Mount Abu Shiv Temple: 9.5 फीट ऊंचा और 27 टन वजनी शिवलिंग, मानसून में अपने आप होता है जलाभिषेक

Mount Abu Shiv Temple: 9.5 फीट ऊंचा और 27 टन वजनी शिवलिंग, मानसून में अपने आप होता है जलाभिषेक


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9.5 फीट ऊंचा और 27 टन वजनी शिवलिंग, मानसून में अपने आप होता है जलाभिषेक

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Mount Abu Unique Temple : माउंट आबू का प्रसिद्ध शंकर मठ अपनी अनोखी बनावट, प्राकृतिक सुंदरता और 27 टन वजनी विशाल शिवलिंग के लिए जाना जाता है. अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित यह मठ पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है. परिसर में कमल का तालाब और रुद्राक्ष के पेड़ हैं, जो यहां के वातावरण को और भी शांत बनाते हैं. पर्यटक और श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के साथ ध्यान भी कर सकते हैं.

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सिरोही. प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन माउंट आबू की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच बना शंकर मठ धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सुंदरता और अपनी अनोखी बनावट के लिए पहचाना जाता है. यहां जिले का सबसे बड़ा शिवलिंग आकर्षण का केंद्र है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं को भगवान शिव के दर्शन के साथ शांत वातावरण में कुछ समय बिताने का मौका मिलता है. अरावली की हरियाली से घिरा यह मठ स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है.

स्थानीय टूरिस्ट गाइड प्रकाश कुमार ने बताया कि शंकर मठ की स्थापना वर्ष 1960 से 1962 के बीच संत स्वामी महेशानंद गिरि महाराज ने की थी. वर्ष 1965 के बाद यहां संन्यासियों का स्थायी निवास शुरू हुआ. वहीं, मुख्य शिव मंदिर का निर्माण वर्ष 1975 में शुरू हुआ. वर्तमान में मठ का संचालन स्वामी पुण्यानंद गिरि महाराज के मार्गदर्शन में किया जाता है.

मंदिर में 27 टन वजनी शिवलिंग विराजमान
मंदिर की खास बात यह है कि गर्भगृह में करीब 9.5 फीट ऊंचा, 7.5 फीट चौड़ा और करीब 27 टन वजनी शिवलिंग विराजमान है. इसे काले संगमरमर के एक ही विशाल पत्थर से तैयार किया गया है. इसे तराशते समय पत्थर पर भगवान शिव की तीसरी आंख और जटाओं जैसी आकृतियां प्राकृतिक रूप से उभर आई थीं. मंदिर की बनावट ऐसी है कि मानसून के दौरान बारिश का पानी शिवलिंग पर गिरता है, जिसे श्रद्धालु प्राकृतिक जलाभिषेक के रूप में देखते हैं.

मंदिर की अनोखी बनावट, गुंबद की जगह बना है शिवलिंग
लाल पत्थरों से बने इस मंदिर की खास बनावट और आसपास की हरियाली इसे अलग पहचान देती है. मंदिर के गुंबद की जगह विशाल शिवलिंग बना हुआ है. परिसर में कमल का तालाब और रुद्राक्ष के पेड़ हैं, जो यहां के वातावरण को और भी शांत बनाते हैं. पर्यटक और श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के साथ ध्यान भी कर सकते हैं. यहां संन्यासियों और श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए ‘शंकर धाम’ की सुविधा भी उपलब्ध है.

सोमवार को भस्म आरती और रोजाना वेदांत-उपनिषद का पाठ
शंकर मठ में सुबह और शाम वेदांत तथा उपनिषद का पाठ होता है. इसके अलावा, रोजाना तीन बार आरती की जाती है. वहीं, सोमवार को विशेष भस्म आरती का आयोजन होता है. मंदिर के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान रखना चाहिए कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक मुख्य मंदिर के कपाट बंद रहते हैं.



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