. एक बार बाहुबली नेता आनंद मोहन को पटना के होटल से जेल पहुंचाने को लेकर चर्चा में आए. फिर चर्चित गोपाल खेमका हत्याकांड की जांच में उनकी भूमिका सामने आई. अब यही अधिकारी RJD सांसद सुधाकर सिंह के साथ कानूनी विवाद को लेकर सुर्खियों में हैं.

हम बात कर रहे हैं बिहार कैडर के 1994 बैच के IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन की जो इस समय बिहार पुलिस में DG ऑपरेशन्स की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. उनके नाम की चर्चा राज्य के अगले स्थायी DGP के संभावित दावेदार के रूप में भी होती रही है लेकिन इसी बीच पांच करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 27 अक्टूबर 2026 को मामले की जांच के आदेश दिए हैं. आखिर कौन हैं कुंदन कृष्णन, कब IPS बने, किन जिम्मेदारियों पर रहे और उनके करियर से कौन-कौन से बड़े मामले जुड़े हैं?

1994 बैच के IPS हैं कुंदन कृष्णन, 2029 में होंगे रिटायर

कुंदन कृष्णन बिहार कैडर के 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS अधिकारी हैं. इस हिसाब से उन्हें पुलिस सेवा में करीब 32 साल हो चुके हैं. वह बिहार पुलिस में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. वर्तमान में वह DG ऑपरेशन्स के पद पर कार्यरत हैं. जनवरी 2026 में उन्हें STF और स्पेशल ब्रांच की भी जिम्मेदारी दी गई थी. उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख 31 मार्च 2029 है.

कुंदन कृष्णन का नाम बिहार पुलिस के उन वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल है जिनकी चर्चा कई बड़े आपराधिक मामलों और पुलिस ऑपरेशनों के दौरान होती रही है. छपरा जेल में कैदियों के विद्रोह से लेकर पटना में बाहुबली नेता आनंद मोहन से जुड़े मामले तक, उनके करियर में कई ऐसी घटनाएं सामने आईं जिनके कारण वह चर्चा में रहे.

2002 में छपरा के SP थे, जेल में AK-47 लेकर पहुंचे

कुंदन कृष्णन के पुलिस करियर से जुड़ा सबसे चर्चित किस्सा साल 2002 का है. उस समय वह छपरा के पुलिस अधीक्षक यानी SP थे. छपरा जेल में कैदियों के विद्रोह और जेल पर कब्जे जैसी स्थिति पैदा हो गई थी. हालात को नियंत्रित करना पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया था. इस दौरान कुंदन कृष्णन खुद ऑपरेशन में शामिल हुए. रिपोर्ट्स के मुताबिक वह AK-47 लेकर जेल के अंदर पहुंचे थे. इस घटना ने उन्हें चर्चा में ला दिया था. जेल के भीतर विद्रोह जैसी स्थिति में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के सीधे ऑपरेशन में उतरने की वजह से यह मामला उनके करियर की चर्चित घटनाओं में गिना जाता है.

2006 में आनंद मोहन से हुआ था टकराव

कुंदन कृष्णन के करियर का दूसरा चर्चित मामला साल 2006 का है. उस समय वह पटना में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. मामला उस समय का है जब आनंद मोहन की एक मुकदमे के सिलसिले में देहरादून में पेशी थी. उन्हें सहरसा जेल से देहरादून ले जाया गया था. पेशी के बाद लौटते समय उन्हें वापस सहरसा जेल जाना था लेकिन वह पटना में रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक होटल में रुक गए.जब कुंदन कृष्णन को इसकी जानकारी मिली तो वह पुलिस टीम के साथ होटल पहुंचे. वहां आनंद मोहन के समर्थकों और पुलिस टीम के बीच टकराव की स्थिति बन गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक कुंदन कृष्णन ने कार्रवाई करते हुए आनंद मोहन को वापस जेल भिजवाया. यह घटना उनके पुलिस करियर के चर्चित मामलों में शामिल हो गई.

गोपाल खेमका हत्याकांड की जांच में भी रही भूमिका

कुंदन कृष्णन का नाम पटना के चर्चित कारोबारी गोपाल खेमका हत्याकांड की जांच से भी जुड़ा रहा है. इस मामले में STF और पटना पुलिस ने कार्रवाई की थी. कुंदन कृष्णन ने जांच और पुलिस कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.उनके नेतृत्व में STF और पटना पुलिस ने मामले में तेजी से कदम उठाए. यह मामला भी उन घटनाओं में शामिल है जिनके कारण कुंदन कृष्णन की पुलिस कार्यशैली चर्चा में रही. कुंदन कृष्णन को पुलिस सेवा के दौरान सम्मान भी मिले हैं. उन्हें साल 2010 में पुलिस पदक मिला था. इसके बाद 2022 में उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया.

