Vriksharamam: एक ही जगह 27 नक्षत्रों के पेड़, हर वृक्ष की अपनी धार्मिक मान्यता
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Vriksharamam 27 Nakshatra Van: राजस्थान में स्थित ‘वृक्षारामम’ आस्था और पर्यावरण का अद्भुत संगम है, जहां एक ही परिसर में 27 नक्षत्रों से जुड़े 27 अलग-अलग वृक्ष संजोए गए हैं. 21 दिसंबर 2015 को शुरू हुआ यह परिसर लोगों को उनके जन्म नक्षत्र के अनुसार पेड़ की पहचान, पूजा और परिक्रमा की सुविधा देता है. हर पेड़ के नीचे बने चबूतरे और विस्तृत सूचना पट्टिका के माध्यम से यह स्थल न केवल धार्मिक शांति प्रदान करता है बल्कि नई पीढ़ी को अपनी प्राचीन संस्कृति और हरियाली से जोड़ने की एक अनोखी पहल है.
Hyderabad: सनातन संस्कृति में पेड़-पौधों को सिर्फ प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन और आस्था का आधार माना गया है. हमारे पूर्वजों और बड़े-बुजुर्गों ने जो परंपराएं शुरू की थीं, उनके पीछे गहरा विज्ञान और जीवन की भलाई छिपी होती है. ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कुल 27 नक्षत्र होते हैं. इन सभी 27 नक्षत्रों का जुड़ाव किसी न किसी खास वृक्ष से माना गया है. इसी सोच को धरातल पर साकार करते हुए एक विशेष और भव्य पहल की गई है, जिसका नाम ‘वृक्षारामम’ रखा गया है.
आमतौर पर किसी व्यक्ति को अपनी राशि या जन्म नक्षत्र की जानकारी तो होती है, लेकिन उससे संबंधित पवित्र वृक्ष के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. साथ ही, ये सभी 27 पेड़ एक जगह पर आसानी से देखने को नहीं मिलते हैं. इसी बात को ध्यान में रखकर इस वृक्षारामम को विशेष रूप से तैयार किया गया है. यहां सभी 27 नक्षत्रों से संबंधित 27 अलग-अलग वृक्षों को एक ही परिसर में रोपित कर उन्हें बेहद जतन से संजोया गया है.
धार्मिक मान्यताएं और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति अपने जन्म नक्षत्र से जुड़े पेड़ की नियमित पूजा करता है और उसकी सही देखभाल करता है, तो उसे जीवन में शुभ फल, सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति प्राप्त होती है. वृक्षारामम में आने वाले लोग न सिर्फ अपने नक्षत्र के पेड़ की आसानी से पहचान कर सकते हैं, बल्कि उसकी विधि-विधान से पूजा और परिक्रमा भी कर सकते हैं. इस परिसर की बनावट बेहद सुव्यवस्थित है, जहां हर पेड़ के नीचे गोल सुंदर चबूतरा बनाया गया है. उस चबूतरे पर उस पेड़, नक्षत्र और उसके महत्व से जुड़ी पूरी जानकारी अंकित की गई है.
सूचना पट्टिका और 2015 से निरंतर प्रेरणा का स्रोत
इस खूबसूरत परिसर में एक बड़ी सूचना पट्टिका भी लगाई गई है, जिसमें किस नक्षत्र के लिए कौन सा नामाक्षर निर्धारित है और उससे संबंधित वृक्ष कौन सा है, इसका पूरा विवरण विस्तार से दिया गया है. इस प्रेरणादायी वृक्षारामम की शुरुआत 21 दिसंबर 2015 को की गई थी. यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, बल्कि नई पीढ़ी को पर्यावरण संरक्षण, पेड़-पौधों के औषधीय महत्व और अपनी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक बेहतरीन जरिया भी साबित हो रहा है.