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Kanpur Zoo : इंदौर से कानपुर चिड़ियाघर लाई गई शेरनी बिजली अपने एग्रेसिव स्वभाव और अच्छी ब्रीडिंग क्वालिटी के लिए जानी जाती है. यहां नए माहौल में ढलने के बाद उसकी शंकर के साथ जोड़ी बनाने की तैयारी है. चिड़ियाघर प्रशासन की निगरानी में उसकी देखभाल की जाएगी. लोकल 18 से कानपुर प्राणि उद्यान के जू रेंजर फिरोज खान बताते हैं कि बिजली का जन्म इंदौर चिड़ियाघर में हुआ था. अब उसे कानपुर चिड़ियाघर लाया गया है. वन्यजीवों को सीधे साथ रखने के बजाय उनके व्यवहार और प्रतिक्रिया को समझते हुए आगे की प्रक्रिया तय की जाती है. इससे दोनों की सुरक्षा और सहजता सुनिश्चित करने में मदद मिलती है.
कानपुर. इंदौर से कानपुर पहुंची बिजली (शेरनी) इन दिनों चिड़ियाघर की नई मेहमान है. करीब साढ़े तीन साल की बिजली अपने एग्रेसिव यानी आक्रामक स्वभाव और अच्छी ब्रीडिंग क्वालिटी के लिए खास मानी जा रही है. अब कानपुर चिड़ियाघर में उसके आने के बाद शंकर के साथ उसकी जोड़ी बनाने की तैयारी की जाएगी. हालांकि, इससे पहले बिजली को नए माहौल में ढालना और उसके व्यवहार को समझना जरूरी होगा. चिड़ियाघर प्रशासन की निगरानी में उसकी देखभाल की जाएगी. बिजली के आने से चिड़ियाघर में वन्यजीवों के आकर्षण के साथ-साथ प्रजनन कार्यक्रम को लेकर भी उम्मीदें बढ़ी हैं. लोकल 18 से कानपुर प्राणि उद्यान के जू रेंजर फिरोज खान बताते हैं कि बिजली का जन्म इंदौर चिड़ियाघर में हुआ था. अब उसे कानपुर चिड़ियाघर लाया गया है. करीब साढ़े तीन साल की उम्र में बिजली को नए वातावरण में ढलने के लिए समय दिया जाएगा. एक चिड़ियाघर से दूसरे चिड़ियाघर में आने पर वन्यजीव के खानपान, दिनचर्या और आसपास के माहौल में बदलाव होता है. ऐसे में शुरुआती दिनों में उसकी गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी होता है. बिजली के मामले में भी उसकी सहजता, खानपान और व्यवहार को ध्यान में रखकर देखभाल की जाएगी.
केवल सही उम्र का होना जरूरी नहीं
बिजली की खासियत उसका एग्रेसिव स्वभाव और अच्छी ब्रीडिंग क्वालिटी बताई जा रही है. वन्यजीवों की जोड़ी बनाने में केवल उनकी उम्र ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, स्वभाव और आपसी तालमेल भी जरूरी होता है. बिजली के स्वभाव को देखते हुए उसके नए वातावरण में सहज होने पर ध्यान देना होगा. अच्छी ब्रीडिंग क्वालिटी को वन्यजीवों के प्रजनन कार्यक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है. हालांकि, प्रजनन की सफलता कई परिस्थितियों पर निर्भर करती है और इसके बारे में अभी कोई निश्चित दावा नहीं किया जा सकता.
कितना लगेगा समय
बिजली के कानपुर पहुंचने के बाद अब शंकर के साथ उसकी जोड़ी को लेकर उत्सुकता है. दोनों को एक-दूसरे के अनुकूल बनाने के लिए विशेषज्ञों की निगरानी जरूरी होगी. वन्यजीवों को सीधे साथ रखने के बजाय उनके व्यवहार और प्रतिक्रिया को समझते हुए आगे की प्रक्रिया तय की जाती है. इससे दोनों की सुरक्षा और सहजता सुनिश्चित करने में मदद मिलती है. बिजली के नए माहौल में ढलने के बाद ही शंकर के साथ जोड़ी बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी. कानपुर चिड़ियाघर में आने वाले दर्शकों के लिए बिजली नया आकर्षण बन सकती है. वन्यजीवों के संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रमों के लिहाज से भी नए वन्यजीवों का आदान-प्रदान जरूरी होता है. फिलहाल बिजली को नए वातावरण में सहज बनाने और उसकी देखभाल पर ध्यान दिया जाएगा. अब देखना होगा कि वह कानपुर के माहौल में कितनी जल्दी ढलती है और शंकर के साथ उसकी जोड़ी बनाने की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है.