Ujjain News: करवा चौथ पर जहां देशभर में महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखेंगी, वहीं उज्जैन में एक ऐसा मंदिर भी है, जिसके कपाट साल में केवल एक दिन खोले जाते हैं. करवा चौथ के विशेष अवसर पर खुलने वाले इस मंदिर में हजारों महिलाएं चौथ माता के दर्शन करने पहुंचती हैं. इस बार भी 29 अक्टूबर को मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और कथा का आयोजन किया जाएगा.
क्षिप्रा किनारे चौथ माता का धाम
उज्जैन की धार्मिक नगरी में चौथ माता का यह मंदिर जीवनखेड़ी गांव में उन्हेल बायपास मार्ग पर क्षिप्रा नदी के किनारे स्थित है. मंदिर में चौथ माता के साथ देवी पार्वती, रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ और संतोषी माता की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं. मंदिर के व्यवस्थापक कैलाश चंद्र नागवंशी के अनुसार, करीब 20 वर्ष पहले करवा चौथ पर महिलाओं की पूजा-अर्चना के लिए इस मंदिर का निर्माण कराया गया था. उनके मुताबिक, मध्य प्रदेश में चौथ माता का यह विशेष मंदिर है.
साल में एक बार खुलते हैं कपाट
इस मंदिर की सबसे खास बात ये कि इसके पट साल में केवल करवा चौथ के अवसर पर खोले जाते हैं. व्यवस्थापक के अनुसार, मंदिर के कपाट 364 दिन बंद रहते हैं और पर्व के दिन विधि-विधान से पूजा के लिए खोले जाते हैं. इस परंपरा की तुलना उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर से भी की जाती है, जिसके कपाट नागपंचमी पर खुलते हैं.
माता के बदलते स्वरूप के दर्शन की मान्यता
मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यता के अनुसार, चौथ माता की प्रतिमा सुबह बाल रूप, दोपहर में किशोरी और शाम को वृद्ध स्वरूप में दर्शन देती है. पर्व पर माता का विशेष श्रृंगार किया जाता है और आरती के साथ पूजन होता है. यहां विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित युवतियां अच्छे जीवनसाथी की प्रार्थना लेकर पहुंचती हैं.
महिलाओं को मिलता विशेष प्रसाद
करवा चौथ पर मंदिर आने वाली महिलाओं को मां कामाख्या का सिंदूर, नेपाल का सिक्का और रुद्राक्ष निःशुल्क प्रसाद के रूप में दिए जाने की परंपरा है. मंदिर व्यवस्थापक के अनुसार, श्रद्धालु इन वस्तुओं को घर में सुख-समृद्धि और मंगलकामना के प्रतीक के रूप में रखते हैं. हर साल करीब 20 हजार महिलाओं के पहुंचने का अनुमान है.
शिव-पार्वती की पूजा का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है. इस दिन महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा करती हैं. मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए यह व्रत किया था और उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिला. इसी आस्था के साथ उज्जैन के चौथ माता मंदिर में भी महिलाएं व्रत, कथा और पूजन के लिए जुटती हैं.