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जीएसटी में 1 जनवरी से एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. सरकार अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लाने की तैयारी में है, जो खरीदार को सौदा करने से पहले ही सप्लायर की टैक्स पेमेंट हिस्ट्री और डिफॉल्ट की जानकारी दे देगा. इससे व्यापारियों को यह पहले ही पता चल सकेगा कि उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) मिलने की कितनी संभावना है, जिससे उनका पैसा अटकने से बच जाएगा.
जीएसटी भरने वाले कारोबारियों को मिलेगा कवच.
कारोबारियों और जीएसटी करदाताओं के लिए खुशखबरी है. सरकार गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को लेकर एक ऐसा बदलाव करने जा रही है, जो खरीदारों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा. सूत्रों के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से जीएसटी सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक नया अर्ली वॉर्निंग सिस्टम शुरू होने जा रहा है. इस नए सिस्टम के आने से खरीदार अब किसी भी सप्लायर के साथ डील करने से पहले ही उसकी टैक्स हिस्ट्री और ईमानदारी का पता लगा सकेंगे.
अक्सर कई बॉयर्स उस वक्त बड़ी मुसीबत में फंस जाते हैं जब वे किसी सप्लायर से माल तो खरीद लेते हैं, लेकिन वह सप्लायर समय पर अपना जीएसटी सरकार को नहीं चुकाता. ऐसी स्थिति में खरीदार का इनपुट टैक्स क्रेडिट ब्लॉक हो जाता है या फंस जाता है. इस समस्या को रोकने के लिए सरकार अर्ली वॉर्निंग सिस्टम ला रही है. अब जैसे ही कोई खरीदार किसी सप्लायर के साथ लेनदेन शुरू करने की सोचेगा, यह सिस्टम सप्लायर के पिछले टैक्स पेमेंट की पूरी कुंडली और हिस्ट्री खंगालकर खरीदार को तुरंत अलर्ट भेज देगा. अगर सप्लायर का टैक्स चुकाने का रिकॉर्ड खराब है, तो खरीदार को सौदा करने से पहले ही पता चल जाएगा.
अर्ली वॉर्निंग सिस्टम कैसे काम करेगा
इसे जीएसटी के इनवॉयस मैनेजमेंट सिस्टम के साथ लिंक किया जाएगा. सप्लायर के इनवॉयस जारी करने से पहले ही खरीदार को उसकी टैक्स पेमेंट हिस्ट्री का पूरा लेखा-जोखा और रेटिंग्स स्क्रीन पर दिखाई दे जाएगी. इससे व्यापारी को यह फैसला लेने में आसानी होगी कि उसे उस सप्लायर के साथ कारोबार आगे बढ़ाना चाहिए या नहीं.
पहले ही पता चल जाएगी ITC मिलने की उम्मीद
इस नए सुरक्षा सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि खरीदार को सौदा करने से पहले ही यह अंदाजा मिल जाएगा कि उसे इस ट्रांजैक्शन पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) मिलने की कितनी संभावना है. आईटीसी का मतलब उस टैक्स छूट से है, जो कोई भी कारोबारी कच्चा माल या सेवाएं खरीदते समय चुकाए गए जीएसटी के बदले क्लेम करता है. नए सिस्टम से खरीदार को पहले ही पता चल जाएगा कि उसका आईटीसी तुरंत और सुरक्षित तरीके से मिल जाएगा या फिर सप्लायर की सुस्ती के कारण उसका पैसा अटक सकता है.
1 जनवरी से शुरू होने की तैयारी
सूत्रों का कहना है कि सरकार इस अत्याधुनिक एआई सिस्टम को 1 जनवरी से देश भर में लागू करने की तैयारी में है. हालांकि, इस व्यवस्था के पूरी तरह लागू होने के बाद ही इसका वास्तविक अनुभव मिल पाएगा, लेकिन यह तय है कि इस कदम से धोखाधड़ी करने वाले और टैक्स चोरी करने वाले सप्लायर्स पर नकेल कसेगी, जबकि ईमानदार व्यापारियों का करोड़ों रुपया अटकने से बच जाएगा.