धान के खेत में अब लहलहाएगा मखाना, BAU में नई विधि का प्रयोग सफल, भागलपुर के किसानों की बढ़ेगी कमाई

धान के खेत में अब लहलहाएगा मखाना, BAU में नई विधि का प्रयोग सफल, भागलपुर के किसानों की बढ़ेगी कमाई


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धान के खेत में अब लहलहाएगा मखाना, BAU में नई विधि का प्रयोग सफल, बढ़ेगी आमदनी

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BAU New Makhana Farming Tips: बिहार के भागलपुर में बीएयू के सफल शोध के बाद अब धान के खेतों और जलजमाव वाले क्षेत्रों में भी मखाना की खेती की जा रही है. पीरपैंती और नवगछिया में नई विधि से मखाना उगाकर किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है जिससे मखाना उत्पादन को नया विस्तार मिलेगा.

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BAU New Makhana Farming Technique In Bhagalpur: बिहार का भागलपुर जिला सिल्क, जर्दालू और कतरनी के लिए प्रसिद्ध है. जिसको जीआई टैग भी प्राप्त हुआ है. इतना ही नहीं, भागलपुर के कुछ इलाके लीची, केला व गन्ना के लिए भी प्रसिद्ध हैं. खासकर नवगछिया की बात करें तो यहां केला और लीची बड़े पैमाने पर पैदा की जाती है. लेकिन अब यह इलाका मखाना के लिए प्रसिद्ध होने वाला है. क्योंकि अब मखाना तलाब में नहीं, बल्कि खेतो में भी उगाया जाने लगा है. भागलपुर के कई क्षेत्र में इसकी उपज भी संभव हो रही है. बीएसयू की ओर हुआ  शोध सफल हुआ है. आइए जानते हैं मखाना की खेती की नई विधि.

खेत में अलग-अलग विधि से उगा रहे हैं मखाना
आपको बता दें कि मखाना पानी में उगाया जाने वाला सुपरफूड है. जिसकी खेती कोसी सीमांचल व मिथलांचल में अधिक देखने को मिलती है. बीएयू यानी बिहार कृषि विश्वविद्यालय भागलपुर के कुलपति डॉ. डी आर सिंह बताते हैं कि बीएयू का हर संभव प्रयास रहता है कि किसानों की आय बढ़े. ऐसे में मखाना वर्तमान में किसानों के लिए आमदनी का एक अच्छा स्त्रोत है. इसको जीआई मिलने के बाद से इसकी डिमांड काफी बढ़ी है. खासकर विदेशों तक इसको सप्लाई किया जा रहा है. जो किसानो की आमदनी दुगुनी कर रहा है. ऐसे में अब लगा कि भागलपुर में भी इसकी खेती होनी चाहिए. इसी कड़ी में कुल 25 एकड़ के करीब इसकी खेती की गई है.

BAU का ये शोध हुआ सफल, भागलपुर में दिखेगी खेती
दरअसल, बीएयू ने एक शोध किया था कि यह कितने पानी तक में फलन संभव है. तभी इसमे पता चला कि इसको धान के खेत में पानी को स्टोर कर भी उगाया जा सकता है. तभी भागलपुर के पीरपैंती जो कि गन्ना व धान के लिए मशहूर है. वहां और नवगछिया जो केला, मक्का, लीची व सब्जी की खेती के लिए प्रसिद्ध है. वहां इसको उगाया जा रहा है. डॉ सिंह बताते हैं कि इसको दो विधि से यहां लगाया गया है. एक पोलिथिन सीट खेत में डालकर उसमें पानी स्टोर कर व दूसरा ऊंची मेढ़ वाले खेत मे इसको लगाया गया है. दोनों में किसानों को सफलता हाथ लगी है. हालांकि लोग अभी डरकर इसको लगा रहे हैं. क्योंकि यहां के लिए यह नई चीज है, लेकिन आने वाले समय मे बड़े पैमाने पर इसकी खेती भागलपुर में भी देखने को मिलेगी.

जलजमाव वाले खेत में इसकी खेती में है संभव
उन्होंने बताया कि ऐसे खेत, जिसमें जलजमाव होती है, वैसे खेत के लिए यह फूड वरदान साबित होगी. लोग उसको ऐसे ही छोड़ देते हैं, लेकिन अब उसमें मखाना उगाया जाएगा. ऐसे खेत को भी चिन्हित किया जा रहा है. जहां जलजमाव की समस्या होती है. जल्द ही इसका क्षेत्र विस्तार देखने को भी मिलेगा.



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