चारधाम यात्रा में 60 लाख से अधिक भक्तों ने टेका माथा, पर मौसम-भूस्खलन और रजिस्ट्रेशन ने बढ़ाईं मुश्किलें, जानें पूरा हाल

चारधाम यात्रा में 60 लाख से अधिक भक्तों ने टेका माथा, पर मौसम-भूस्खलन और रजिस्ट्रेशन ने बढ़ाईं मुश्किलें, जानें पूरा हाल


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Chardham Yatra: आस्था के दुर्गम पर्वतीय रास्तों पर इस साल भक्ति और भारी चुनौतियों का अनूठा संगम देखने को मिला. उत्तराखंड के चारों धामों और हेमकुंड साहिब में 60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने माथा टेककर आस्था की नई इबारत लिखी, लेकिन दूसरी ओर कुदरत के मिजाज और तकनीकी अड़चनों ने यात्रियों की राह में कड़े इम्तिहान भी खड़े किए. कहीं मूसलाधार बारिश और भूस्खलन से सड़कें बंद हुईं, तो कहीं सर्वर डाउन होने से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अटक गई.

Chardham Yatra: चारधाम यात्रा के दौरान इस बार श्रद्धालुओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. कहीं बारिश और रास्ते बंद होने से यात्रियों की मुश्किलें बढ़ीं, तो कहीं सर्वर डाउन होने के कारण रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाए. कई श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन की समस्या के चलते यात्रा शुरू नहीं कर सके, तो कुछ को रास्तों में परेशानी के कारण इंतज़ार करना पड़ा.

चारधाम और हेमकुंड साहिब में 60 लाख के पार पहुंचा आंकड़ा
लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान चार धाम विशेष अधिकारी प्रजापति नौटियाल ने बताया कि उत्तराखंड के चारधाम में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इस साल भी यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में बड़ी संख्या में भक्तों ने माथा टेका.

अभी तक चारधाम और हेमकुंड साहिब में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 60 लाख के पार पहुंच गई है. इनमें बदरीनाथ धाम में करीब 20.70 लाख और केदारनाथ धाम में करीब 17.65 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए. वहीं, यमुनोत्री में करीब 9.45 लाख और गंगोत्री में करीब 8.38 लाख श्रद्धालु पहुंचे.

भूस्खलन, बाधित उड़ानें और ऑनलाइन पंजीकरण में अड़चनें
चारधाम यात्रा के दौरान इस साल कई तरह की परेशानियां भी सामने आईं. सबसे बड़ी दिक्कतों में खराब मौसम, रास्ते बंद होना और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में परेशानी शामिल रही. बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में कई बार सड़कें प्रभावित हुईं, जिससे यात्रियों को रास्ते में रुकना पड़ा और धाम तक पहुंचने में देरी हुई. कुछ जगहों पर भूस्खलन के कारण भी आवाजाही प्रभावित हुई.

केदारनाथ धाम के पैदल मार्ग पर चीरबासा के पास पत्थर और मलबा गिरने से आवाजाही भी रोकनी पड़ी. खराब मौसम के चलते सितंबर में दो दिनों के लिए चारधाम यात्रा रोक दी गई थी. इस दौरान हेलीकॉप्टर सेवाएं भी प्रभावित हुईं. वहीं, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में अधिक लोगों के एक साथ रजिस्ट्रेशन करने के कारण वेबसाइट खुलने में देरी और रजिस्ट्रेशन पूरा करने में भी दिक्कत हुई.

दर्शन किए बिना लौटने को मजबूर हुए कई यात्री
इसका असर हजारों श्रद्धालुओं की यात्रा पर पड़ा. बारिश और भूस्खलन के कारण कई बार रास्ते बाधित हुए, जिसके कारण कई श्रद्धालु बिना दर्शन किए ही वापस चले गए. वहीं ऋषिकेश में रजिस्ट्रेशन की समस्या के चलते भी कई यात्रियों को इंतज़ार करना पड़ा. अनुमानित तौर पर हजारों श्रद्धालुओं की यात्रा प्रभावित हुई.



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