अंतरिक्ष में फूटा ऐसा रिकॉर्डतोड़ बम जिसने हिलाया ब्रह्मांड, 27 दिनों तक धधकता रहा; आखिर यह था क्या?

अंतरिक्ष में फूटा ऐसा रिकॉर्डतोड़ बम जिसने हिलाया ब्रह्मांड, 27 दिनों तक धधकता रहा; आखिर यह था क्या?


खगोलविदों ने सुदूर अंतरिक्ष में एक असाधारण और रिकॉर्डतोड़ विस्फोट देखा है. इसे अब तक का सबसे विशाल और अनोखा गामा-रे बर्स्ट माना जा रहा है. खगोल विज्ञान में इसे बाकी धमाकों का हल्क कहा जा रहा है. इस कॉस्मिक विस्फोट की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसका मुख्य इंजन करीब 27 दिनों तक लगातार सक्रिय रहा. इस दौरान यह अंतरिक्ष में लगातार एक्स-रे तरंगे उगलता रहा. इससे पहले दर्ज किए गए सबसे लंबे गामा-रे बर्स्ट से यह पूरे 20 दिन ज्यादा चला है. इस विस्फोट को जीआरबी 220706ए नाम दिया गया है. वैज्ञानिक अब तक यह नहीं समझ पाए हैं कि आखिर 27 दिनों तक इतनी ऊर्जा कहां से आ रही थी. इस खोज ने अंतरिक्ष के सबसे शक्तिशाली विस्फोटों को समझने के नए रास्ते खोल दिए हैं.

अंतरिक्ष के इस दैत्याकार विस्फोट ने तोड़ दिए पुराने सारे रिकॉर्ड

यह ऐतिहासिक विस्फोट पहली बार 6 जुलाई 2022 को वैज्ञानिकों की नजर में आया था. इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम के शोधकर्ता बेंजामिन गोम्पर्ट्ज ने इसके बारे में कई अहम जानकारियां साझा की हैं. उन्होंने बताया कि आमतौर पर ऐसे विस्फोटों के बाद शुरुआती कुछ दिनों तक ही एक्स-रे फ्लेयर देखने को मिलते हैं. इस नए मामले में 27 दिनों के बाद भी लगातार एक्स-रे फ्लेयर निकल रहे थे. बेंजामिन गोम्पर्ट्ज ने कहा, ‘इस तरह का लगातार चलने वाला प्रोसेस ज्ञात आबादी में पूरी तरह से अभूतपूर्व है’. इससे पहले किसी गामा-रे बर्स्ट में देर से होने वाले फ्लेयर का रिकॉर्ड केवल 6 दिनों का था. इस नए धमाके ने उस पुराने रिकॉर्ड को 20 दिनों के भारी अंतर से ध्वस्त कर दिया है.

क्या होता है गामा-रे बर्स्ट और यह इतना खतरनाक क्यों?

  • गामा-रे बर्स्ट पूरे ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली और चमकदार विस्फोटों में गिने जाते हैं. जब कोई बहुत भारी तारा अपनी जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर पहुंचता है, तब वह अपने ही वजन से ढह जाता है.
  • इस घटना से एक जोरदार सुपरनोवा विस्फोट होता है और केंद्र में ब्लैक होल बन जाता है. इस पूरी प्रक्रिया से लंबी अवधि वाले गामा-रे बर्स्ट का जन्म होता है. वहीं जब दो न्यूट्रॉन तारे आपस में टकराते हैं, तब छोटी अवधि वाले बर्स्ट पैदा होते हैं.
  • जीआरबी 220706ए को अल्ट्रा-लॉन्ग गामा-रे बर्स्ट की श्रेणी में रखा गया है. यह बहुत दुर्लभ श्रेणी है जिसमें धमाके को ताकत देने वाला इंजन हफ्तों तक बंद नहीं होता है. वैज्ञानिक अभी तक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इतनी प्रचंड ऊर्जा का असली स्रोत क्या हो सकता है.

27 दिनों तक लगातार धधकने वाले इस धमाके का इंजन आखिर क्या है?

वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द यह समझना है कि आखिर किस चीज ने इस धमाके को इतने लंबे समय तक जिंदा रखा. विस्फोट के साथ एक सुपरनोवा भी देखा गया था. इससे यह तो साबित हो गया कि किसी बहुत बड़े तारे का अंत हुआ है. इसके बावजूद केवल एक साधारण तारे का गिरना इतने दिनों तक चमकने की वजह साफ नहीं करता है. बेंजामिन गोम्पर्ट्ज ने कहा, ‘हम नहीं जानते कि इस विस्फोट को चलाने वाला केंद्रीय इंजन क्या है’.

