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हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में गज्ज खड्ड पर बन रहे पुल का निर्माण कार्य इसी साल पूरा होने की उम्मीद है. कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने निरीक्षण कर तेजी लाने के निर्देश दिए. पुल बनने से नगरोटा सूरियां
कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने 86 करोड़ 34 लाख रुपये की लागत से बन रहे इस पुल का निरीक्षण कर अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए.
नूरपुर. हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के नगरोटा सूरियां और ज्वाली क्षेत्र के लोगों के लिए राहत भरी खबर है. गज्ज खड्ड पर निर्माणाधीन पुल इसी साल जनता को समर्पित किया जाएगा. कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने 86 करोड़ 34 लाख रुपये की लागत से बन रहे इस पुल का निरीक्षण कर अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए. पुल बनने से दोनों क्षेत्रों के बीच दूरी घटने के साथ पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.
जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की ‘सेतु बंधन योजना’ के तहत गज्ज खड्ड पर पुल बन रहा है. ऐसे में अब कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने निर्माण कार्य का जायजा लिया है. उन्होंने संबंधित कंपनी और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए निर्धारित समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए.
घट जाएगी दूरी, लोगों का बचेगा समय
इस पुल के बनने से नगरोटा सूरियां से ज्वाली के बीच की दूरी करीब 25 किलोमीटर से घटकर 16 किलोमीटर रह जाएगी. इससे लोगों के समय और यात्रा खर्च की बचत होगी, वहीं बेहतर सड़क संपर्क से क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
828 मीटर लंबा और 12 मीटर चौड़ा होगा पुल
गज्ज खड्ड पर बन रहा यह पुलिस पाइल फाउंडेशन तकनीक से बन रहा है. इसमें जमीन से लगभग 25 मीटर नीचे तक गड्ढा किया गया है और फिर कंकरीट और सरिया से भरकर पिल्लरनुना आकार बनाया गया है और फिर ऊपर पिल्लरों का निर्माण किया जाता है गज खड्ड पर बनने वाले पुल की लंबाई लगभग 828 मीटर और चौड़ाई 12 मीटर है और डबललेन के साथ दोनों ओर फुटपाथ बन रहे हैं.
दिसंबर 2027 इसकी डेडलाइन रखी
कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने बताया कि हमारा प्रयास है कि पुल को इसी साल जनता को समर्पित किया जाए. पुल बनने से नगरोटा सूरियां और ज्वाली के बीच की दूरी करीब 25 किलोमीटर से घटकर 16 किलोमीटर रह जाएगी. इससे लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी, समय और खर्च की बचत होगी तथा क्षेत्र में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा. गौर रहे कि करीब छह महीने पहले पुल का निर्माण शुरू किया था और दिसंबर 2027 इसकी डेडलाइन रखी गई है.