दो साल की मंदी के बाद ग्वार के भाव में तेजी की उम्मीद, किसान कर रहे स्टॉक
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Guar Price Today: पश्चिमी राजस्थान में कम बारिश और घटती पैदावार के कारण दो साल की मंदी के बाद ग्वार के भाव में तेजी आने की उम्मीद है. ओसियां सहित जोधपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में किसान बेहतर कीमत के लिए ग्वार का स्टॉक कर रहे हैं.
जोधपुर: पश्चिमी राजस्थान में किसानों की नकदी फसल ग्वार एक बार फिर बाजार में चर्चा का विषय बनी हुई है. पिछले दो साल से भाव में नरमी झेल रहे किसानों को अब तेजी की उम्मीद नजर आने लगी है. इस बार मानसून की कम बारिश से ग्वार की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है. वहीं, बाजार में ग्वार गम की मांग और सीमित आपूर्ति के बीच भाव में सुधार के संकेत मिलने से किसानों की उम्मीदें बढ़ गई हैं. ओसियां सहित जोधपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अब मंडियों में ग्वार के भाव, आवक और बाजार की चाल पर नजर रख रहे हैं. कुछ किसान बेहतर भाव मिलने की उम्मीद में अपनी उपज का स्टॉक भी कर रहे हैं.
ग्वार के बाजार भाव में पिछले एक दशक के दौरान कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं. उपलब्ध ऐतिहासिक बाजार आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 में ग्वार के औसत भाव करीब 3,050 रुपए प्रति क्विंटल थे. वर्ष 2021 में भाव बढ़कर करीब 4,424 रुपए और वर्ष 2022 में 5,217 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए. वर्ष 2023 में भी भाव करीब 5,250 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास रहे. इसके बाद वर्ष 2024 और 2025 में भाव में गिरावट दर्ज की गई. लगातार दो साल की नरमी के बाद अब किसानों को बाजार में सुधार की उम्मीद है. किसानों का मानना है कि यदि मांग बनी रहती है और बाजार में ग्वार की उपलब्धता कम रहती है, तो आने वाले दिनों में भाव को मजबूती मिल सकती है.
मंडियों की आवक और दैनिक भाव किसानों के लिए महत्वपूर्ण
ओसियां के किसान हरिराम के अनुसार, भाव में तेजी की उम्मीद के चलते कुछ किसान और कारोबारी ग्वार का स्टॉक कर रहे हैं और बाजार में कम मात्रा में उपज बेच रहे हैं.इससे मंडियों में ग्वार की आवक पर असर पड़ सकता है.हालांकि, बाजार में भाव की दिशा केवल स्टॉक पर निर्भर नहीं करती, बल्कि नई फसल की वास्तविक पैदावार, मंडियों में आने वाली उपज और कारोबारियों की खरीद पर भी निर्भर रहती है. यदि आवक कम रहती है और खरीद बनी रहती है, तो भाव में तेजी का रुख देखने को मिल सकता है.ऐसे में आने वाले दिनों में मंडियों की आवक और दैनिक भाव किसानों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे.
ग्वार गम की मांग तय करेगी बाजार की अगली चाल
ग्वार का उपयोग खाद्य पदार्थों के साथ-साथ विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में भी किया जाता है. इससे तैयार होने वाले ग्वार गम की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग का सीधा असर ग्वार बीज के बाजार पर पड़ता है. ओसियां और आसपास के गांवों में ग्वार प्रमुख फसलों में शामिल होने के कारण भाव में होने वाला बदलाव किसानों की आमदनी को प्रभावित करता है. किसानों को उम्मीद है कि कम उत्पादन और बाजार में मांग के चलते इस बार उन्हें बेहतर कीमत मिल सकती है. हालांकि, तेजी कितनी होगी, यह फसल की वास्तविक पैदावार, मंडियों में आवक और ग्वार गम की मांग स्पष्ट होने के बाद ही तय हो सकेा.