Kota News: सुबह 4 घंटे और शाम को 4 घंटे प्रैक्टिस, रात में पढ़ाई; कोटा के कुणाल ने ऐसे जीता नेशनल वुशू में गोल्ड मेडल

Kota News: सुबह 4 घंटे और शाम को 4 घंटे प्रैक्टिस, रात में पढ़ाई; कोटा के कुणाल ने ऐसे जीता नेशनल वुशू में गोल्ड मेडल


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Kota News: कोटा के युवा खिलाड़ी कुणाल चौधरी ने 70वीं नेशनल स्कूल गेम्स वुशू चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता है. कुणाल रोजाना आठ घंटे अभ्यास करते हैं और उनका लक्ष्य अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए मेडल जीतना है. कुणाल के मुताबिक, उनके पिता एक कोच की तरह उनसे मेहनत करवाते हैं और उनकी तैयारी में पूरा सहयोग देते हैं. वहीं, उनकी बहन अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं. बहन की उपलब्धियों ने कुणाल को खेल में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.

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कोटा. शिक्षा नगरी कोटा के युवा खिलाड़ी कुणाल चौधरी ने 70वीं नेशनल स्कूल गेम्स वुशू चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है. कुणाल की इस सफलता के पीछे घंटों का अभ्यास, परिवार का सहयोग और खेल के प्रति उनका जुनून है. 11वीं कक्षा में पढ़ने वाले कुणाल पढ़ाई के साथ खेल को भी समय दे रहे हैं. अब उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए मेडल जीतना है.

कुणाल चौधरी की खेल यात्रा बचपन से शुरू हुई. उनकी मां ने बड़ी बहन को वुशू खेल से जोड़ा था. कुणाल भी बचपन में बहन के साथ अभ्यास के लिए जाते थे. बहन को खेल में आगे बढ़ते देखकर उन्हें प्रेरणा मिली और उन्होंने भी बड़ा खिलाड़ी बनने का सपना देखा. धीरे-धीरे खेल के प्रति उनकी रुचि बढ़ती गई और उन्होंने अपनी तैयारी को बेहतर बनाया. इसका परिणाम नेशनल स्कूल गेम्स में गोल्ड मेडल के रूप में सामने आया.

पढ़ाई के साथ प्रैक्टिस करते हैं कुणाल
कुणाल बताते हैं कि वह सुबह चार घंटे और शाम को चार घंटे अभ्यास करते थे. इतनी मेहनत के साथ पढ़ाई को संभालना आसान नहीं था. अभ्यास के बाद थकान होने के बावजूद वह रात करीब 10 बजे तक पढ़ाई करते थे और फिर 11 बजे सो जाते थे. खेल और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाकर उन्होंने अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाए.

पिता कराते हैं अभ्यास, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बहन से मिली प्रेरणा
कुणाल की सफलता में उनके परिवार की अहम भूमिका है. उनके पिता सेना से एक्स-सर्विसमैन हैं और खुद उन्हें अभ्यास कराते हैं. कुणाल के मुताबिक, उनके पिता एक कोच की तरह उनसे मेहनत करवाते हैं और उनकी तैयारी में पूरा सहयोग देते हैं. वहीं, उनकी बहन अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं. बहन की उपलब्धियों ने कुणाल को खेल में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. कुणाल अपनी मां को भी अपनी सफलता का महत्वपूर्ण आधार मानते हैं. उनकी मां पुलिस विभाग में हेड कांस्टेबल हैं. कुणाल का कहना है कि मां ने ही उनकी बहन को खेल के लिए प्रेरित किया था और उसी से उन्हें भी आगे बढ़ने की राह मिली. परिवार के इसी सहयोग ने उन्हें मुश्किल समय में भी हिम्मत बनाए रखने में मदद की.

हार से सीखा, अब बॉक्सिंग में भी गोल्ड का लक्ष्य
खेल के सफर में कई बार ऐसे मौके आते हैं, जब खिलाड़ी निराश हो जाता है. कुणाल भी मानते हैं कि कभी-कभी हार के बाद आगे बढ़ना मुश्किल लगता है, लेकिन वह खुद को समझाते हैं कि एक बार हारने का मतलब यह नहीं है कि अगली बार जीत नहीं मिल सकती. इसी सोच के साथ वह लगातार मेहनत करते रहे. वुशू में नेशनल गोल्ड मेडल जीतने के साथ कुणाल की रुचि बॉक्सिंग में भी है. वह बॉक्सिंग में स्टेट गोल्ड मेडल भी जीत चुके हैं. अब उनका सपना वर्ष 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करना और देश के लिए मेडल जीतना है. कुणाल की कहानी बताती है कि मेहनत, अनुशासन और परिवार का साथ मिले, तो कम उम्र में भी बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ा जा सकता है.



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