Cyclone Arnab Pictures। Cyclone Arnab landfall timing and track। अर्नब तूफान ने पकड़ी 180 की रफ्तार, 3 राज्‍यों में अलर्ट, स्‍कूल-दफ्तर बंद

Cyclone Arnab Pictures। Cyclone Arnab landfall timing and track। अर्नब तूफान ने पकड़ी 180 की रफ्तार, 3 राज्‍यों में अलर्ट, स्‍कूल-दफ्तर बंद


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अर्नब तूफान ने पकड़ी 180 की रफ्तार, 3 राज्‍यों में अलर्ट, स्‍कूल-दफ्तर बंद

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Cyclone Arnab landfall Timing: बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान अर्नब का खतरा लगातार गहराता जा रहा है. मौसम विभाग के अनुसार, यह भयंकर तूफान तेजी से पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है और रात दो से चार के बीच तटीय इलाकों से टकराएगा. इसके प्रभाव से आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड में भारी बारिश और तेज हवाएं चलने और तबाही चलने का अनुमान है. खतरे को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है, तटीय इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और दर्जनों ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है.

साइक्लोन अर्नब का तांडव: बंगाल की खाड़ी से उठा अर्नब अब एक बेहद खतरनाक और गंभीर चक्रवाती तूफान बन चुका है, जो आंध्र प्रदेश और ओडिशा के पूर्वी तटों पर तबाही मचाने के लिए बिल्कुल तैयार है. मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, यह तूफान पल-पल अपनी रफ्तार बढ़ा रहा है और अगले 24 घंटों में यह तटीय इलाकों से टकराने वाला है. ये 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंचने के करीब है. इसका खौफ इतना ज्यादा है कि प्रशासन ने समूचे तटीय बेल्ट में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है, ताकि किसी भी अनहोनी से तुरंत निपटा जा सके और जान-माल के भारी नुकसान को समय रहते रोका जा सके. (PTI)

लैंडफॉल और खतरनाक हवाएं: मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो यह तूफान आंध्र प्रदेश के बापटला और विशाखापत्तनम के बीच, यनम के पास तट को पूरी ताकत से पार करेगा. लैंडफॉल के वक्त हवा की रफ्तार 125 से 135 किमी प्रति घंटे होगी, जो बढ़कर 150 किमी प्रति घंटा तक भी पहुंच सकती है. इस सुपर-फास्ट और विनाशकारी हवा के आगे कच्चे मकान, बिजली के खंभे और पेड़ तिनके की तरह उड़ सकते हैं, इसलिए लोगों को पूरी तरह से घरों में कैद रहने और बाहर बिल्कुल न निकलने की सख्त हिदायत दी गई है. (PTI)

प्रशासनिक तैयारियां और शेल्टर: आंध्र प्रदेश और ओडिशा की सरकारों ने इस आपदा से निपटने के लिए कमर कस ली है और युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं. आंध्र प्रदेश में सुरक्षा के लिहाज से 20 जिलों में कुल 2,131 चक्रवात आश्रय स्थल (साइक्लोन शेल्टर) पूरी तरह तैयार किए गए हैं. इसके अलावा, ओडिशा में भी संवेदनशील इलाकों के लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए 135 स्थायी और लगभग 1,600 अस्थायी शेल्टर बनाए गए हैं, जहां खाने-पीने और रहने के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी को परेशानी न हो. (PTI)

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हाई-टेक वॉर्निंग और मोबाइल अलर्ट्स: इस बार प्रशासन ने टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए तबाही से पहले ही जनता को सचेत करने का मास्टरप्लान तैयार किया है. आंध्र प्रदेश के 18 जिलों में लगभग 2.70 करोड़ लोगों के मोबाइल फोन पर लगातार इमरजेंसी वार्निंग और चक्रवात संबंधी चेतावनी मैसेज भेजे जा रहे हैं. इतना ही नहीं, तटीय इलाकों में रहने वाले करीब 6.9 लाख लोगों को विशेष रूप से समुद्र की ऊंची उठती खतरनाक लहरों को लेकर सीधे टेक्स्ट और वॉयस अलर्ट्स भेजे जा रहे हैं. (PTI)

