‘6 कत्ल करो, तब बनोगे बॉस’, कच्छा-बनियान गैंग की रूह कंपा देने वाली कहानी, कैसे बचने का बनाते थे प्लान?

‘6 कत्ल करो, तब बनोगे बॉस’, कच्छा-बनियान गैंग की रूह कंपा देने वाली कहानी, कैसे बचने का बनाते थे प्लान?


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कत्ल की गिनती से तय होता था बॉस, कच्छा-बनियान गैंग की रूह कंपा देने वाली कहानी

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कच्छा-बनियान गैंग के कथित ग्रुप चाइमर गैंग की कहानी फिर चर्चा में है. पुलिस के मुताबिक इसके सरगना बनने के लिए छह हत्याएं करने का दावा किया जाता था. 25 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने कथित सरगना सावन को दक्षिण दिल्ली में फार्महाउस की रेकी करते समय मुठभेड़ के बाद पकड़ा. पुलिस का आरोप है कि उसने फायरिंग की और जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी. सावन का नाम 2016 में मथुरा में हुई लूट और हत्या की वारदात में आया था. 2023 में उसे और उसके साथियों को उम्रकैद की सजा हुई थी. 2025 में हाई कोर्ट ने अपील लंबित रहने तक जमानत दी थी. अब पुलिस पुराने मामलों और उसके कथित नेटवर्क की जांच कर रही है.

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चाइमर गैंग को कच्छा-बनियान गैंग का धड़ा बताया जाता है, दिल्ली पुलिस ने कथित सरगना सावन को मुठभेड़ के बाद पकड़ा. (फाइल फोटो)

रात का सन्नाटा, बंद दुकानों के आसपास घूमते कुछ लोग और फिर अचानक किसी घर में घुसकर लूटपाट. उत्तर भारत में अपराध की कई वारदातों से जुड़ा चाइमर गैंग इसी तरह पुलिस के रडार पर आया. इसे कच्छा-बनियान गैंग का एक ग्रुप बताया जाता है. पुलिस के मुताबिक इस गिरोह के सदस्य परिवारों के साथ एक शहर से दूसरे शहर जाते थे. कभी मजदूर तो कभी भिखारी बनकर संभावित ठिकानों की रेकी करते थे. इस गैंग को लेकर सबसे खौफनाक दावा यह है कि इसका सरगना बनने के लिए कम से कम छह हत्याएं करने की शर्त बताई जाती थी. हालांकि यह दावा पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आया है. अब इसके कथित सरगना सावन की गिरफ्तारी ने एक बार फिर इस गैंग की पुरानी वारदातों और काम करने के तरीके पर ध्यान खींचा है.

दिल्ली पुलिस के 25 अक्टूबर को दक्षिण दिल्ली के मैदानगढ़ी इलाके में फार्महाउस की रेकी करने के दौरान सावन को पकड़ने की कोशिश की गई. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस का आरोप है कि उसने पहले देसी पिस्तौल से गोली चलाई और फिर दूसरी पिस्तौल निकालकर फायरिंग की. एक गोली सब-इंस्पेक्टर नरेंद्र कुमार की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी. जवाबी कार्रवाई में सावन के दाहिने पैर में गोली लगी. उसे इलाज के लिए एम्स ले जाया गया. पुलिस के मुताबिक चाइमर गैंग का संबंध उत्तर प्रदेश के कन्नौज से रहा है और इसका नेटवर्क हरियाणा सहित दूसरे इलाकों तक फैला. सावन और उसके साथियों का नाम पहले भी लूट और हत्या के मामलों में आया था. अब पुलिस उससे पूछताछ कर पुराने मामलों की कड़ियां जोड़ने की कोशिश करेगी.

मथुरा की वह वारदात जिसने गिरोह को बेनकाब किया

28 अगस्त 2016 की रात मथुरा के पाठक नगर इलाके में एक परिवार अपनी किराना दुकान से जुड़े घर में सो रहा था. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक सावन और उसके तीन साथियों ने घर में घुसकर परिवार पर हमला किया. इस वारदात में 17 साल की कुसुमलता की मौत हो गई जबकि परिवार के अन्य सदस्य घायल हुए. पुलिस ने बताया कि इससे पहले 2014 में जौनपुर और पंजाब के मानसा में भी ऐसे ही मामलों में इस समूह का नाम सामने आया था. मानसा की वारदात में एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या का आरोप लगाया गया था.

ऐसे बचते थे पुलिस की नजर से

पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य एक जगह टिककर नहीं रहते थे. वे परिवारों के साथ अलग-अलग इलाकों में जाकर अस्थायी झुग्गियों में रहते और मजदूर या भिखारी बनकर लोगों की नजर में सामान्य दिखने की कोशिश करते थे. पुलिस का दावा है कि वे पहले संभावित घरों और फार्महाउसों की रेकी करते थे. वारदात के बाद दूसरे इलाके में चले जाना उनकी पहचान और ठिकाने का पता लगाने में चुनौती बनता था. हालांकि जांच एजेंसियों की कार्रवाई और स्थानीय पुलिस के बीच सूचना साझा होने से ऐसे गिरोहों की पहचान संभव हुई.

जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद फिर सक्रिय होने का आरोप

मथुरा मामले में सावन और उसके तीन साथियों को 2023 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. 2025 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपील लंबित रहने के दौरान उन्हें जमानत दे दी और सजा निलंबित कर दी. जमानत का अर्थ दोषमुक्त होना नहीं है. पुलिस का आरोप है कि बाहर आने के बाद सावन और उसके साथी राजस्थान के अलवर जिले के अंबेडकर नगर इलाके में अपने परिवारों के साथ रहने लगे और दिल्ली में भी आने-जाने लगे. जुलाई में महरौली के एक फार्महाउस को निशाना बनाने की कोशिश का भी पुलिस ने दावा किया था. अब सावन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके कथित नेटवर्क और पुराने मामलों की जांच कर रही है.



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