कुत्तों-बिल्लियों को बंकर में छिपाने को मजबूर लोग, स्विट्जरलैंड में पटाखों पर लग सकता बैन; 29 नवंबर को वोटिंग

कुत्तों-बिल्लियों को बंकर में छिपाने को मजबूर लोग, स्विट्जरलैंड में पटाखों पर लग सकता बैन; 29 नवंबर को वोटिंग


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कुत्तों-बिल्लियों को बंकर में छिपाने को मजबूर, स्विट्जरलैंड में पटाखों पर बैन?

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Firecrackers Ban: स्विट्जरलैंड में तेज आवाज वाले पटाखों पर देशव्यापी पाबंदी लगाने को लेकर 29 नवंबर को जनमत संग्रह होने जा रहा है. पशु कल्याण संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों की पहल पर यह वोटिंग कराई जा रही है. हालिया सर्वे में 69 फीसदी नागरिकों ने इस प्रतिबंध का समर्थन किया है. यदि यह प्रस्ताव पास हुआ तो निजी स्तर पर शोर वाले पटाखों की बिक्री पर पूरी तरह रोक लग जाएगी.

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स्विट्जरलैंड में तेज आवाज वाले पटाखों पर लग सकता है बैन, 29 नवंबर को वोटिंग. (AI Generated Image)

बर्न: स्विट्जरलैंड में आतिशबाजी के तेज धमाकों को हमेशा के लिए शांत करने की तैयारी शुरू हो गई है. देश के नागरिक आगामी 29 नवंबर को एक अहम जनमत संग्रह में मतदान करेंगे. इस वोटिंग के जरिए यह तय होगा कि देश में तेज आवाज वाले पटाखों पर पूरी तरह पाबंदी लगाई जाए या नहीं. यह नागरिक पहल पशु कल्याण संस्थाओं और पर्यावरण संगठनों के भारी दबाव के बाद शुरू हुई है. आतिशबाजी के दौरान होने वाले धमाकों से पालतू और जंगली जानवर भारी मानसिक तनाव और खौफ में आ जाते हैं. स्विस ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन के हालिया सर्वे के अनुसार देश के 69 फीसदी मतदाता इस प्रतिबंध के पक्ष में हैं. महिलाओं और युवाओं के बीच इस प्रस्ताव को बहुत ज्यादा समर्थन मिल रहा है. यदि जनता ने इसके पक्ष में मुहर लगा दी, तो स्विट्जरलैंड अपने पूरे इलाके में पटाखों के शोर को प्रतिबंधित करने वाला बड़ा यूरोपीय देश बन जाएगा.

जानवरों के लिए पटाखों की तेज आवाज किसी जानलेवा सदमे से कम नहीं होती है. स्विस एनिमल प्रोटेक्शन संस्था का कहना है कि आतिशबाजी जानवरों के लिए कोई उत्सव नहीं बल्कि भयानक तनाव का कारण बनती है. संगठन ने कहा, ‘पटाखों की अचानक होने वाली तेज आवाज जानवरों में भारी डर और घबराहट पैदा कर देती है.’ इसके कारण जानवर बेतहाशा भागने लगते हैं और कई बार गंभीर रूप से घायल होकर दम तोड़ देते हैं.

स्विट्जरलैंड की प्रसिद्ध पशु चिकित्सक मारुश्का ब्लेजर ने बताया कि जानवरों की सुनने की क्षमता इंसानों से कहीं ज्यादा संवेदनशील होती है. तेज धमाके सुनकर घोड़े बेकाबू होकर सड़कों पर दौड़ पड़ते हैं, जिससे भीड़ और दूसरे मवेशियों के लिए भारी खतरा पैदा हो जाता है. कई परिवार आतिशबाजी की रात अपने कुत्तों और बिल्लियों को बंकरों में छिपाने के लिए मजबूर हो जाते हैं.

29 नवंबर को होने वाले जनमत संग्रह में जनता के सामने क्या विकल्प?

स्विट्जरलैंड की प्रत्यक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता खुद कानून बनाने के लिए पहल कर सकती है. किसी भी कानून के प्रस्ताव को वोटिंग तक पहुंचाने के लिए एक लाख वैध हस्ताक्षरों की जरूरत होती है. इस प्रस्ताव के समर्थन में आयोजकों ने साल 2023 में 1 लाख 37 हजार से अधिक नागरिकों के हस्ताक्षर जुटाए थे. संसद में इसके खिलाफ लाया गया जवाबी प्रस्ताव इस साल गर्मियों में खारिज हो गया था.

इसके बाद अब 29 नवंबर की तारीख को देशव्यापी जनमत संग्रह के लिए तय किया गया है. स्विस एनिमल प्रोटेक्शन की बर्न शाखा के अध्यक्ष कासिमिर वॉन अर्क ने कहा, ‘स्विट्जरलैंड में लाखों पालतू जानवर रहते हैं और आतिशबाजी उनके लिए भारी दहशत पैदा करती है.’ उन्होंने जोर देकर कहा कि एक सभ्य समाज के तौर पर हमें एक दूसरे और बेजुबानों का ख्याल रखना होगा.

क्या स्विट्जरलैंड में सभी तरह की आतिशबाजी पर रोक लग जाएगी?

पटाखों के जहरीले धुएं और बारूदी कणों से पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंच रहा है?

पटाखों के फूटने से न केवल कानफोड़ू शोर होता है बल्कि हवा में बहुत महीन और जहरीले कण भी घुल जाते हैं. बारूद और रंगों को चमकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले विषैले रसायन पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाते हैं. स्विस फेडरल ऑफिस ऑफ पुलिस के मुताबिक स्विट्जरलैंड में हर साल 1000 से 2000 टन पटाखे जलाए जाते हैं. इससे देश की आबोहवा में सालाना 200 से 400 टन पार्टिकुलेट मैटर उत्सर्जित होता है.

पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार यह पूरे देश के वार्षिक प्रदूषण का दो से तीन प्रतिशत हिस्सा बनता है. यह जहरीला धुआं हवा के साथ-साथ मिट्टी और भूजल को भी प्रदूषित करता है. सांस की बीमारी से जूझ रहे बुजुर्गों और बच्चों के फेफड़ों पर इसका सीधा बुरा असर पड़ता है. इसके अलावा सूखे मौसम में आतिशबाजी के कारण जंगलों में भीषण आग लगने का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है.

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