OPINION: ब्राजील में लूला की वापसी भारत के ल‍िए खुशखबरी क्‍यों? रेयर अर्थ म‍िनरल्‍स और अरबों डॉलर का वो खेल, चीन का एंगल

OPINION: ब्राजील में लूला की वापसी भारत के ल‍िए खुशखबरी क्‍यों? रेयर अर्थ म‍िनरल्‍स और अरबों डॉलर का वो खेल, चीन का एंगल


ब्राजील में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है. वह चौथी बार देश के राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं. लूला को 51.8% वोट मिले, जबकि उनके विरोधी फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.2% वोट मिले. पहली नजर में यह ब्राजील की घरेलू राजनीति का मामला लगता है, लेकिन लूला की जीत भारत के ल‍िए खुशखबरी कही जा रही है. वजह, लूला दोनों देशों के ट्रेड के समर्थक रहे हैं. मोबाइल-इलेक्ट्रॉनिक्स में काम आने वाले रेयर अर्थ म‍िन‍रल्‍स का भंडार भारत को सौंपने का वादा कर चुके हैं और सबसे बड़ी बात, ट्रंप के टैर‍िफ के सामने वो भारत की तरह ही सीना ठोंककर खड़े रहे हैं.

भारत के लिए उनकी जीत का सबसे बड़ा मतलब है कि ब्राजील के साथ रिश्तों में अचानक कोई बड़ा बदलाव होने का खतरा कम हो गया है. लेकिन 4 बातें ऐसी हैं, जो भारत के ल‍िए राहतभरी हो सकती हैं.

1. चीन से रेयर अर्थ म‍िनरल्‍स लेने की मजबूरी नहीं होगी

आज मोबाइल फोन से लेकर इलेक्ट्रिक गाड़ियों, पवन चक्कियों और कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने में खास किस्म के खनिजों की जरूरत पड़ती है. इन्हें दुर्लभ मृदा तत्व यानी रेयर अर्थ कहा जाता है. इनकी सप्लाई पर चीन का बड़ा दबदबा है. अगर चीन से सप्लाई में रुकावट आती है, तो भारत की फैक्ट्रियों और नई तकनीक से जुड़े कारोबार पर असर पड़ सकता है. ब्राजील के पास दुनिया के बड़े रेयर अर्थ भंडार हैं. लूला की सरकार के साथ भारत खनिजों की खोज, खनन और सप्लाई बढ़ाने पर काम आगे बढ़ा सकता है. इससे लंबे समय में भारत को चीन के अलावा दूसरा भरोसेमंद विकल्प मिल सकता है.

2. भारत और ब्राजील के बीच 30 अरब डॉलर का कारोबार

भारत और ब्राजील के बीच कारोबार पहले ही 15 अरब डॉलर से ज्यादा पहुंच चुका है. वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, फाइनेंश‍ियल इयर 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 15.07 अरब डॉलर रहा. फरवरी 2026 में लूला भारत आए थे. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत में दोनों देशों ने कारोबार को अगले पांच साल में 20 अरब डॉलर से काफी आगे ले जाने की बात कही. लूला ने 30 अरब डॉलर का लक्ष्य रखने की इच्छा जताई. भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देशों के नेताओं के बीच 2030 तक कारोबार को कम से कम दोगुना करके 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने पर भी चर्चा हुई.जब दो देशों के बीच व्यापार बढ़ता है, तो सामान बनाने वाली कंपनियों, निर्यातकों और माल ढुलाई से जुड़े कारोबार के लिए नए मौके बन सकते हैं. इससे निवेश और रोजगार की संभावनाएं भी पैदा हो सकती हैं.

3. भारत को खेती और उद्योग, दोनों में मिल सकते हैं मौके

ब्राजील खेती के बड़े उत्पादकों में शामिल है. भारत और ब्राजील के बीच कृषि उत्पादों और उनसे जुड़े कारोबार में सहयोग बढ़ने की गुंजाइश है. भारत को अपनी जरूरत के मुताबिक आयात के विकल्प मिल सकते हैं, जबकि भारतीय कंपनियों को ब्राजील में कारोबार के मौके मिल सकते हैं.

इसके अलावा, दोनों देश खनन, इस्पात बनाने की सप्लाई चेन, स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक और छोटे कारोबार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए थे. फरवरी में लूला की भारत यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण खनिजों और रेयर अर्थ से जुड़ा समझौता भी हुआ था.

अगर इन समझौतों पर जमीन पर काम होता है, तो भारतीय कंपनियों को कच्चा माल जुटाने, नई तकनीक अपनाने और दूसरे बाजारों में पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है. लेकिन समझौतों से अपने-आप कारोबार शुरू नहीं हो जाता. इसके लिए निवेश, सरकारी मंजूरी और कंपनियों की भागीदारी जरूरी होगी.

4. अमेरिका के टैरिफ के बीच भारत को क्यों है ब्राजील की जरूरत?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति ने कई देशों के सामने मुश्किलें खड़ी की हैं. टैरिफ यानी दूसरे देश से आने वाले सामान पर लगाया जाने वाला शुल्क बढ़ने से निर्यात महंगा हो सकता है. इससे कंपनियों के मुनाफे और कारोबार पर असर पड़ता है.  भारत भी अमेरिका के साथ व्यापार समझौते और टैरिफ को लेकर बातचीत करता रहा है. ऐसे समय में ब्राजील जैसे बड़े देश के साथ मजबूत संबंध भारत को व्यापार के दूसरे रास्ते तलाशने में मदद कर सकते हैं.

लूला ब्रिक्स के बड़े समर्थक हैं. ब्रिक्स में भारत, ब्राजील, चीन, रूस और दक्षिण अफ्रीका समेत कई देश शामिल हैं. इस समूह में भारत के लिए ऐसे देशों के साथ बातचीत करने का मंच है, जिनके साथ वह व्यापार, निवेश और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाना चाहता है. लूला के विरोधी फ्लावियो बोल्सोनारो ने कहा था कि राष्ट्रपति बनने पर वह ब्रिक्स में ब्राजील की सदस्यता की समीक्षा करेंगे. उनकी हार से फिलहाल इस दिशा में अचानक बदलाव का जोखिम कम हुआ है.

हालांकि, भारत ब्रिक्स को अमेरिका के खिलाफ खड़े गुट के रूप में नहीं देखना चाहता. भारत की कोशिश है कि अमेरिका, रूस, चीन और दूसरे देशों के साथ अपने हितों के मुताबिक संबंध बनाए रखे. इसलिए ब्राजील में लूला की जीत भारत को एक अतिरिक्त विकल्प देती है, लेकिन इससे अमेरिका के साथ भारत के मतभेद अपने-आप खत्म नहीं होंगे.



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