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Sultanpur News: देशभर में मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन हो चुका है, लेकिन सुल्तानपुर में अभी भी विसर्जन का सिलसिला जारी है. आइए जानते हैं सुल्तानपुर की ये अनोखी परंपरा, जहां विसर्जन का सिलसिला अब भी जारी है.
सुल्तानपुर: देशभर में मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन हो चुका है, लेकिन उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में अभी भी विसर्जन का सिलसिला जारी है. यहां मां दुर्गा की प्रतिमाओं को विदाई देने की परंपरा दूसरे शहरों से बिल्कुल अलग है. सुल्तानपुर में विसर्जन कुछ घंटों में पूरा नहीं होता, बल्कि 48 से 72 घंटे तक चलता है. इस दौरान पूरा शहर भक्तिमय माहौल में डूबा रहता है. ढोल-नगाड़ों की गूंज, जयकारों और भव्य शोभायात्रा के बीच भक्त मां दुर्गा को विदाई देते हैं. यही वजह है कि सुल्तानपुर की दुर्गा पूजा अपनी अनोखी परंपरा के लिए खास पहचान रखती है.
साल 1959 में शुरू हुई थी दुर्गा पूजा की परंपरा
केंद्रीय पूजा समिति के उपाध्यक्ष अनिल द्विवेदी ने लोकल 18 को बताया कि सुल्तानपुर में नवरात्रि का उत्सव 14 दिवसीय स्वरूप में मनाया जाता है. यहां दुर्गा पूजा की शुरुआत साल 1959 में हुई थी. उस समय भिखारी लाल सोनी ने ठठेरी बाजार में पहली बार मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की थी. धीरे-धीरे यह परंपरा पूरे शहर में फैलती गई और आज सुल्तानपुर की दुर्गा पूजा एक बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन का रूप ले चुकी है. यहां प्रतिमाओं की स्थापना से लेकर विसर्जन तक भक्तों में खास उत्साह देखने को मिलता है. सबसे खास बात यह है कि नवमी के सात से आठ दिन बाद विसर्जन की प्रक्रिया शुरू होती है.
48 से 72 घंटे तक चलता है विसर्जन का उत्सव
सुल्तानपुर में प्रतिमाओं का विसर्जन केवल धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि किसी बड़े उत्सव से कम नहीं होता. यहां शहर के अलग-अलग पूजा पंडालों की प्रतिमाओं को एक क्रम में सजाया जाता है. इसके बाद पूरे शहर में उनका भ्रमण कराया जाता है. केंद्रीय पूजा समिति के उपाध्यक्ष अनिल द्विवेदी के मुताबिक, इस दौरान सबसे पहले हनुमान जी की प्रतिमा, फिर मां काली और उसके बाद बड़ी दुर्गा मां समेत अन्य प्रतिमाएं शामिल होती हैं. प्रतिमाओं की यह कतार कई घंटों तक शहर की सड़कों से गुजरती है. भक्त नाचते-गाते और जयकारे लगाते हुए मां को विदाई देते हैं. यही लंबी विसर्जन परंपरा सुल्तानपुर को अलग पहचान दिलाती है.
विसर्जन के लिए तैनात रहती है भारी पुलिस फोर्स
सुल्तानपुर में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन का आयोजन बड़े स्तर पर किया जाता है. हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ और लंबी शोभायात्रा को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए जाते हैं. अनिल द्विवेदी के अनुसार, इस आयोजन में ड्यूटी निभाने के लिए पहले सुल्तानपुर में तैनात रह चुके कई डीएसपी, एडिशनल एसपी और एडीएम समेत बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी आते हैं.
पुलिस प्रशासन की निगरानी में विसर्जन की व्यवस्था संभाली जाती है. ढोल-नगाड़ों, भव्य शोभायात्राओं और भक्तों की अटूट आस्था के बीच मां दुर्गा को विदाई देने की यह परंपरा सुल्तानपुर की विरासत का अहम हिस्सा बन चुकी है. यही कारण है कि यहां दुर्गा पूजा का उत्साह विसर्जन के साथ ही अपने खास अंदाज में चरम पर पहुंचता है.