PoK India Relations : PoK आजाद होते ही भारत को होंगे 3 बड़े फायदे, 100 लोगों ने तय कर दिया जीत का रास्ता

PoK India Relations : PoK आजाद होते ही भारत को होंगे 3 बड़े फायदे, 100 लोगों ने तय कर दिया जीत का रास्ता


पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला कश्मीर (PoK) अलग होने के लिए झटपटा रहा है. जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) के प्रमुख नेता उमर नजीर कश्मीरी ने साफ-साफ शब्दों में ऐलान कर दिया है कि ‘PoK जल्द आजाद होगा’. इस बगावत के पीछे पिछले दिनों हुए उन आंदोलनों और प्रदर्शनों का बड़ा हाथ है, जहां 100 से ज्यादा लोगों ने अपनी जान की बाजी लगाकर पाकिस्तान के खिलाफ जीत का नया रास्ता तय कर दिया है. अगर PoK सचमुच पाकिस्तान की कैद से आजाद होता है तो इससे भारत को सीधे तौर पर 3 बड़े रणनीतिक फायदे मिल सकते हैं.

PoK के लोगों को आतंकवादी घोषित करना चाहता है पाकिस्तान

पीओके के लोग सड़कों पर आटा-बिजली और पानी जैसी बेसिक जरूरतों के लिए गोलियां खा रहे हैं. पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना ने इस जन-आंदोलन को दबाने के लिए इसे आतंकवादी गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय जनता ने झुकने से साफ इनकार कर दिया है.

16 सितंबर को पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दावा किया था कि PoK में एक्टिव अवामी एक्शन कमेटी का नाता अवैध हथियारों के नेटवर्क और उग्रवादी संगठनों से है. लेकिन उमर नजीर कश्मीरी ने सरकार के इस दावे को सिरे से नकार दिया. उन्होंने कहा कि उनका संगठन पूरी तरह से अहिंसक, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपने हक की लड़ाई लड़ रहा है.

कश्मीरी ने चुनौती दी कि अगर सरकार के पास कोई सबूत है, तो उसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में तमाशा बनाने के बजाय अदालत के सामने पेश करे. किसी एक व्यक्ति पर लगे आरोप के आधार पर पूरे जन-आंदोलन को आतंकवादी करार देना सरासर गलत है.

100 से ज्यादा शहादतों पर ‘शांति कमेटियों’ की चुप्पी पर सवाल

PoK में बीते महीनों से लगातार विरोध-प्रदर्शन और सुरक्षा बलों के साथ झड़पें हो रही हैं. जुलाई में हुए क्षेत्रीय चुनावों के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसक झड़पें हुईं, जिनमें आम नागरिकों और पुलिसकर्मियों की जान गई.

कश्मीरी ने साफ कहा कि आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले 100 से ज्यादा लोगों की शहादत को बेकार नहीं जाने दिया जाएगा. उन्होंने तथाकथित ‘शांति कमेटियों’ की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब आम नागरिकों पर गोलियां चलाई जा रही थीं, तब ये कमेटियां कहां थीं?

आतंकवाद-रोधी कानून के तहत बैन

जब पाकिस्तान सरकार आंदोलन को दबाने में नाकाम रही, तो उसने जून 2026 में Anti-Terrorism Act का सहारा लेकर JKJAAC को एक प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया. सरकार का कहना था कि ये संगठन सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा है. लेकिन बैन के बावजूद जनता का गुस्सा कम नहीं हुआ है और आंदोलनकारी अपनी मांग पर अड़े हुए हैं.

PoK का जमीनी सच: आखिर जनता क्यों नाराज है?

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की जनता दशकों से दोहरे मापदंडों और अन्याय का शिकार रही है. पाकिस्तान भले ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीरियों के हमदर्द होने का नाटक करे, लेकिन PoK की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है.

