वकालत में बनाना है बड़ा नाम? पहले डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में सीखें केस लड़ने की बारीकियां, फिर बढ़ें HC-SC की ओर, जानें वरिष्ठ अधिवक्ता शांतनु से

वकालत में बनाना है बड़ा नाम? पहले डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में सीखें केस लड़ने की बारीकियां, फिर बढ़ें HC-SC की ओर, जानें वरिष्ठ अधिवक्ता शांतनु से


नई दिल्ली: इन दिनों वकील बनने का जो ट्रेंड है, वह तेजी से बढ़ चुका है. वकालत के क्षेत्र में मुकाबला भी पहले से ज्यादा तगड़ा होता जा रहा है. ऐसे में जो स्टूडेंट अभी वकालत की पढ़ाई कर रहे हैं या फिर वकालत की पढ़ाई करके अब प्रैक्टिस की ओर जा रहे हैं. उनके लिए कौन सा कोर्ट प्रैक्टिस के लिए बेस्ट है. क्या उन्हें सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट से ही प्रैक्टिस करनी चाहिए या फिर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट या सेशन कोर्ट में कदम रख वकालत की बारीकियां सीखना चाहिए. इन्हीं सवालों का जवाब जानने के लिए लोकल 18 की टीम ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और सबरीमाला मंदिर केस के साथ ही चर्चित हाथरस केस लड़ चुके शांतनु जुगतावत से खास बात की.

उन्होंने बताया कि वकालत के क्षेत्र में कदम रखने वाले स्टूडेंट और नए वकीलों को यह समझना होगा कि ज्यादा एक्सपोजर आपको कौन से कोर्ट से मिल रहा है. जहां से एक्स्पोज़र ज्यादा मिले. वहां से शुरुआत करनी चाहिए और जैसा एक्स्पोज़र आप चाहते हैं, इस क्षेत्र में वैसा सुप्रीम कोर्ट से कम ही मिलता है. ऐसे में आपको वकालत की शुरूआत के पहले गहन विचार करना चाहिए. आइये जानते हैं उन्होंने क्या कुछ कहा.

जानें डिस्ट्रिक्ट और सेशन कोर्ट में प्रैक्टिस के फायदे

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील शांतनु जुगतावत ने बताया कि नए वकीलों को सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट से शुरुआत नहीं करनी चाहिए. बल्कि डिस्ट्रिक्ट और सेशन कोर्ट से शुरुआत करनी चाहिए. उन्होंने बताया कि यह सलाह इसलिए दी जा रही है. क्योंकि आपको सबसे पहले सीखने के लिए डिस्ट्रिक्ट कोर्ट जाना चाहिए. फिर सेशन कोर्ट जाना चाहिए. उसके बाद हाई कोर्ट होकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचना चाहिए. ऐसा करना हर वकील के लिए काफी फायदेमंद होता है. क्योंकि डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में जो एक्स्पोज़र आपको मिलेगा. वह सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट में नहीं मिलता है.

उन्होंने बताया कि इसके अलावा सारे सबूत को कैसे कोर्ट के सामने पेश करना है और सारे सबूत कैसे जुटाने हैं, मुकदमे को कोर्ट में कैसे रखना है. यह सारी जानकारी आपको सही मायने में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में ही होती है. इसके अलावा इन कोर्ट में आपको यह भी फायदा होगा. आप यह समझ जाएंगे कि जिसके ऊपर आरोप लगे हैं, उसके खिलाफ और उसके पक्ष में कितने सबूत हैं. उनको कैसे अलग करना है.

डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में मिलता है सीखने का मौका

बता दें कि सीखने का बेहतर मौका आपको डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में ही मिलता है. इसीलिए हमेशा शुरुआत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से करें. फिर सेशन कोर्ट जाएं. उसके बाद हाई कोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट आएं. तो आपको एक बेहतर पहचान मिल जाएगी और आपको वह एक्स्पोज़र मिलेगा जो आप चाहते हैं.

डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में एक्सपोज़र

1- केस की शुरुआत से लेकर फैसले तक काम सीखने का मौका मिल सकता है.
2- गवाहों से जिरह करना, सबूत पेश करना और कोर्ट में बहस करने का व्यावहारिक अनुभव मिलता है.
3- क्लाइंट से सीधे संपर्क और अपनी पहचान बनाने के अवसर मिलते हैं.
4- अलग-अलग तरह के मुकदमों को करीब से समझ सकते हैं.

ऐसा रहा शांतनु जुगतावत का अपना सफर

शांतनु जुगतावत ने खास बातचीत में बताया कि उन्होंने साइंस एंड मैथमेटिक्स में पढ़ाई की थी. इसके बाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी का एंट्रेंस एग्जाम दिया था. जिसके बाद भोपाल नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में उनका एडमिशन हो गया था. 2008 में उन्होंने वहां से पास होकर 2010 से लेकर 2012 तक अमरेंद्र शरण जो कि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील थे और वह भारत सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के पद पर थे. उनके चैंबर को ज्वाइन किया.

उन्होंने कहा कि 2 साल उनके अधीन काम करने के बाद स्वतंत्र प्रैक्टिस शुरू की. यहीं से उनका सफर शुरू हुआ. उन्होंने बताया कि उनके पूरे परिवार में कोई भी वकालत के क्षेत्र में नहीं था. पिता डॉक्टर थे. वह फिजिशियन थे. पहली पीढ़ी होने की वजह से उनके सामने चुनौतियां ज्यादा थी, लेकिन उन्होंने सभी चुनौतियों को पार कर लिया तो आज उनकी इस क्षेत्र में अच्छी पहचान है.



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