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सऊदी अरब ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध खत्म कराने के लिए कूटनीतिक कोशिशों में जुटा है. रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान का तेहरान दौरा इस पहल की गंभीरता दिखाता है. होर्मुज स्ट्रेट में संकट, तेल निर्यात पर दबाव और हूती हमलों का खतरा सऊदी की चिंता बढ़ा रहे हैं. अमेरिका के साथ रिश्ते बनाए रखते हुए सऊदी ईरान से तनाव घटाने का रास्ता तलाश रहा है.
सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन. (Reuters/फाइल फोटो)
Saudi Arabia-Iran Relations: सऊदी अरब और ईरान दशकों तक खाड़ी क्षेत्र में एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी रहे हैं. लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि सऊदी को ईरान के साथ बातचीत की मेज पर बैठना पड़ रहा है. वजह सिर्फ क्षेत्र में शांति की अपील नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा, तेल की सप्लाई और आर्थिक भविष्य को बचाने की चिंता भी है. 26 अक्टूबर 2026 को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अपने रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान को पाकिस्तान और तुर्किये के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ तेहरान भेजा है. मक्का पैक्ट से जुड़े सभी देश यहां ईरान को युद्ध खत्म करने के लिए मना रहे हैं. सऊदी अरब इस प्रतिनिधिमंडल को लीड कर रहा है. इस युद्ध के दौरान यह तीनों देशों के ईरान के साथ उच्चस्तरीय संपर्क की अहम कड़ी है.
इस दौरे की अहमियत इसलिए भी है कि सऊदी अरब ने हाल ही में पाकिस्तान और तुर्किये के साथ मक्का संयुक्त रक्षा समझौता किया है. इसके तहत किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला बाकी सदस्यों पर हमला माना जाएगा. सऊदी के रक्षा मंत्री का तेहरान पहुंचना बताता है कि सिर्फ रक्षा समझौते पर भरोसा करना काफी नहीं है. रियाद को यह भी देखना है कि युद्ध को फैलने से कैसे रोका जाए.
Senior officials from Iran, Pakistan, Türkiye and Saudi Arabia have begun a four-way meeting in Tehran, hosted by Iran’s Supreme National Security Council Secretary Mohsen Rezaei.
Participants include Pakistan’s Army Chief Asim Munir, Saudi Defense Minister Khalid bin Salman and Turkish Intelligence Chief Ibrahim Kalin.