खगोलविद अब इससे पहले हुई कुछ घटनाओं से इसकी तुलना कर रहे हैं. साल 2011 में भी जीआरबी 111209ए नाम का एक अनोखा बर्स्ट देखा गया था. उसमें भी बहुत ज्यादा चमकीला सुपरनोवा देखने को मिला था.

क्या किसी मैग्नेतार या विशाल तारे के अवशेष ने रचा है यह पूरा खेल?

साल 2011 वाले विस्फोट के अध्ययन से पता चला था कि उसके केंद्र में एक मैग्नेतार मौजूद था. मैग्नेतार असल में बहुत तेज चुंबकीय क्षेत्र वाला एक न्यूट्रॉन तारा होता है. यह तारा अपने अक्ष पर हर सेकंड में लगभग 1000 बार घूमता है. इस नए सुपरनोवा के लक्षण भी काफी हद तक उसी मैग्नेतार से मेल खा रहे हैं.

गोम्पर्ट्ज के अनुसार एक संभावना यह भी हो सकती है कि तारे के नष्ट होने से पहले उसकी बाहरी परतों से गैस के भारी गोले बाहर निकले हों. जब विस्फोट से निकली जेट किरणें उन घने बादलों से टकराईं, तो यह तेज चमक पैदा हुई होगी. सुपर-ल्यूमिनस सुपरनोवा की दुनिया में ऐसी घटनाएं अक्सर देखने को मिलती हैं.

क्या सूर्य से हजार गुना बड़ा नीला महादानव तारा था इस धमाके की वजह?

रिसर्च टीम इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या यह तारा सामान्य तारों से आकार में बहुत बड़ा था. अगर तारा बहुत विशाल होगा तो उसे अपने केंद्र में गिरने में ज्यादा समय लगेगा. ऐसी स्थिति में वह जेट किरणों को लंबे समय तक ऊर्जा दे सकता है. आमतौर पर वैज्ञानिक वुल्फ-रायेट तारों को ऐसे विस्फोटों का जनक मानते हैं.

ये तारे सूर्य से करीब 10 गुना ज्यादा चौड़े और भारी होते हैं. लेकिन इस नए विस्फोट को समझाने के लिए इतना बड़ा तारा भी काफी नहीं है. बेंजामिन गोम्पर्ट्ज ने कहा, ‘इस धमाके के लिए हमें सूर्य के आकार से 1000 गुना बड़े तारे की जरूरत होगी’. इसका मतलब यह हो सकता है कि यह तारा ब्लू सुपरजायंट यानी नीला महादानव वर्ग का रहा होगा.

इतने लंबे समय तक चलने वाले विस्फोटों को पकड़ना इतना मुश्किल क्यों है?

ब्रह्मांड में ऐसे और भी लंबे चलने वाले विस्फोट हो सकते हैं, जिन्हें हम अब तक नहीं देख पाए हैं. खगोलविदों के लिए इन्हें ट्रैक करना बेहद चुनौतीपूर्ण काम होता है. इसका बड़ा कारण यह है कि ज्यादातर निगरानी उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा में चक्कर लगाते हैं. इस वजह से उनका लक्ष्य हर 90 मिनट में पृथ्वी की ओट में छिप जाता है. 10 से 100 सेकंड तक चलने वाले सामान्य विस्फोटों के लिए यह कोई समस्या नहीं है. लेकिन महीनों तक चलने वाले धमाकों पर लगातार नजर रखना बहुत कठिन हो जाता है. इसके अलावा ऐसे लंबे बर्स्ट गामा किरणों के बजाय मुख्य रूप से एक्स-रे में ज्यादा सक्रिय रहते हैं.

वैज्ञानिकों का मानना है कि आइंस्टीन प्रोब जैसे नए अंतरिक्ष मिशन इन रहस्यों को सुलझाने में गेमचेंजर साबित हो सकते हैं. यह नया मिशन एक्स-रे किरणों को पकड़ने में बहुत ज्यादा संवेदनशील है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इसकी मदद से भविष्य में ऐसे कई और अल्ट्रा-लॉन्ग गामा-रे बर्स्ट खोजे जा सकेंगे. यह अध्ययन प्री-प्रिंट सर्वर आर्काइव पर भी प्रकाशित किया गया है.



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