‘डोरी खत्म, खेल खत्म…’: ओवैसी पर कुछ नहीं बोलने वाले अखिलेश अब क्यों खोल रहे मुंह, क्या मुस्लिम वोट बैंक में लग गया सेंध?

‘डोरी खत्म, खेल खत्म…’: ओवैसी पर कुछ नहीं बोलने वाले अखिलेश अब क्यों खोल रहे मुंह, क्या मुस्लिम वोट बैंक में लग गया सेंध?


लखनऊ. यूपी चुनाव 2027 में मुस्लिम वोट बैंक को लेकर घमासान शुरू हो गया है. सपा और एआईएमआईएम के बीच मुस्लिम वोट बैंक को लेकर बवाल मचा हुआ है. एक तरफ जहां एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी लगातार पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक दौरे कर समाजवादी पार्टी के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की चूलें हिलाने में जुटे हैं, वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी ओवैसी के बयानों पर बेहद तीखा और तंज कसने वाला पलटवार करना शुरू कर दिया है. सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव का वह बयान तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने परोक्ष रूप से ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा था कि ‘डोरी खत्म, खेल खत्म…’. यह बयान राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बन गया है.

ओवैसी ने कुछ दिन पहले दांव चला था कि ‘गठबंधन कर लो, वरना बाद में रोना मत’ हाल ही में कैराना और मुरादाबाद के दौरों पर पहुंचे असदुद्दीन ओवैसी ने सपा और अखिलेश यादव पर खुलकर हमला बोला था. ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा था कि समाजवादी पार्टी को अब अपना नाम बदलकर ‘समाजवादी यादव परिवार’ रख लेना चाहिए, क्योंकि पार्टी सिर्फ एक परिवार और खास जाति के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है. उन्होंने बदायूं और फिरोजाबाद जैसी सीटों का हवाला देकर कहा कि जहां कभी मुस्लिम सांसद बनते थे, वहां अब सपा परिवार के लोग कब्जा जमाए बैठे हैं.

गठबंधन का ऑफर और चेतावनी

ओवैसी ने बीजेपी को रोकने के लिए सपा के सामने गठबंधन का प्रस्ताव रखा था और साथ ही चेतावनी दी थी कि अगर अब बात नहीं बनी, तो चुनाव परिणाम के बाद मत रोना. अब चुनाव नजदीक आते ही अखिलेश ने भी नाम लिए बगैर ओवैसी पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा, ‘डोरी खत्म, खेल खत्म…’ ओवैसी के इन तीखे हमलों और लगातार बढ़ते दौरों पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने अपने चिर-परिचित अंदाज में करारा जवाब दिया.

अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए ओवैसी पर बड़ा सियासी तंज कसते हुए कहा कि जनता सब जानती है कि किसकी ‘डोरी’ किसके हाथ में है और कौन पर्दे के पीछे से किसके इशारे पर काम कर रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘डोरी खत्म, खेल खत्म’ का बयान देकर अखिलेश ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए जो ‘रिमोट’ राजनीतिक दल मैदान में उतर रहे हैं, उनका खेल जनता 2027 में पूरी तरह समाप्त कर देगी.

मुस्लिम वोटों के बिखराव पर नजर

सपा का मानना है कि ओवैसी की पार्टी केवल कागजी बयानबाजी कर बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए ध्रुवीकरण का माहौल बनाती है, जबकि उत्तर प्रदेश का मुसलमान अब पूरी तरह समझ चुका है कि उसे बीजेपी को हराने के लिए केवल और केवल मजबूत विकल्प के साथ रहना है. समाजवादी पार्टी का पूरा चुनाव अभियान ‘PDA’ और मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण पर टिका है. यदि ओवैसी पश्चिम यूपी (मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर) और पूर्वांचल (आज़मगढ़, मऊ) की चुनिंदा सीटों पर भी 10 से 15 हजार वोट काटने में कामयाब हो गए, तो कड़े मुकाबले वाली सीटों पर सपा का गणित बिगड़ सकता है.

ध्रुवीकरण की धार तेज

ओवैसी के आने से जहां एक तरफ मुस्लिम नेतृत्व की नई बहस छिड़ गई है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी को भी ध्रुवीकरण की पिच पर खेलने का एक और मौका मिल जाता है. बीजेपी लगातार यह आरोप लगाती रही है कि सपा और ओवैसी के बीच एक अघोषित वैचारिक प्रतिस्पर्धा चल रही है.

कुलमिलाकर 2027 के रण से पहले ओवैसी की आक्रामक एंट्री और अखिलेश यादव के तीखे तेवर यह साफ बयां करते हैं कि इस बार का चुनाव सिर्फ बीजेपी बनाम सपा नहीं, बल्कि विपक्ष के भीतर नेतृत्व की सर्वोच्चता हासिल करने का भी एक कड़ा संघर्ष बन चुका है.



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