अब RJD सांसद सुधाकर सिंह से क्यों हुआ विवाद?

कुंदन कृष्णन केवल पुलिस ऑपरेशनों के कारण ही चर्चा में नहीं रहे. साल 2025 में किसानों के खाली समय और अपराध के ग्राफ को लेकर दिए गए एक बयान के कारण भी विवाद हुआ था. इस बयान पर सवाल उठे थे और वह चर्चा में आ गए थे.  अब कुंदन कृष्णन इस समय बक्सर से RJD सांसद सुधाकर सिंह के साथ चल रहे विवाद को लेकर चर्चा में हैं. इसकी शुरुआत भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हुई एक घटना से जुड़ी है.17 जून 2026 को बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की पुलिस कार्रवाई के दौरान मौत हो गई थी.

इस घटना को लेकर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे. मामले को कथित एनकाउंटर से जोड़कर भी देखा गया.सांसद सुधाकर सिंह ने घटना की जांच और जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों की भूमिका तय करने की मांग की.उनका कहना था कि जांच केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. जिन वरिष्ठ अधिकारियों ने फैसले लिए या जिनकी जिम्मेदारी बनती थी उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए.सांसद के मुताबिक घटना के समय कुंदन कृष्णन बिहार STF के DG थे. इसी आधार पर उन्होंने पुलिस कार्रवाई के दौरान आदेश देने की प्रक्रिया, अधिकारियों के बीच बातचीत और पुलिस मुख्यालय की भूमिका की जांच की मांग उठाई.

24 जून की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बढ़ा मामला

कुंदन कृष्णन की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस के मुताबिक सुधाकर सिंह ने 24 जून 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. नोटिस में आरोप लगाया गया कि सांसद ने बिना तथ्यों की पर्याप्त जांच किए कुंदन कृष्णन पर बेबुनियाद आरोप लगाए.नोटिस में कहा गया कि सांसद ने भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर में कुंदन कृष्णन की मुख्य भूमिका होने की बात कही और धमकियों से जुड़ी मनगढ़ंत बातें भी प्रसारित कीं. ये दावे कुंदन कृष्णन की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस का हिस्सा हैं. दूसरी ओर सांसद सुधाकर सिंह अपने सवालों और जांच की मांग पर कायम हैं. ऐसे में नोटिस में लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र रूप से साबित तथ्य नहीं माना जा सकता.

6 अक्टूबर को भेजा पांच करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस

कुंदन कृष्णन ने 6 अक्टूबर 2026 को अपने निजी वकील के माध्यम से RJD सांसद सुधाकर सिंह को कानूनी नोटिस भेजा. इस नोटिस में सांसद से 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगने को कहा गया.नोटिस में चेतावनी दी गई कि माफी नहीं मांगने पर उनके खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है. इसके साथ ही पांच करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा करने की बात भी कही गई.नोटिस में कुंदन कृष्णन की ओर से यह तर्क दिया गया कि सांसद के बयानों से उनकी ईमानदारी, प्रतिष्ठा और मानसिक शांति को नुकसान पहुंचा है.

नोटिस में न्यायिक जांच आयोग का भी जिक्र

कुंदन कृष्णन की ओर से भेजे गए नोटिस में भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद हुई कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया.नोटिस के मुताबिक घटना के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों पर तत्काल कार्रवाई की गई थी. इसके अलावा बिहार सरकार ने 20 जून 2026 को सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित किया था.नोटिस में सवाल उठाया गया कि जब मामले की जांच के लिए आयोग बनाया जा चुका था तब सांसद ने अपने सबूत आयोग के सामने रखने के बजाय मीडिया में बयान क्यों दिए. कुंदन कृष्णन की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि सांसद ने राजनीतिक लाभ और लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से बयान दिए. इन बयानों से यह संदेश गया कि पुलिस अधिकारी गलत गतिविधियों में शामिल लोगों को बचाते हैं या अपने पद का दुरुपयोग करते हैं.