  • आर्थिक शोषण और बुनियादी सुविधाओं की कमी: PoK में बनने वाली पनबिजली से पूरा पाकिस्तान रोशन होता है, लेकिन वहां के स्थानीय लोगों को महंगी दर पर बिजली मिलती है और हफ्तों लोड-शेडिंग झेलनी पड़ती है. गेहूं और आटा जैसी बुनियादी चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं.
  • राजनीतिक आजादी का अभाव: कहने को PoK में अपनी सरकार और ‘आजाद कश्मीर’ का सेटअप है, लेकिन असल बागडोर इस्लामाबाद के नौकरशाहों और पाकिस्तानी सेना के जनरलों के हाथों में होती है. जो भी नेता या संगठन इस्लामाबाद के खिलाफ बोलता है, उसे देशद्रोही या उग्रवादी करार दे दिया जाता है.
  • जनसांख्यिकीय बदलाव: पाकिस्तानी सेना लंबे समय से PoK की डेमोग्राफी बदलने की कोशिश कर रही है. गैर-कश्मीरियों और सेना के सेवानिवृत्त अधिकारियों को वहां जमीनें दी जा रही हैं, जिससे स्थानीय कश्मीरियों में अपनी पहचान खोने का डर है.

‘PoK आजाद होगा’,  भारत के लिए इसके क्या मायने हैं और क्या होंगे 3 बड़े फायदे?

उमर नजीर कश्मीरी का ‘PoK आजाद होगा’ वाला बयान भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. भारत लंबे समय से साबित करता रहा है कि PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है. संसद का 1994 का संकल्प साफ तौर पर कहता है कि पूरे जम्मू, कश्मीर और लद्दाख का इलाका, जिसमें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान शामिल हैं वो भारत का अभिन्न अंग है. ऐसे में PoK की आजादी के रास्ते भारत को 3 बड़े फायदे मिल सकते हैं.

  1. पाकिस्तान के झूठे ‘कश्मीर नैरेटिव’ की हवा निकलेगी:  पाकिस्तान हमेशा से दुनिया के सामने खुद को ‘कश्मीरियों का हमदर्द’ और भारत को ‘उत्पीड़क’ के रूप में पेश करने की कोशिश करता आया है. लेकिन जब PoK की अपनी जनता ही पाकिस्तान के खिलाफ सड़कों पर है और ‘आजादी’ के नारे लगा रही है, तो पाकिस्तान के इस झूठे नैरेटिव का पूरी तरह पर्दाफाश हो जाता है. भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ये बात मजबूती से रख सकता है कि पाकिस्तान अपने कब्जे वाले इलाके के लोगों का ही सबसे बड़ा मानवाधिकार हनन कर रहा है.
  2. आतंकी ठिकानों का सफाया : पाकिस्तान लंबे समय से PoK की सरजमीं का इस्तेमाल भारत के खिलाफ लॉन्च पैड्स और आतंकी ट्रेनिंग कैंप चलाने के लिए करता रहा है. जब स्थानीय आबादी ही पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी ISI के खिलाफ खड़ी हो जाएगी, तो आतंकियों को वहां स्थानीय समर्थन मिलना पूरी तरह बंद हो जाएगा.
  3. CPEC पर शिकंजा : इसके अलावा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरता है. इस इलाके में अस्थिरता और जन-आंदोलन के कारण चीन और पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ेंगी, जिससे भारत की सामरिक स्थिति मजबूत होगी.

भारत के लिए ये वक्त किसी बड़े मौके से कम नहीं है. भारत दुनिया के सामने डंके की चोट पर कह सकता है कि पाकिस्तानी सेना PoK के लोगों पर किस तरह जुल्म ढा रही है. इस स्थिति से भारत को ये साबित करने का पूरा मौका मिल जाएगा कि पाकिस्तान एक ऐसा फेल देश है, जिसके कब्जे वाले लोग अब उसके साथ रहना ही नहीं चाहते और खुद उससे आजादी मांग रहे हैं.



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