संयुक्त राष्ट्र के मंच पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 4F का जिक्र छेड़ते हुए एक बार फिर UN में बदलाव की मांग की. एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया के एक बड़े हिस्से को फैसले लेने की प्रक्रिया से बाहर नहीं रख सकते. उन्होंने कहा कि 4F की वजह से अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए जो जोखिम पैदा हो रहे हैं उन्हें सुधारने की जरूरत है.
भारत लगातार यूएन में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है. भारत का तर्क है कि यूएन की वर्तमान व्यवस्था 1945 पर आधारित है. 80 साल से भू राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी है. अब यूएन में दुनिया के वास्तविक ढांचे को दिखाना जरूरी है. भारत का कहना है कि इसीलिए यूएन में अस्थायी और स्थायी सदस्यों की संख्या में बढ़ोतरी होनी चाहिए, ताकि ग्लोबल साउथ देशों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके. जयशंकर ने F4 का जिक्र करते हुए यही मांग उठाई है.
क्या है F4 संकट ?
दरअसल जयशंकर जिस 4F की बात कर रहे थे वह असल में फाइनेंस, फ्यूल, फूड और फर्टिलाइजर से जुड़ा है. उन्होंने कहा कि ग्लोबल नॉर्थ को यह समझना होगा कि किन समस्याओं का समाधान निकालने में समान हित जुड़े हैं. जयशंकर ने कहा कि हम एक अपूर्ण दुनिया में रहते हैं, लेकिन हम सभी लगातार इसे बेहतर बनाने के प्रयास में है. जयशंकर ने ये भी कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच जो जंग चल रही है उसकी कीमत वे देश चुका रहे हैं जिनकी फैसले लेने की प्रक्रिया बहुत धीमी है.
1- फायनेंस
विकासदेश देशों में सड़क, अस्पताल, शिक्षा ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बड़े निवेश की जरूरत है, लेकिन कर्ज महंगा होने और ऊंची बयान दरों होने की वजह से वित्तीय संसाधन विकास की रफ्तार धीमी कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र की 2026 की रिपोर्ट ने भी विकास के लिए फाइनेंस जुटाने में आ रही मुश्किलों का जिक्र अपनी रिपोर्ट में किया है.
2- फ्यूल
भारत समेत सभी विकासशील देश कच्चे तेल और गैस आयात पर ही निर्भर हैं. यूएन सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के मुताबिक युद्ध, प्रतिबंध या समुद्री व्यापार मार्गों में रुकावट से ईंधन महंगा हो सकता है. इसका असर परिवहन, बिजली, उद्योग और आम लोगों पर पड़ता है.
3- फूड
दुनिया भर में चल रहे युद्धों की वजह से अनाज की आपूर्ति में बाधा होती है. इससे खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती है. इससे उन परिवारों पर सबसे बड़ा संकट आता है जो गरीब हैं और अपनी आय का सबसे ज्यादा खर्च भोजन पर करते हैं.
4- फर्टिलाइजर
खेती में सबसे ज्यादा जरूरी फर्टिलाइजर है. दुनिया में कहीं भी युद्ध हो, उसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पड़ता है. उर्वरक महंगे हो जाते हैं या उपलब्धता कम होने की वजह से किसानों की लागत बढ़ जाती है. फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है. आखिरकार इसका असर खाद्य की कीमतों पर पड़ता है.
भारत संयुक्त राष्ट्र में क्या बदलाव चाहता है?
भारत लगातार यूएन में विकासशील देशों की भागीदारी की वकालत करता रहा है, ताकि संयुक्त राष्ट्र के फैसले लेने की प्रक्रिया में सुधार हो. भारत लगातार यूएन से फैसले की ऐसी प्रक्रिया की मांग कर रहा है जो पारदर्शी हो. इसके अलावा वह संयुक्त राष्ट्र की सक्रिय भूमिका की मांग भी करता रहा है. खासतौर ये युद्ध, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा संकट और वित्तीय समस्याओं को लेकर. भारत का तर्क है कि यूएन को सिर्फ चिंता जताने तक सीमित न रहकर समाधान की तरफ बढ़ना चाहिए. 25 अक्टूबर को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ने एक बार फिर यही बात जोरदार तरीके से उठाई और कहा कि यूएन को मूकदर्शक बने रहने से आगे बढ़ना होगा.