चंडीगढ़-बद्दी और कीरतपुर-बिलासपुर-बैरी रेललाइन के लिए 2122 करोड़ नहीं देगी सुक्खू सरकार, मोदी सरकार को पत्र भेजकर बताई वजहें

चंडीगढ़-बद्दी और कीरतपुर-बिलासपुर-बैरी रेललाइन के लिए 2122 करोड़ नहीं देगी सुक्खू सरकार, मोदी सरकार को पत्र भेजकर बताई वजहें


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Himachal Baddi Chandigarh and Bilaspur Beri Rail line Projects: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने खराब आर्थिक हालात का हवाला देते हुए चंडीगढ़-बद्दी और कीरतपुर-बिलासपुर-बैरी रेललाइन परियोजनाओं के लिए पैसा देने से इनकार कर दिया है. सरकार ने केंद्र से इन्हें राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट घोषित करने की मांग की है.

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हिमाचल में निर्माणाधीन बिलासपुर बेरी रेललाइन.

शिमला. हिमाचल प्रदेश में सुक्खू सरकार ने चंडीगढ़-बद्दी और कीरतपुर-बिलासपुर-बैरी रेललाइन के निर्माण के लिए पैसा देने से इंकार कर दिया है. सरकार की तरफ से केंद्र सरकार को इस संबंध में एक पत्र भी लिखा गया है और कारण के साथ यह बताया कि है कि सरकार क्योंकि इन दोनों परियोजनाओं के लिए 2122 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी नहीं दे सकती है. सरकार ने केंद्र से अपील की है कि इन कीरतपुर-बिलासपुर-बैरी रेललाइन को राष्ट्रीय परियोजना लाया जाएगा.

जानकारी के अनुसार, हाल ही में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा अपने घर बिलासपुर के दौरे पर आए थे तो उन्होंने सुक्खू सरकार पर पैसा ना देने को लेकर सवाल उठाए थे. ऐसे में अब सरकार ने पत्र लिखकर कहा है कि चंडीगढ़-बद्दी रेललाइन का लाभ हिमाचल प्रदेश को अधिक नहीं होगा और इसका अधिक फायदा चंडीगढ़ को मिलेगा और इस कारण हिमाचल पैसा नहीं देगा.

बताया जा रहा है कि दोनों रेल लाइन पर 2122 करोड़ रुपये हिमाचल को देना है. सरकार का तर्क है कि दोनों परियोजनाओं की शुरुआती लागत काफी कम थी, लेकिन अब सुरंग निर्माण और भूमि अधिग्रहण में देरी की वजह से लागत बढ़ गई है और सरकार के पास इतना पैसा भी नहीं है. क्योंकि प्रदेश के आर्थिक हालात खराब हैं.

  • हिमाचल सरकार ने केंद्रीय रेल मंत्रालय को लिखा है कि हिमाचल पर 1.04 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज और पुरानी देनदारियों का बोझ है. ऐसे में अब परियोजनाओं में 25 प्रतिशत या 50 प्रतिशत पैसा देने से हमारा बजट बिगड़ जाएगा.
  • सरकार ने तर्क दिया कि चंडीगढ़-बद्दी लाइन में अधिकांश ट्रैक का निर्माण पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में होगा और इसका पैसा हिमाचल भी देगा, जो कि सही नहीं है. इसे अब पहाड़ी राज्यों की तर्ज पर 90:10 के अनुपात के साथ तय किया जाएगा.
  • चंडीगढ़-बद्दी लाइन में 31 किमी ट्रैक में से हिमाचल में सिर्फ 3 किमी लाइन बनेगी. इस ट्रेक में 28 किमी की सबसे अधिक हिस्सेदारी पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में बनेगी.

हिमाचल को कितना पैसा देना है

चंडीगढ़-बद्दी रेल लाइन परियोजना पर 1540 करोड़ रुपये खर्च होने हैं. इसमें फरवरी 2026 तक इस परियोजना पर 1,068.88 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. इसमें 534 करोड़ रुपये हिमाचल को देने थे, लेकिन अब तक 348 करोड़ रुपये हिमाचल ने दिए हैं और 186 करोड़ का बकाया बाकी है. वहीं, पंजाब के रूप नगर से बनने वाली बिलासपुर बैरी परियोजना को लेकर हिमाचल को 25 फीसदी खर्च देना है. 7,729 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट है. इसमें 63 किमी रेललाइन का निर्माण होना है. इसमें निर्माण पर 6753 करोड़ और जमीन अधिग्रहण पर1617 करोड़ खर्च होने हैं.

बताया जा रहा है कि दोनों रेल लाइन पर 2122 करोड़ रुपये हिमाचल को देना है.

अब तक हिमाचल ने 140 हेक्टेयर जमीन में से 82 हेक्टेयर जमीन ही रेलवे को दी है.बिलासपुर से बेरी तक जमीन नहीं दी गई है.ऐसे में करीब 2781 करोड़ की हिस्सेदारी हिमाचल की ओर से वहन की जानी है. लेकिन हिमाचल ने अब तक  847 करोड़ रुपये ही दिए हैं और 1,934 का बकाया बाकी है.

हम विकास के विरोधी नहींः सीएम

सीएम सुक्खू ने कहा कि हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन जिस चंडीगढ़-बद्दी लाइन का 90 प्रतिशत हिस्सा दूसरे राज्यों में है, उसका आधा खर्च हिमाचल की जनता के टैक्स से क्यों दिया जाए?  केंद्र सरकार को इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर पूरा खर्च वहन करे.  उधऱ, पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्तमान सरकार विकास विरोधी है. मोदी सरकार ने हिमाचल के रेल बजट में वृद्धि की और इन दोनों प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी. पूर्व भाजपा सरकार ने इसके लिए जमीन अधिग्रहण और वित्तीय बजट सुनिश्चित किया था. यदि बद्दी रेललाइन रुकी, तो बीबीएन से उद्योग पलायन करेंगे औऱ हिमाचल में युवाओं में बेरोजगारी बढ़ेगी.



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