रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा को लेकर बड़े इंतजाम किए जा रहे हैं. उनके आवास के आसपास एयर डिफेंस टावरों की संख्या बढ़ाकर 50 से ज्यादा कर दी गई है. दूसरी ओर, यूक्रेन के साथ जारी युद्ध में सैनिकों की जरूरत पूरी करने के लिए रूस अफ्रीकी देशों तक अपना भर्ती अभियान बढ़ा रहा है. एक तरफ राष्ट्रपति के आवास की सुरक्षा मजबूत करने की कोशिश और दूसरी तरफ युद्ध के लिए नए लड़ाकों की तलाश, रूस के सामने खड़ी दो अलग-अलग चुनौतियों की ओर इशारा करती है.
पुतिन के घर के आसपास 50 से ज्यादा एयर डिफेंस टावर
रेडियो लिबर्टी की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के नोवगोरोद क्षेत्र में वाल्दाई स्थित पुतिन के आवास के आसपास 16 नए एयर डिफेंस टावर बनाए गए हैं. इससे इस इलाके में ऐसे टावरों की कुल संख्या 50 से ज्यादा हो गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में ली गई सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करने पर आवास के करीब 50 मील यानी लगभग 80 किलोमीटर के दायरे में 15 से ज्यादा नए शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस टावर दिखाई दिए. यह विश्लेषण रेडियो लिबर्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक्टिव एक ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस विश्लेषक के साथ मिलकर किया.
इन टावरों में पैंटसिर या टोर जैसे कम दूरी के हवाई रक्षा सिस्टम लगाए जाने की संभावना जताई गई है. ये सिस्टम ड्रोन और दूसरे हवाई खतरों को रोकने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, नए टावरों का बाहरी घेरा पुतिन के आवास के दक्षिणी हिस्से में बनाया गया है, जो यूक्रेन की दिशा की ओर पड़ता है. कुछ रक्षा ठिकाने व्यशनेवोलोत्स्क जलाशय के किनारे भी हैं. इनमें से दो लिसी द्वीप के करीब बताए गए हैं, जहां एक प्रयोगशाला का कंपाउंड मौजूद है. रिपोर्ट के मुताबिक, बाहरी सुरक्षा घेरे में एक टावर खोतिलोवो सैन्य अड्डे के परिसर में भी है. कथित तौर पर यहां से पुतिन के आवास तक एक सीधी रेल लाइन है.
पहले भी ड्रोन हमले का आरोप लगा चुका है रूस
रूस की सेना ने जनवरी में दावा किया था कि यूक्रेन ने वाल्दाई स्थित पुतिन के आवास पर ड्रोन हमले की कोशिश की थी. यूक्रेन ने इस आरोप को खारिज कर दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी यानी CIA ने भी मॉस्को के इस दावे को गलत माना था. रेडियो लिबर्टी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पुतिन की कथित गर्लफ्रेंड अलीना काबायेवा, वाल्दाई स्थित आवास पर काफी समय बिताती हैं. रिपोर्ट में तुलना करते हुए बताया गया है कि वाल्दाई में 50 से ज्यादा एयर डिफेंस टावरों की संख्या मॉस्को और उसके आसपास लगाए गए टावरों की कुल संख्या के करीब आधी है. जबकि मॉस्को क्षेत्र में करीब दो करोड़ लोग रहते हैं और वाल्दाई में आबादी लगभग एक लाख बताई गई है.
यूक्रेन युद्ध के लिए अफ्रीका तक भर्ती
दूसरी ओर, रूस यूक्रेन में लड़ाई के लिए अफ्रीकी देशों से लोगों की भर्ती बढ़ा रहा है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस अब अफ्रीका के गरीब देशों से ज्यादा लोगों को भर्ती करने पर ध्यान दे रहा है. इनमें जिम्बाब्वे, बुरुंडी और सिएरा लियोन जैसे देश शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ लोगों को रूस में नागरिक नौकरियों, जैसे परिवहन या खानपान से जुड़े काम का वादा करके भर्ती किया गया. कुछ मामलों में अच्छे वेतन, बड़ी रकम के बोनस और रूसी नागरिकता मिलने के वादे भी किए गए हैं. लेकिन भर्ती किए गए लोगों में से कई को बाद में यूक्रेन के मोर्चे पर भेजे जाने के आरोप हैं.
यूक्रेन पर बनी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की 26 अक्टूबर की रिपोर्ट में कहा गया है कि रूसी अधिकारियों ने 29 देशों के लोगों को धोखे या दबाव के जरिए रूसी सेना में भर्ती किया. आयोग के मुताबिक, अफ्रीका से भर्ती किए गए कई लोगों को फ्रंट लाइन पर हमले करने और आगे बढ़ने वाले अभियानों में लगाया गया. रिपोर्ट में यह भी आरोप है कि कुछ लोगों ने लड़ाई में शामिल होने से इनकार किया, तो उन्हें हिरासत में रखने, पीटने और जान से मारने की धमकी देने जैसी सजा दी गई.
बुरुंडी और जिम्बाब्वे से भर्ती में बड़ा उछाल
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी से 30 सितंबर के बीच रूस ने बुरुंडी से 699 लोगों को भर्ती किया, जबकि पूरे 2025 में यह संख्या 30 थी. इसी समय काल में जिम्बाब्वे से 530 लोगों की भर्ती किए जाने का दावा है, जबकि 2025 में यह संख्या 65 थी. कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, सिएरा लियोन, सूडान और कैमरून जैसे देशों से भी भर्ती बढ़ने की बात कही गई है. यूक्रेन के मुताबिक, उसने 151 देशों के 45,959 ऐसे विदेशी नागरिकों की पहचान की है जिन्होंने रूसी सेना के साथ अनुबंध किया. इनमें 5,451 लोग अफ्रीकी देशों से बताए गए हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रूस ने यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार मेडागास्कर से लड़ाकों की भर्ती शुरू की है. 2025 में वहां सैन्य तख्तापलट के बाद नई सत्ता के मॉस्को के साथ करीबी संबंध बनने का भी जिक्र किया गया है.
अफ्रीकी देशों ने अपने नागरिकों को लेकर जताई चिंता
रूस के भर्ती अभियान को लेकर कई अफ्रीकी देशों की सरकारों ने चिंता जताई है. बोत्सवाना और दक्षिण अफ्रीका ने अपने नागरिकों को रूस में आकर्षक नौकरी के प्रस्तावों को लेकर सावधान किया है. जिम्बाब्वे में सेना के लिए भर्ती करने के संदेह में दो रूसी नागरिकों को गिरफ्तार किए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है. केन्या और घाना ने भी रूस से इस गतिविधि को रोकने की अपील की है. केन्या के कुछ नेताओं ने दावा किया है कि रूस ने उनके देश से कम से कम एक हजार लोगों की भर्ती की है.