वैज्ञानिकों ने हमारी आकाशगंगा में मौजूद एक अनोखे कॉस्मिक अवशेष की बेहद विस्तृत तस्वीरें और आंकड़े जुटाए हैं. यह अवशेष करीब 850 साल पहले हुए एक भयानक सुपरनोवा विस्फोट का नतीजा है. इस खगोलीय ढांचे को विज्ञान की दुनिया में पीए 30 के नाम से जाना जाता है. हमारी मिल्की वे आकाशगंगा में अपनी तरह का यह इकलौता सुपरनोवा अवशेष है. इस मलबे की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसके बिल्कुल केंद्र में एक जिंदा जॉम्बी स्टार मौजूद है. गैस और धूल के इस फैलाव को देखकर ऐसा लगता है जैसे अंतरिक्ष में मोतियों की कोई विशाल माला बिखरी पड़ी हो.
ऑस्ट्रिया के इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की खगोलविद इलारिया काइआत्सो और उनकी टीम ने इस पर नया अध्ययन सामने रखा है. इस खोज ने मरे हुए तारों के दोबारा सक्रिय होने की पहेली को सुलझाने की दिशा में बड़ी मदद की है.
850 साल पहले आसमान में फटे तारे का मलबा आज भी अंतरिक्ष में चमक रहा
मानव इतिहास में तारों के फटने के लिखित प्रमाण बहुत कम मिलते हैं. पीए 30 को पहली बार साल 2013 में एक शौकिया खगोलविद ने खोजा था. बाद में वैज्ञानिकों ने जब इसकी दिशा और उम्र का हिसाब लगाया तो इसके तार 1181 के एक ऐतिहासिक विस्फोट से जुड़ गए. साल 1181 में जापान, चीन और अरब के खगोलविदों ने आसमान में एक नए और बेहद चमकदार तारे को दर्ज किया था. यह टेलिस्कोप के आविष्कार से पहले इंसानों द्वारा दर्ज किए गए केवल पांच सुपरनोवा विस्फोटों में से एक है.
हवाई के मौनाकेआ में स्थित जेमिनी नॉर्थ टेलीस्कोप ने ‘Pa 30’ का अब तक का सबसे डिटेल्ड नजारा दिखाया है. माना जाता है कि यह 1181 में देखे गए ऐतिहासिक सुपरनोवा का अवशेष है. नए अवलोकनों से पता चलता है कि इसके मशहूर ‘आतिशबाजी’ जैसे तंतु (फिलामेंट्स) कोई चिकनी लकीरें नहीं हैं, बल्कि छोटी-छोटी गांठों की कतारें हैं. (Image credit: International Gemini Observatory/NOIRLab/NSF/AURA)
क्या होता है जॉम्बी स्टार और महाविस्फोट के बाद भी यह तारा कैसे जिंदा बच गया?
ब्रह्मांड में सामान्य तौर पर जब कोई सफेद बौना तारा अपने साथी तारे से गैस खींचता है, तो उसे टाइप 1ए सुपरनोवा कहते हैं. यह प्रक्रिया किसी कॉस्मिक पिशाच की तरह होती है जहां एक मरा हुआ तारा दूसरे को निगलने लगता है. अत्यधिक पदार्थ इकट्ठा होने पर उसमें परमाणु विस्फोट होता है और वह सफेद बौना पूरी तरह नष्ट हो जाता है.
पीए 30 के मामले में ऐसा नहीं हुआ बल्कि यह टाइप 1एएक्स श्रेणी का बहुत ही दुर्लभ धमाका था. इस अनोखे विस्फोट में तारे का एक बड़ा हिस्सा बिखरने से बच गया. इस तरह बचे हुए आधे-अधूरे तारे को खगोलविद जॉम्बी स्टार या जीवित-मृतक तारा कहते हैं.
यह पूरी आकाशगंगा का अकेला ऐसा मलबा है जिसके सीने में यह पिशाच तारा अब भी धड़क रहा है. वैज्ञानिकों के लिए यह तारा ब्रह्मांडीय भौतिकी की एक खुली प्रयोगशाला बन चुका है.
हमारे सौरमंडल से 10 गुना बड़े मोतियों के हार जैसी बनावट का राज क्या है?
- शोधकर्ताओं ने इस अवशेष की गहराई से पड़ताल करने के लिए जेमिनी नॉर्थ टेलिस्कोप का इस्तेमाल किया. जब टेलिस्कोप के कैमरों को इस पर केंद्रित किया गया, तो गैस की लंबी धारियों पर खास किस्म की गांठें नजर आईं. ये गांठें बिल्कुल वैसे ही सजी हुई थीं जैसे किसी धागे में मोती पिरोए गए हों.
- वैज्ञानिकों ने जब इनके आकार की गणना की तो उनके होश उड़ गए. इनमें से एक-एक गांठ इतनी विशाल है कि उसमें हमारे पूरे सौरमंडल का विस्तार दस बार समा सकता है. सूरज से नेपच्यून ग्रह तक की दूरी को दस गुना करने के बाद भी इसमें जगह बाकी बच जाएगी.
- इलारिया काइआत्सो ने कहा, ‘हमारे सौरमंडल का पूरा ग्रहीय क्षेत्र इनमें से हर एक गांठ में दस बार आराम से समा सकता है’. ये सभी गांठें आकार में बेहद समान हैं और गैस के ये धागे डैंडेलियन के फूल की तरह बाहर की ओर फैल रहे हैं.
अंतरिक्ष में होने वाले भीषण विस्फोट के बाद भी यह तारा अपनी जगह पर कैसे टिका रहा?
भौतिक विज्ञान का नियम कहता है कि जब कोई भयंकर विस्फोट होता है तो संवेग के संरक्षण के कारण मलबे को तेज झटका लगता है. इस झटके से केंद्रीय तारे को अपनी मूल जगह से बहुत दूर छिटक जाना चाहिए था. वैज्ञानिकों ने देखा कि यह जॉम्बी स्टार आज भी पीए 30 के बिल्कुल बीचों-बीच स्थित है. इसका मतलब यह निकलता है कि 850 साल पहले हुआ यह महाधमाका हर दिशा में बिल्कुल एक समान हुआ था. सममित विस्फोट होने की वजह से केंद्रीय तारे को कोई बड़ा झटका नहीं लगा.
वैज्ञानिकों ने तारे की गति की सीमा को बेहद बारीकी से नापा है और पाया कि यह लगभग न के बराबर खिसका है. काइआत्सो ने कहा, ‘अगर विस्फोट पूरी तरह से सममित था तो निकलने वाला मलबा भी सममित होना चाहिए और बचे हुए तारे को कोई बड़ा झटका नहीं मिलना चाहिए’. यह तारा अपनी जगह पर स्थिर रहकर वैज्ञानिकों को हैरान कर रहा है.
क्या हमारी अपनी आकाशगंगा में ऐसे कई और जिंदा मरे हुए तारे अब भी छिपे हो सकते हैं?