एनडीआरएफ और मेडिकल टीमें तैनात: किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए देश की सबसे बेहतरीन आपदा प्रबंधन टीमों को मैदान में उतार दिया गया है. प्रभावित होने वाले राज्यों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अग्निशमन सेवा की कुल 31 से ज्यादा टीमों को संवेदनशील पॉइंट्स पर तैनात किया गया है. इसके साथ ही, मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के लिए हजारों की संख्या में बेड, एंबुलेंस और करीब 1,087 मेडिकल टीमों को एक्टिव कर दिया गया है ताकि घायलों को तुरंत इलाज मिल सके.

रेलवे और ट्रांसपोर्ट पर ब्रेक: चक्रवात के इस भयंकर तांडव का असर सीधे तौर पर यातायात व्यवस्था पर पड़ा है, जिसके चलते रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है. सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पूर्व तट रेलवे और दक्षिण पूर्व रेलवे ने 27 से 30 अक्टूबर के बीच चलने वाली लगभग 58 से ज्यादा ट्रेनों को पूरी तरह रद्द कर दिया है. इसके अलावा कई लंबी दूरी की और पैसेंजर ट्रेनों के रूट बदले गए हैं या उनके समय में बदलाव किया गया है, ताकि यात्री किसी बड़े हादसे का शिकार होने से बच सकें. (PTI)

झारखंड और पश्चिम बंगाल में अलर्ट: इस चक्रवाती तूफान का दायरा सिर्फ आंध्र और ओडिशा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर झारखंड और पश्चिम बंगाल पर भी साफ दिखने लगा है. झारखंड के रांची समेत कई जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं के ऑरेंज अलर्ट के बाद बच्चों की सुरक्षा के लिए केजी से 12वीं तक के सभी स्कूलों को 28 और 29 अक्टूबर के लिए बंद कर दिया गया है. वहीं, पश्चिम बंगाल के तटीय जिलों में भी मूसलाधार बारिश और भयंकर हवाओं का दौर शुरू हो चुका है. (PTI)

पहाड़ों पर भूस्खलन का खतरा: मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस चक्रवात के असर से केवल मैदानी इलाके ही नहीं, बल्कि उत्तर बंगाल के पहाड़ी क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित होंगे. दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी जैसे टूरिस्ट जिलों में 29 और 30 अक्टूबर को भारी से अति भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है. लगातार होने वाली इस बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भयंकर भूस्खलन (लैंडस्लाइड) होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे रास्तों पर आवाजाही पूरी तरह ठप हो सकती है. (PTI)

समुद्र में उथल-पुथल और बैन: बंगाल की खाड़ी पूरी तरह उफान पर है और समंदर में 1 से 2 मीटर तक ऊंची और खतरनाक ज्वारीय लहरें उठने की आशंका जताई गई है. इसे देखते हुए मछुआरों के लिए समंदर में उतरने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है और सभी 30,000 से ज्यादा छोटी-बड़ी मछली पकड़ने वाली नौकाओं को सुरक्षित वापस तट पर बुला लिया गया है. पारादीप, धामरा और गोपालपुर जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर भी खतरे के निशान और चेतावनी के संकेत टांग दिए गए हैं ताकि कोई समंदर की तरफ न जाए. (PTI)

फर्जी खबरों पर लगाम और सोशल मीडिया वॉर्निंग: इस हाई-वोल्टेज सिचुएशन के बीच सोशल मीडिया पर कुछ लोग बिना किसी वैज्ञानिक पुष्टि के अपनी तरफ से फेक वीडियो और डरावने दावे फैला रहे हैं. इसे बहुत गंभीरता से लेते हुए ओडिशा के स्पेशल रिलीफ कमिश्नर (SRC) ने एक सख्त एडवाइजरी जारी की है. प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि वे सिर्फ और सिर्फ IMD और सरकार के आधिकारिक बुलेटिन पर ही भरोसा करें, और किसी भी तरह की अफवाह या अनवेरिफाइड पैनिक फैलाने वाली खबरों को सोशल मीडिया पर शेयर करने से पूरी तरह बचें. (PTI)

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