वैभव सूर्यवंशी ने खत्‍म क‍िया संजू सैमसन का कर‍ियर? ईशान के कमबैक के बाद नंबर-3 पर कौन संभालेगा मोर्चा

वैभव सूर्यवंशी ने खत्‍म क‍िया संजू सैमसन का कर‍ियर? ईशान के कमबैक के बाद नंबर-3 पर कौन संभालेगा मोर्चा


नई द‍िल्‍ली. क्रिकेट की दुनिया में कब कौन सा सितारा अपनी चमक से आसमान बदल दे, यह कोई नहीं जानता. मैदान पर उतरने वाली हर नई प्रतिभा पुराने दिग्गजों के सामने एक नया सवाल खड़ा कर देती है. कुछ ऐसा ही नजारा भारतीय टी20 टीम में देखने को मिला है. वैभव सूर्यवंशी ने पारी की शुरुआत करते हुए ऐसा कोहराम मचाया कि हर तरफ क्रिकेट गलियारों में हलचल तेज हो गई है. अभिषेक शर्मा के साथ उनकी रिकॉर्डतोड़ साझेदारी ने टीम इंडिया को तो धमाकेदार जीत दिलाई ही, साथ ही सोशल मीडिया और विशेषज्ञों के बीच एक बड़ा बहस का मुद्दा भी छोड़ दिया है, क्या वैभव की इस धमाकेदार सफलता ने संजू सैमसन के टी20 करियर पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है?

सीरीज के शुरुआती दौर में टीम मैनेजमेंट के फैसलों पर लगातार सवाल उठ रहे थे. जब वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) को दूसरे टी20 मुकाबले में नंबर तीन के पायदान पर बल्लेबाजी के लिए उतारा गया, तो वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए और मात्र 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गए. इस फैसले के बाद क्रिकेट पंडितों और फैंस ने टीम मैनेजमेंट की रणनीति की जमकर आलोचना की थी. आलोचकों का मानना था कि एक विस्फोटक ओपनर को उसकी स्वाभाविक लय से दूर मध्यक्रम या तीसरे नंबर पर भेजना उसके साथ नाइंसाफी है.

लेकिन कहते हैं कि एक महान खिलाड़ी वही है जो आलोचनाओं का जवाब अपने बल्ले से दे. तीसरे टी20 मैच से पहले एक बार फिर संशय की स्थिति बनी जब ईशान किशन (Ishan Kishan) चोट के कारण मुकाबले से बाहर हो गए. इसे मजबूरी या कहें कि एक सुनहरे अवसर ने वैभव सूर्यवंशी को उनके पसंदीदा स्थान यानी ओपनिंग पर वापसी का मौका दे दिया. और फिर जो हुआ, उसने इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया.

रिकॉर्डतोड़ शुरुआत और तूफानी पारी
तीसरे टी20 मैच में मैदान पर उतरते ही वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा (Abhishek Sharma) की जोड़ी ने विपक्षी गेंदबाजों के होश उड़ा दिए. दोनों ने मिलकर पहले विकेट के लिए महज 43 गेंदों पर ताबड़तोड़ 133 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी कर डाली. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में यह पहला मौका था जब टीम ने महज 5 ओवर के पावरप्ले के भीतर ही स्‍कोरबोर्ड पर 100 रन ठोक दिए थे, जो टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिहाज से एक अभूतपूर्व उपलब्धि है. वैभव ने इस छोटी लेकिन बेहद प्रभावशाली पारी में मात्र 19 गेंदों का सामना करते हुए 45 रनों की धमाकेदार पारी खेली. इस दौरान उनके बल्ले से 4 शानदार चौके और उतने ही यानी 4 गगनचुंबी छक्के निकले. उनकी इस बेखौफ बल्लेबाजी ने विपक्षी टीम के गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया. अभिषेक शर्मा के साथ उनकी जुगलबंदी ने यह साबित कर दिया कि मॉडर्न टी20 क्रिकेट में किस स्तर की आक्रामकता की जरूरत होती है.

ईशान की वापसी और संजू सैमसन का भविष्य
इस शानदार जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब ईशान किशन अपनी चोट से पूरी तरह उबरकर टीम में वापसी करेंगे, तो प्लेइंग इलेवन का समीकरण क्या होगा? चूंकि ईशान किशन विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं और वह इस समय बेजोड़ फॉर्म में हैं. वह पारी की शुरुआत करने के प्रबल दावेदार रहे हैं, ऐसे में उनका टीम में वापस आना तय है. दूसरी ओर, वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा ने जिस तरह से ओपनिंग में आकर विस्फोटक अंदाज दिखाया है और अपनी उपयोगिता साबित की है, उसे देखते हुए मौजूदा टीम मैनेजमेंट शायद ही इस सफल जोड़ी को तोड़ना चाहेगा. वैभव की आक्रामक शैली और कम उम्र में उनका यह निडर रवैया उन्हें भविष्य का बड़ा सितारा बना रहा है, जिसे नजरअंदाज करना चयनकर्ताओं के लिए आसान नहीं होगा.

यहीं से असली उलझन संजू सैमसन (Sanju Samson) के लिए शुरू होती है. संजू लंबे समय से भारतीय टीम के साथ जुड़े रहे हैं, लेकिन कभी निरंतरता की कमी तो कभी खराब किस्मत के चलते वह अपनी जगह को स्थाई नहीं बना पाए हैं. संजू मुख्य रूप से एक टॉप ऑर्डर या विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में खेलते हैं. यदि ईशान किशन ओपनर या विकेटकीपर के तौर पर लौटते हैं, और वैभव सूर्यवंशी अपनी जगह पक्की मानकर चल रहे हैं, तो संजू सैमसन के लिए प्लेइंग इलेवन में जगह पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा.

क्या संजू के लिए दरवाजे बंद हो गए हैं?
यह कहना जल्दबाजी होगी कि संजू सैमसन का करियर पूरी तरह खतरे में पड़ गया है, क्योंकि क्रिकेट में फॉर्म और अनुभव की अपनी एक अलग कीमत होती है. लेकिन इतना तय है कि वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ियों के आने से बेंच स्ट्रेंथ इतनी मजबूत हो गई है कि अब किसी भी खिलाड़ी के लिए खराब प्रदर्शन या चोट के बाद अपनी खोई हुई जगह वापस पाना आसान नहीं होगा. वैभव की इस आंधी ने टीम प्रबंधन को एक मीठी सिरदर्दी दे दी है. एक तरफ जहां युवा जोश भारत के उज्ज्वल भविष्य की गवाही दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ संजू सैमसन जैसे अनुभवी खिलाड़ी के लिए यह दौर आत्ममंथन और अपनी छाप छोड़ने का आखिरी मौका साबित हो सकता है.आने वाले मुकाबले तय करेंगे कि भारतीय टीम मैनेजमेंट अनुभव और युवा ऊर्जा के बीच किस तरह का संतुलन बैठाता है.



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