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Foreign Investment : पड़ोसी देश खासकर चीन से निवेश आसान बनाने के लिए सरकार एफडीआई नियमों में ढील देने पर विचार कर रही है. साल 2019 में सरकार ने चीन के निवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन दोनों देशों के साथ रिश्तों में आ रही मजबूती के मद्देनजर सरकार अब दोबारा निवेश लाने पर जोर दे रही है.
चीन का भारत में निवेश बढ़ाने के लिए सरकार एफडीआई को सरल बनाएगी.
नई दिल्ली. सरकार भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों (चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान आदि) से जुड़े विदेशी निवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया सरल बनाने पर विचार कर रही है. ऐसी विदेशी कंपनियों के निवेश से संबंधित प्रक्रियात्मक बाधाएं दूर करने की योजना है, जिनमें इन देशों के निवेशकों की हिस्सेदारी 10 फीसदी तक है.
मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सरकार ‘प्रेस नोट 2’ के तहत आवेदन प्रक्रिया सरल बनाने के लिए काम कर रही है. इसके तहत उन प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करने की योजना है, जिनके लिए सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं है. सरकार ने मार्च में ‘प्रेस नोट 2’ के जरिए भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले चीन और अन्य देशों से जुड़े विदेशी निवेश के नियमों में ढील दी थी. इसके तहत ऐसी विदेशी कंपनियों को भारत में पूर्व सरकारी मंजूरी के बिना निवेश करने की अनुमति दी गई, जिनमें इन देशों के निवेशकों की हिस्सेदारी 10 फीसदी तक है.
पहले क्या था नियम
सरकार की ओर से ढील दिए जाने से पहले भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के किसी भी शेयरधारक की एक शेयर की भी हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को भारत के किसी भी क्षेत्र में निवेश के लिए सरकारी मंजूरी लेनी पड़ती थी. हालांकि, इन निवेशों पर एफडीआई नीति की अन्य सभी शर्तें लागू रहेंगी. इनमें क्षेत्रवार सीमाएं और प्रवेश मार्ग से संबंधित नियम शामिल हैं. ऐसे निवेश के लिए उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) को पहले से निर्धारित जानकारी भी देनी होगी.
देश में ही बनाए जाएंगे 100 उत्पाद
स्वदेशीकरण के प्रयासों के तहत डीपीआईआईटी ने 100 ऐसे उत्पादों की सूची तैयार की है, जिनका उत्पादन पूरी तरह देश में किया जाएगा. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि इस मामले पर अंतर-मंत्रालयी परामर्श पूरा हो चुका है. संबंधित विभागों के साथ कार्ययोजना पर चर्चा जारी है. सरकार 10 हजार करोड़ रुपये के ‘स्टार्टअप फंड ऑफ फंड्स 2.0’ के क्रियान्वयन में तेजी ला रही है. इस कोष से सरकार भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) में पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) को समर्थन देगी, जो आगे चलकर स्टार्टअप में निवेश करेंगे.