अंबिकापुर में नो एंट्री बोर्ड बना मजाक? छोटे साइज की वजह से नहीं दिखता, GPS के सहारे शहर पहुंच रहे ट्रक

अंबिकापुर में नो एंट्री बोर्ड बना मजाक? छोटे साइज की वजह से नहीं दिखता, GPS के सहारे शहर पहुंच रहे ट्रक


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Surguja News: अंबिकापुर के गांधी चौक पर नो एंट्री का बोर्ड लगा होने के बावजूद बाहर से आने वाले ट्रक और बस चालक GPS के भरोसे शहर में घुस जाते हैं, जहां भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है. स्थानीय लोगों के अनुसार GPS और मैप में नेशनल हाईवे-43 का पुराना रास्ता, जो शहर के बीच से गुजरता है, अब भी दिख रहा है. इस वजह से चालकों पर 2500 से 3000 रुपये तक का चालान कट जाता है.

छत्तीसगढ़ का सरगुजा संभाग का सबसे बड़ा शहर अंबिकापुर और शहर के बीचों-बीच से होकर गुजरती हैं. नेशनल हाइवे 43 बावजूद हो जाती हैं और भारी वाहन की चलाना कर्रवाई क्यों. दरअसल, अगर आप किसी बड़े शहर से पहली दफा अंबिकापुर आते हैं, तो आपको सबसे पहले गांधी चौक मिलेगा, जहां दाएं-बाए दोनों तरफ रास्ता है. लेकिन जीपीएस में भी पुराने समय से शहर से होकर गुजरती हैं. NH43 की सड़क ऐसे में भारी भीड़ को देखते हुए चौहरे पर नो एंट्री का बोर्ड यातायात पुलिस लगा दी है और सुरक्षा के जवानों की भी तैनाती रहती हैं. लेकिन विडम्ना कि ये बोर्ड छोटा लगा है, जिससे ड्राइवर को पता नहीं चलता है वो अपने जीपीएस के माध्यम से सीधे शहर में घुस जाता हैं और फिर 2500 से 3000 हजार तक का जुर्माना पटाना पड़ता है. दूसरी और रास्ते को डाइवर्ट तो किया गया है. लेकिन फिर भी जीपीएस के सहारे ये गलती हो जाती हैं, देखिए ये रिपोर्ट…

GPS दिखा रहा पुराना रास्ता, चालक हो रहे परेशान
स्थानीय निवासी सुशील कुमार ने लोकल 18 को बताया कि अंबिकापुर के गांधी चौक को शहर का हृदय स्थल माना जाता है. नेशनल हाईवे-43 यानी कटनी से गुमला जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग शहर के बीच से होकर गुजरता है. पुराने मार्ग के GPS और मैप में दिखाई देने के कारण बाहर से आने वाले ट्रक और बस चालक कई बार इसी रास्ते पर पहुंच जाते हैं. जबकि शहर में भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है. ऐसे में यातायात विभाग की ओर से चालानी कार्रवाई की जाती है और वाहन चालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.

छोटा नो एंट्री बोर्ड, बाहर से आने वालों को नहीं मिलती जानकारी
सुशील कुमार का कहना है कि गांधी चौक के पास नो एंट्री का बोर्ड लगाया गया है, लेकिन उसका आकार छोटा होने के कारण दूर से आने वाले वाहन चालकों की नजर उस पर नहीं पड़ पाती. GPS में राष्ट्रीय राजमार्ग का रास्ता देखकर चालक शहर की ओर मुड़ जाते हैं.उनका सुझाव है कि यातायात विभाग को प्रमुख प्रवेश मार्गों पर बड़े और स्पष्ट दिशा-निर्देश वाले बोर्ड लगाने चाहिए, ताकि भारी वाहन चालक समय रहते वैकल्पिक रास्ता चुन सकें और अनावश्यक चालानी कार्रवाई से बच सकें.

रिंग रोड से गुजरते हैं भारी वाहन
भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग के संबंध में सुशील कुमार ने बताया कि अंबिकापुर की रिंग रोड से ट्रक, बस और अन्य भारी वाहनों को निकाला जाता है. शहर के भीतर सुबह 10 बजे के बाद से शाम 7 से 8 बजे तक काफी भीड़ रहती है. ऐसे में भारी वाहनों के प्रवेश से यातायात बाधित होने और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है. इसी वजह से भारी वाहनों को शहर के भीतर जाने से रोककर वैकल्पिक मार्ग से गुजरने की व्यवस्था की गई है. हालांकि, GPS में पुराने रास्ते का दिखाई देना चालकों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है.

मैप देखकर आते हैं चालक, फिर भरना पड़ता है जुर्माना
स्थानीय निवासी आकाश ने लोकल 18 को बताया कि अंबिकापुर सरगुजा संभाग का प्रमुख शहर है और यहां के कई मुख्य मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े हुए हैं. दूरदराज से आने वाले ट्रक चालक आजकल मैप के सहारे सफर करते हैं. उन्हें लगता है कि GPS में दिखाया गया रास्ता राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा है. इसलिए वे उसी दिशा में आगे बढ़ जाते हैं. गांधी चौक के पास नो एंट्री का बोर्ड होने के बावजूद कई चालक शहर के भीतर पहुंच जाते हैं, जिसके बाद यातायात नियमों के उल्लंघन पर उन्हें भारी जुर्माना भरना पड़ता है.

बड़े बोर्ड लगाने की मांग, वैकल्पिक रास्ते की स्पष्ट जानकारी जरूरी
आकाश के मुताबिक, यातायात विभाग के जवान वाहन चालकों को समझाइश देते हैं और चालानी कार्रवाई के बाद उन्हें रिंग रोड से जाने के लिए कहा जाता है. उनका कहना है कि जब तक भारी वाहनों के लिए रिंग रोड की व्यवस्था पूरी तरह सुगम नहीं हो जाती, तब तक प्रमुख मार्गों पर साफ संकेत और बड़े नो एंट्री बोर्ड लगाए जाने चाहिए. इससे बाहर से आने वाले चालकों को सही दिशा मिल सकेगी और शहर के भीतर भारी वाहनों की आवाजाही पर भी प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा.



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