सांसद ने माफी मांगने से किया इनकार

कुंदन कृष्णन का कानूनी नोटिस मिलने के बाद सुधाकर सिंह ने माफी मांगने से इनकार कर दिया. वह अपने आरोपों और मामले की जांच कराने की मांग पर कायम रहे.सुधाकर सिंह का कहना है कि जनप्रतिनिधि होने के नाते जनता से जुड़े सवाल उठाना उनका दायित्व है. उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह का कानूनी नोटिस उनके संसदीय अधिकारों और जिम्मेदारियों के निर्वहन में बाधा डाल सकता है.इसके बाद उन्होंने मामले को मुख्यमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष के सामने उठाया. सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर कुंदन कृष्णन के कानूनी नोटिस पर सवाल उठाए.  सुधाकर सिंह ने इस विवाद को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने भी उठाया. उन्होंने पत्र लिखकर कहा कि जनप्रतिनिधि के तौर पर उठाए गए सवालों के जवाब में भेजा गया कानूनी नोटिस संसदीय विशेषाधिकारों से जुड़ा मामला हो सकता है. सांसद ने मांग की कि यह जांच होनी चाहिए कि IPS अधिकारी ने आवश्यक सरकारी अनुमति के बिना नोटिस भेजा या नहीं. उन्होंने मामले को संसद की विशेषाधिकार समिति के पास भेजने का आग्रह भी किया.

27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश

सांसद और वरिष्ठ IPS अधिकारी के बीच विवाद बढ़ने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 27 अक्टूबर 2026 को मामले का संज्ञान लिया.उन्होंने कुंदन कृष्णन की ओर से भेजे गए मानहानि नोटिस से जुड़े मामले की जांच के आदेश दिए. जांच की जिम्मेदारी गृह विभाग के प्रधान सचिव को सौंपी गई है.

कुंदन कृष्णन ने कहा- नोटिस के लिए अनुमति जरूरी नहीं

इस पूरे विवाद पर कुंदन कृष्णन ने भी अपना पक्ष रखा है. दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कुंदन कृष्णन बातचीत में कहा कि कानूनी नोटिस भेजने के लिए गृह विभाग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है. उनके मुताबिक उन्होंने संबंधित नियमावली देखी थी और अपने वकील से भी सलाह ली थी. कुंदन कृष्णन ने कहा कि नोटिस भेजने के बाद वह सांसद के खिलाफ सिविल सूट यानी दीवानी मुकदमा करेंगे. इसके लिए वह गृह विभाग से अनुमति लेंगे.

संपत्ति के ब्योरे में भी चर्चा में आए कुंदन कृष्णन

कुंदन कृष्णन की चर्चा उनकी घोषित संपत्ति को लेकर भी होती रही है. उन्होंने 19 जनवरी 2026 को बिहार सरकार को अपनी संपत्ति का ब्योरा दिया था.इस ब्योरे के अनुसार कुंदन कृष्णन की चल संपत्ति 2,59,60,487 रुपये बताई गई है. वहीं उनकी अचल संपत्ति का मूल्य 8.72 करोड़ रुपये दर्ज है. इस हिसाब से उनकी व्यक्तिगत चल और अचल संपत्ति का घोषित मूल्य लगभग 11.32 करोड़ रुपये बनता है. उनकी पत्नी डॉ. मोनिका सिंह की चल संपत्ति 1,63,60,035 रुपये और अचल संपत्ति 10.19 करोड़ रुपये बताई गई है.पति-पत्नी की घोषित चल और अचल संपत्ति को जोड़ने पर कुल मूल्य लगभग 23.14 करोड़ रुपये बनता है इसलिए करीब 23 करोड़ रुपये की संपत्ति का आंकड़ा पति-पत्नी की संयुक्त घोषित संपत्ति से संबंधित है.

पत्नी डॉ. मोनिका सिंह पेशे से डॉक्टर

कुंदन कृष्णन की पत्नी डॉ. मोनिका सिंह पेशे से डॉक्टर हैं. उनकी घोषित चल संपत्ति 1,63,60,035 रुपये बताई गई है.उनके पास 45 हजार रुपये नकद दर्ज हैं. बैंक में 63,36,274 रुपये जमा बताए गए हैं. म्यूचुअल फंड में 93,15,720 रुपये का निवेश दर्ज है. इसके अलावा LIC के मद में 3,041 रुपये का उल्लेख किया गया है. उनके पास 400 ग्राम सोना और एक किलोग्राम चांदी बताई गई है. संपत्ति विवरण में उनके नाम पर मारुति स्विफ्ट डिजायर कार भी दर्ज है, जिसकी कीमत 6.6 लाख रुपये बताई गई है. डॉ. मोनिका सिंह की अचल संपत्ति का घोषित मूल्य 10.19 करोड़ रुपये बताया गया है. इसमें पटना में चार अलग-अलग जगहों पर कुल 54 कट्ठा कृषि भूमि शामिल है.इन जमीनों की कुल कीमत 10.19 करोड़ रुपये बताई गई है .इस तरह घोषित आंकड़ों के आधार पर डॉ. मोनिका सिंह की अचल संपत्ति का मूल्य कुंदन कृष्णन की अचल संपत्ति से अधिक है.



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