सोशल मीडिया पर अगर आपको कोई पीले रंग का 1000 रुपये का नोट दिखे और उसके साथ दावा किया जाए कि सरकार इसे दोबारा बाजार में उतारने वाली है, तो जरा ठहरिए. इस दावे पर भरोसा करने से पहले इसकी सच्चाई जान लेना जरूरी है. केंद्र सरकार की फैक्ट चेक एजेंसी ने 1000 रुपये के नए नोट को लेकर फैल रही चर्चाओं को फर्जी बताया है. एजेंसी ने साफ किया है कि रिजर्व बैंक ने ऐसा कोई ऐलान नहीं किया है.
2016 में बंद हुआ था 1,000 रुपये का नोट
भारत में 1,000 रुपये के नोट को लेकर चर्चा समझने के लिए आठ साल पीछे जाना होगा. 8 नवंबर 2016 को केंद्र सरकार ने नोटबंदी का ऐलान किया था. इसके तहत उस समय चलन में मौजूद 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को कानूनी मुद्रा के रूप में बंद कर दिया गया था.
उस समय सरकार ने काले धन, जाली नोटों और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने को इस फैसले की प्रमुख वजहों में शामिल किया था. नोटबंदी के बाद बाजार में 500 रुपये का नया नोट आया, लेकिन 1,000 रुपये का नोट दोबारा जारी नहीं किया गया.
फिर आया 2,000 रुपये का नोट, वह भी वापस हुआ
पुराने बड़े नोटों की जगह नकदी की जरूरतों को पूरा करने के लिए आरबीआई ने 2,000 रुपये का नोट जारी किया था. हालांकि, मई 2023 में केंद्रीय बैंक ने 2,000 रुपये के नोट को चलन से वापस लेने का फैसला किया. इसका मतलब यह नहीं था कि नोट तुरंत अपनी कानूनी वैधता खो चुका है. आरबीआई ने उस समय इसे वापस लेने की प्रक्रिया घोषित की थी.
अभी कौन-कौन से नोट चल रहे हैं?
आरबीआई की महात्मा गांधी (नई) सीरीज के तहत 10, 20, 50, 100, 200 और 500 रुपये के बैंकनोट चलन में हैं. ऐसे में 1,000 रुपये के नए नोट की वायरल तस्वीर को आधिकारिक घोषणा मान लेना सही नहीं होगा. अगर आपको भी इस तरह का कोई संदेश या तस्वीर मिले, तो आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट और सरकारी सूचना स्रोतों पर उसकी पुष्टि करें. संदिग्ध दावों को आगे भेजने से बचें. किसी नोट की तस्वीर वायरल होना और उसका वास्तव में जारी होना दो अलग-अलग बातें हैं. फिलहाल 1,000 रुपये के नए नोट को लेकर चल रही चर्चा के पीछे कोई आधिकारिक घोषणा नहीं है.